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क्या दिल्ली अग्निकांड एक 'हत्या' है ? देखिए बड़ी बहस | Delhi Fire
दिल्ली में आज सुबह एक फैक्ट्री में जो हुआ उसकी कल्पना किसने की थी. बच्चों के स्कूल बैग बनाने वाली फैक्ट्री आग की भेंट चढ़ गई. एक चिंगारी ने सोते हुए 43 लोगों को मौत की नींद सुला दिया. दिल्ली के लिए आग के हादसे नए नहीं हैं लेकिन बार बार जब ऐसे हादसे हों तो इसे हादसा नहीं हत्या कहना सही है क्योंकि दिल्ली की फैक्ट्री जिन हालात में चल रही थी उसे सरकार की लापरवाही का संरक्षण हासिल थी. संकरी गली, सुरक्षा के इंतजाम नहीं,सुरक्षा के सर्टिफिकेट तक नहीं थे फैक्ट्री में. दावा तो ये भी है कि बच्चे भी काम कर रहे थे फैक्ट्री में. आग की लपटें अब बुझ चुकी हैं. राजनीति की रोटियां सेंककर नेता अपने अपने काम पर लग चुके हैं लेकिन सवाल ये है कि लापरवाही की सत्ता कब तक मौत के ऐसे उपहार बाटेंगी. कब तक ऐसी डेथ फैक्ट्रियां चलती रहेंगी?
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