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Uttarakhand में मनाई गई मंगसीर की दिवाली
टिहरी जिले के सीमांत बूढाकेदार में मंगसीर दीवाली बनाई गई, कार्तिक दीवाली के एक माह बाद भव्य मंगसीर दीवाली मनाई जाती है, मान्यता के अनुसार पहले भैलो खेला जाता है, भैलो जोकि पेड़ की टहनी व चीड़ के पेड़ के छिलकों से बनाई जाती है, जिससे ग्रामीण उत्साह पूर्वक कैलापीर देवता के साथ धूमधाम से मनाई जाती है,
इस दीवाली का मुख्य उद्देश्य है कि जब टिहरी जिले में राजशाही तंत्र था तो नेपाली गोरखाली समाज द्वारा दीवाली के समय पर आक्रमण किया गया था, जिस कारण टिहरी जिले के कई हिस्से में दीवाली नही बनाई गई, जिसके उपरांत नेपाली समाज पर विजय पाने के बाद दीवाली के एक माह बाद टिहरी जिले में मंगसीर दीवाली जाती है, तब से अभी तक जिले में अनेक हिस्सो में मंगसीर दीवाली मनाई जाती है। दीवाली के मान्यता को देखते हुए देश विदेशो में रहने वाले ग्रामीण के साथ हजारी भक्त अभी तकबूढाकेदार पहुँचकर मंगसीर दीवाली मानते है, इस दीवाली को अपने अपने गृह क्षेत्र पहुँचकर दीवाली का आनंद व उत्सह लेते है, अगले दिन कैलापीर देवता की दौड़ में जो भक्त हिस्सा लेते है उन भक्तो की कैलापीर देवता मनोकामना पूरी करते है।
इस दीवाली का मुख्य उद्देश्य है कि जब टिहरी जिले में राजशाही तंत्र था तो नेपाली गोरखाली समाज द्वारा दीवाली के समय पर आक्रमण किया गया था, जिस कारण टिहरी जिले के कई हिस्से में दीवाली नही बनाई गई, जिसके उपरांत नेपाली समाज पर विजय पाने के बाद दीवाली के एक माह बाद टिहरी जिले में मंगसीर दीवाली जाती है, तब से अभी तक जिले में अनेक हिस्सो में मंगसीर दीवाली मनाई जाती है। दीवाली के मान्यता को देखते हुए देश विदेशो में रहने वाले ग्रामीण के साथ हजारी भक्त अभी तकबूढाकेदार पहुँचकर मंगसीर दीवाली मानते है, इस दीवाली को अपने अपने गृह क्षेत्र पहुँचकर दीवाली का आनंद व उत्सह लेते है, अगले दिन कैलापीर देवता की दौड़ में जो भक्त हिस्सा लेते है उन भक्तो की कैलापीर देवता मनोकामना पूरी करते है।
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