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बच्चों हम शर्मिंदा हैं, नाकारी सरकार जिंदा है ! बच्चों को मरता छोड़ने वाले संवेदनहीन सिस्टम की घंटी बजाओ
बिहार में जिस चमकी नाम की बीमारी से बच्चों को बचाने के लिए रिसर्च के नाम पर 100 करोड़ रुपए खर्च होने का दावा है. वही बीमारी 100 से ज्यादा बच्चों को हफ्ते भर में कफन ओढ़ा दे रही है. मेडिकल साइंस कहती है बीमारी का चौथा लक्षण है- चिउंटी काटने पर शरीर में हरकत ना होना. यानी बच्चे का बेसुध शरीर, जिसमें सांसें चल रही हैं. दिल धड़क रहा हो लेकिन हरकत ना हो. हम कहते हैं बच्चों की मौत का शहर बनते मुजफ्फरपुर में ऐसे ही लक्षण सरकारी सिस्टम का भी है.
ABP न्यूज़ अस्पताल के बेड पर मरीजों की तस्वीर नहीं दिखाता है लेकिन मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार को लेकर सरकार किस तरह लापरवाह है, उसकी सच्चाई सबके सामने लाने के लिए आज हमने अस्पताल के अंदर की तस्वीरें दिखाने का फैसला किया है. तस्वीरें आपको परेशान कर सकती हैं. लेकिन बड़ी संख्या में जान गंवा चुके बच्चों के बाद पीड़ित बच्चों को पर्याप्त इलाज मिल सके इसके लिए हम ये तस्वीर दिखा रहे हैं. हमारी ये कोशिश जनहित के लिए है.
ABP न्यूज़ अस्पताल के बेड पर मरीजों की तस्वीर नहीं दिखाता है लेकिन मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार को लेकर सरकार किस तरह लापरवाह है, उसकी सच्चाई सबके सामने लाने के लिए आज हमने अस्पताल के अंदर की तस्वीरें दिखाने का फैसला किया है. तस्वीरें आपको परेशान कर सकती हैं. लेकिन बड़ी संख्या में जान गंवा चुके बच्चों के बाद पीड़ित बच्चों को पर्याप्त इलाज मिल सके इसके लिए हम ये तस्वीर दिखा रहे हैं. हमारी ये कोशिश जनहित के लिए है.
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