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कैसे होती है घास की खेती? इससे भी लाखों कमा सकते हैं किसान

नेपियर घास को हरे चारे के रूप में उगाकर किसान पशुपालकों को बेच सकते हैं. नेपियर घास की सही देखभाल करके और लगातार कटाई से इससे अच्छी अतिरिक्त कमाई की जा सकती है.

खेती में अब किसान सिर्फ गेहूं, धान और सब्जियों पर ही निर्भर नहीं हैं, अब पशुपालन और डेरी जैसे विकल्प भी बढ़ गए है. इसलिए पशुओं के चारे की बढ़ती जरूरत को देखते हुए चारा फसलों की खेती भी कर रहे हैं. इस खेती में बाजरा-नेपियर हाइब्रिड घास एक ऐसा विकल्प है, जिसे एक बार लगाने के बाद कई बार काटकर हरा चारा बनाया जा सकता है. इसकी मांग डेयरी किसानों और पशुपालकों के बीच ज्यादा रहती है. ICAR के मुताबिक कुछ इलाकों में किसानों ने नेपियर घास का व्यावसायिक चारा फार्म बनाकर अच्छी कमाई भी की है.

नेपियर घास की खेती कैसे होती है?

नेपियर घास आमतौर पर बीज से नहीं बल्कि इसकी कटिंग या जड़ वाली पौध से लगाई जाती है. खेत की अच्छी तैयारी करके सही दूरी पर इसकी रोपाई की जाती है. पौधे लगाने के बाद खेत में जरूरत के हिसाब से पानी और खाद देना जरूरी होता है. ICAR की जानकारी के मुताबिक पहली कटाई आमतौर पर करीब 60 से 70 दिन बाद की जा सकती है. इसके बाद अच्छी बढ़वार होने पर लगभग 30 से 35 दिन के अंतर पर अगली घास की कटाई की जाती है.

एक बार लगाकर कई बार काट सकते हैं घास

नेपियर घास की सबसे खास बात यह है कि किसान इसे एक बार खेत में लगाने के बाद सही देखभाल के साथ कई बार काट सकते हैं. पहली कटाई करीब 60-70 दिन बाद की जा सकती है. इसके बाद घास दोबारा बढ़ती है और करीब 30-35 दिन के अंतर पर इसकी अगली कटाई की जा सकती है. इससे किसान को बार-बार नई फसल लगाने की जरूरत नहीं पड़ती और पूरे साल हरे चारे की उपलब्धता बनी रह सकती है. अच्छी सिंचाई, खाद और खेत की देखभाल से इसकी बढ़वार भी अच्छी होती है. यही वजह है कि पशुपालन से जुड़े किसान इसे अपने खेत में लगाना पसंद करते हैं.

घास बेचकर भी कर सकते हैं अच्छी कमाई

नेपियर घास को किसान अपने पशुओं के लिए इस्तेमाल करने के साथ-साथ बेच भी सकते हैं. आसपास के डेयरी फार्म, पशुपालक और दूसरे किसान हरे चारे की जरूरत के लिए इसे खरीद सकते हैं. अगर गांव या आसपास के इलाके में पशुपालन ज्यादा है तो किसान के लिए बाजार ढूंढना आसान हो सकता है. इस तरह एक ही खेत से मिलने वाली घास किसान के लिए पशुओं के चारे के साथ कमाई का जरिया भी बन सकती है.

कितनी कमाई होगी, यह इन चीजों पर निर्भर

नेपियर घास से लाखों रुपये कमाने की बात सुनकर यह समझना जरूरी है कि हर किसान की कमाई एक जैसी नहीं होगी. आमदनी खेत के आकार, घास की पैदावार, पानी की सुविधा, मजदूरी और आसपास मिलने वाली कीमत पर निर्भर करती है. अगर किसान के पास ज्यादा जमीन है और वह लगातार अच्छी पैदावार ले रहा है, साथ ही उसे आसपास अच्छा बाजार मिल जाता है तो कमाई काफी बढ़ सकती है. इसलिए इसे अच्छी कमाई का विकल्प माना जा सकता है, लेकिन तय कमाई नहीं.

पशुपालन करने वाले किसानों के लिए भी फायदेमंद

अगर किसान के पास गाय, भैंस या दूसरे पशु हैं तो नेपियर घास की खेती उसके लिए और भी उपयोगी हो सकती है. इससे खेत पर ही हरा चारा तैयार हो जाता है और बाहर से चारा खरीदने का खर्च कम किया जा सकता है. जरूरत से ज्यादा घास होने पर किसान इसे आसपास के पशुपालकों को बेच सकता है. इस तरह एक तरफ पशुओं के लिए चारा मिलता है और दूसरी तरफ अतिरिक्त घास से कमाई भी हो सकती है.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

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