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500 रुपये के लिए दोस्त का कत्ल
दोस्ती से बड़ा कोई रिश्ता नहीं होता...और एक दोस्त कभी दगा नहीं देता...लेकिन शायद महराजगंज में इन शब्दों के मायने उस कातिल दोस्त को नहीं पता...जिसने महज 500 रुपये के लिए अपने जिगरी दोस्त को मौत के घाट उतार दिया...उसने तो सिर्फ ये कहा था...कि उधार की 500 रुपये की वो रकम कुछ दिनों में वो लौटा देगा...लेकिन उसकी बात कातिल दोस्त को समझ ही नहीं आई और उसने कर दिया बड़ा गुनाह....
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