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भारतीय सिनेमा को कैसे मिला Angry Young Man जिसने बदल दिए फिल्मों के अंदाज़ | India का Bioscope
भारतीय सिनेमा का ये वो दौर था जब जब लोग फिल्मों में एक अलग तरह के हीरो को देखना चाह रहे थे क्योंकि 1969 तक दिलीप साहब देवानंद साहब और राज कपूर जी के उसे एरा में हीरो पैसिव ही रहा यानी कि गरीबी में रहता था लाचार रहता था मजबूर रहता था हालांकि आखरी में उसकी जीत जरूर होती थी लेकिन अब पब्लिक इस तरह की हीरो की इमेज से एक तरह से इरिटेट हो चुकी थी या ऊब चुकी थी...
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