बकरी पालन पर मिल रही 50% सब्सिडी, ऐसे उठाएं योजना का लाभ
अगर आप बकरी पालन शुरू करना चाहते हैं. लेकिन इसके लिए पैसों का इंतजाम नहीं है तो फिर परेशान होने की जरूरत नहीं है. सरकार आपके खर्च को कर देगी आधा. जानें इस जबरदस्त छूट और मौके का फायदा कैसे उठाना है.

खेती में अक्सर किसानों को बहुत ज्यादा मुनाफा नहीं हो पाता है. इसलिए वह खेती के साथ-साथ कई बार अलग-अलग चीजें भी ट्राई करते हैं और इन्हीं कामों में बकरी पालन भी आता है. अगर आप भी गांव में या फिर किसी छोटे शहर में रहते हैं और ऐसे ही किसी बिजनेस की तलाश कर रहे हैं. जो आपको हर महीने कुछ ना कुछ कमाई देता रहे तो बिना देरी किए इस काम को शुरू कर सकते हैं.
क्योंकि इसमें जोखिम बहुत कम और मुनाफा बंपर होता है. सबसे अच्छी बात यह है कि अब इस काम को शुरू करने के लिए आपको पैसों की तंगी से जूझने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. सरकार पशुपालन को बढ़ावा देने और ग्रामीण युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बकरी पालन पर सीधे 50 फीसदी तक की बंपर सब्सिडी दे रही है.
सीतामढ़ी सहित बिहार के तमाम जिलों में पशुपालन विभाग इस योजना को में किसानों को अच्छी सहायता दे रहा है. अगर आपके पास थोड़ी सी जमीन तो सरकार आधी लागत खुद उठाकर आपको अपना फार्म खड़ा करने में पूरी मदद करेगी. जान लीजिए कैसे मिलेगी सरकार से मदद.
क्या है बकरी पालन योजना?
पशुपालन विभाग की इस खास योजना का मकसद बेरोजगार युवाओं और छोटे किसानों को खुद का रोजगार शुरू करने के लिए आर्थिक सहारा देना है. योजना के तहत अलग-अलग क्षमता के फार्मिंग यूनिट्स तय किए गए हैं. जैसे 20 बकरियों के साथ 1 बकरा या 40 बकरियों के साथ 2 बकरे की यूनिट. इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगने वाले कुल खर्च का 50 फीसदी तक अनुदान सीधे सरकार की ओर से दिया जाता है.
यानी अगर किसी प्रोजेक्ट की लागत 2 लाख रुपये आ रही है. तो उसमें से 1 लाख रुपये सरकार सीधे माफ कर देती है और बाकी रकम आप खुद लगाकर या बैंक से आसान लोन लेकर जुटा सकते हैं. वहीं आरक्षित वर्ग जैसे अनुसूचित जाति और जनजाति के लाभार्थियों के लिए यह अनुदान राशि 60 फीसदी तक पहुंच जाती है. जिससे जेब से लगने वाला पैसा बहुत कम रह जाता है.

आवेदन करने की पूरी प्रोसेस
इस योजना का लाभ उठाने के लिए पूरी प्रोसेस को पारदर्शी और ऑनलाइन रखा गया है. जिससे किसी बिचौलिये का चक्कर न रहे. इच्छुक पशुपालकों को राज्य के पशुपालन एवं मत्स्य संसाधन विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होता है. आवेदन के वक्त आपके पास आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और जमीन से जुड़े कागजात या लीज एग्रीमेंट होना जरूरी है.
इसके अलावा अगर आपने किसी सरकारी संस्थान जैसे कृषि विज्ञान केंद्र से बकरी पालन की 3 से 5 दिनों की बुनियादी ट्रेनिंग ली है. तो उसका सर्टिफिकेट जरूर लगाएं. ट्रेनिंग सर्टिफिकेट होने से आपके आवेदन के सेलेक्ट होने की संभावना सबसे ज्यादा बढ़ जाती है. फॉर्म सबमिट होने के बाद जिला पशुपालन अधिकारी द्वारा दस्तावेजों की जांच की जाती है और मंजूरी मिलने पर यूनिट लगाने की प्रक्रिया शुरू होती है.

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सही नस्ल के चुनाव से अच्छी कमाई
बकरी पालन में असली मुनाफा तभी निकलता है जब आप अपने इलाके के मौसम के हिसाब से सही नस्ल की बकरियों का चयन करें. बिहार और आसपास के मैदानी इलाकों के लिए ब्लैक बंगाल नस्ल सबसे शानदार मानी जाती है. क्योंकि यह साल में दो बार दो से तीन बच्चे देती है और इसके मीट की मांग बाजार में सबसे ज्यादा रहती है. इसके अलावा बरबरी और सिरोही नस्लें भी दूध और वजन दोनों के लिहाज से बेहतरीन मुनाफा देती हैं.
एक बार जब 20 बकरियों का यूनिट तैयार हो जाता है. तो साल भर में बच्चों की बिक्री और दूध से 2 से 2.5 लाख रुपये की आमदनी आसानी से होने लगती है. मुर्गियों की तुलना में बकरियों में बीमारियां बहुत कम लगती हैं और वे घर के आसपास की हरी पत्तियों, घास और चने के भूसे पर आराम से पल जाती हैं. जिससे देखरेख का खर्च काफी कम रहता है.
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