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लद्दाख के द्रास में 'महाठंड', हथौड़े से तोड़ने पड़ रहे आलू-टमाटर
वैसे तो साल 1994 में द्रास का पारा माइनस साठ डिग्री तक चला गया था लेकिन हाल के सालों में थोड़ी राहत रही. इस साल बीस दिसंबर को यहां माइनस उनतीस डिग्री तापमान रहा और उस तापमान में सब्जियों का जो हाल हुआ वो यहां की नई पीढ़ी ने पहली बार देखा है. आलू पत्थर का गोला बन चुका है तो टमाटर को हथौड़े से मारकर भी तोड़ा नहीं जा सकता.
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श्रीप्रकाश सिंह, प्रोफेसरकुलपति, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, गढ़वाल उत्तराखंड
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