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कितने रुपये से शुरू हो जाती है झींगा की खेती, इन्हें पालने में कितना मुनाफा?

कम लागत में तगड़ा मुनाफा देता है झींगा पालन. जानिए कैसे सिर्फ डेढ़ से दो लाख रुपये में शुरू कर सकते हैं यह बिजनेस और कमा सकते हैं लाखों का तगड़ा प्रॉफिट. क्या है इसका पूरा प्रोसेस? जान लीजिए.

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  • झींगा पालन कम समय में अच्छा मुनाफा देने वाला व्यवसाय.
  • मीठे पानी में नई तकनीक से किसान कर रहे बंपर उत्पादन.
  • छोटे स्तर पर 1.5-2 लाख लागत, सरकारी मदद भी उपलब्ध.
  • सही देखरेख से 4-5 महीने में 2-3 लाख मुनाफा हो सकता है.

आज के दौर में खेती-किसानी के मायने पूरी तरह बदल चुके हैं. पारंपरिक फसलों से हटकर किसान अब उन बिजनेस की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं. जो कम समय में तगड़ा मुनाफा दे सकें. इसी लिस्ट में झींगा पालन यानी प्रॉन फार्मिंग का नाम सबसे ऊपर चल रहा है. डिमांड इतनी जबरदस्त है कि देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक इसकी भारी मांग बनी हुई है. पहले ऐसा माना जाता था कि झींगे पालने के लिए समंदर का खारा पानी होना जरूरी है. 

लेकिन अब नई तकनीकों के इस्तेमाल से किसान मीठे पानी के तालाबों में भी इसकी बंपर पैदावार ले रहे हैं. अगर आप भी खेती के साथ एक्सट्रा इनकम का जरिया तलाश रहे हैं तो झींगा पालन आपके लिए मुनाफे का सौदा साबित हो सकता है. इसी वजह से बहुत से युवाओं और किसानों का रुझान इस तरफ तेजी से बढ़ रहा है. जान लें कितनी आती है इसमें लागत और क्या है मुनाफे का हिसाब.

कितने खर्च में शुरू होता है झींगा पालन का बिजनेस?

अगर आपके मन में यह सवाल है कि इस काम को शुरू करने में आखिर कितने रुपये लगेंगे तो बता दें कि छोटे स्तर पर इसकी शुरुआत डेढ़ से दो लाख रुपये के शुरुआती खर्च से की जा सकती है. हालांकि अगर आप व्यावसायिक यानी बड़े पैमाने पर एक एकड़ जमीन या तालाब में इसकी शुरुआत करना चाहते हैं. तो खर्च थोड़ा बढ़ जाता है. इसमें तालाब की खुदाई या उसकी साफ-सफाई, अच्छी क्वालिटी वाले झींगा बीज, स्पेशल फीड, और ऑक्सीजन पंप जैसी जरूरी मशीनें शामिल होती हैं. 

अच्छी बात यह है कि सरकार ने हाल ही में झींगा फीड और इसके ब्रूडस्टॉक के आयात पर लगने वाले कस्टम ड्यूटी को काफी कम कर दिया है. जिससे किसानों को अब दाने और बीजों पर कम लागत चुकानी पड़ती है. इसके अलावा आप चाहें तो बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड या फिर मत्स्य संपदा योजना के तहत लोन और सब्सिडी का लाभ उठाकर इस शुरुआती लागत के बोझ को और भी ज्यादा कम कर सकते हैं.


कितने रुपये से शुरू हो जाती है झींगा की खेती, इन्हें पालने में कितना मुनाफा?

तालाब की तैयारी और खानपान का सही तरीका

झींगा पालन में सफलता पाने के लिए सबसे जरूरी काम है तालाब का सही रखरखाव. बिजनेस शुरू करने से पहले तालाब के पुराने पानी को पूरी तरह निकालकर उसे धूप में अच्छी तरह सुखाया जाता है. जिससे सारे हानिकारक बैक्टीरिया खत्म हो जाएं. इसके बाद मिट्टी के पीएच लेवल को मेंटेन करने के लिए तय मात्रा में चूने का छिड़काव किया जाता है. 

जब तालाब में ताजा और साफ पानी भर दिया जाता है. तब इसमें झींगा के बीजों को छोड़ा जाता है. शुरुआत में इनके खाने-पीने का खास ख्याल रखना पड़ता है. इन्हें प्रोटीन वाले दाने, मैदे और अंडे का मिश्रण या बाजार में मिलने वाला स्पेशल कमर्शियल फीड दिया जाता है. इनकी ग्रोथ पर नजर रखने के लिए बीच-बीच में जाल डालकर इनके साइज को चेक करते रहना बेहद जरूरी होता है. जिससे कमजोर और बीमार झींगों की समय रहते देखभाल की जा सके.

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इतनी हो सकती है कमाई

कमाई की बात करें तो झींगा पालन का बिजनेस किसानों को मालामाल कर सकता है. झींगा के बीज डालने के बाद 4 से 5 महीने के भीतर पूरी तरह तैयार हो जाते हैं. इस दौरान सही देखरेख मिलने पर झींगा अच्छी खासी ग्रोथ पा लेते हैं और बाजार में इनकी कीमत भी बहुत शानदार मिलती है. अगर आप एक एकड़ पानी में इसकी खेती करते हैं.

तो सारी लागत जिसमें बिजली, दाना, मजदूरी और बीज का खर्च निकालने के बाद भी आसानी से 2 से 3 लाख रुपये का मुनाफा कमा सकते हैं. बाजार में इसकी डिमांड हमेशा हाई रहती है. जिसके चलते स्थानीय आढ़तों से लेकर बड़े एक्सपोर्टर्स तक इसे हाथों-हाथ खरीद लेते हैं. यही वजह है कि कम समय में बेहतरीन रिटर्न चाहने वाले किसानों के बीच यह बिजनेस तेजी से फेवरेट बन रहा है.


कितने रुपये से शुरू हो जाती है झींगा की खेती, इन्हें पालने में कितना मुनाफा?

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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