Board of Peace में भारत बना OBSERVER, इसका क्या मतलब? INSIDE STORY | ABPLIVE
भारत ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गठित 'गाजा बोर्ड ऑफ पीस' की पहली बैठक में observer के तौर पर हिस्सा लिया। यह कदम भारत की सतर्क और रणनीतिक विदेश नीति को दर्शाता है, जहां वह वैश्विक मुद्दों पर नजर रखता है बिना किसी compulsion aur limitation के। आसान हिंदी में समझें तो observer बनना मतलब है बैठक में बैठना, चर्चा सुनना, लेकिन फैसले लेने या उसके बंधन में न पड़ना। [3] बोर्ड ऑफ पीस क्या है? 'बोर्ड ऑफ पीस' अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की नई पहल है, जो गाजा पट्टी के युद्ध के बाद पुनर्निर्माण और शांति स्थापना के लिए बनाया गया। इसकी पहली बैठक वॉशिंगटन में डोनाल्ड जे. ट्रंप इंस्टीट्यूट ऑफ पीस में हुई। ट्रंप ने करीब 50 देशों को सदस्य बनने का न्योता दिया, जिसमें से 27 देश जैसे अर्जेंटीना, अजरबैजान, हंगरी, पाकिस्तान, सऊदी अरब, यूएई और इजरायल ने पूर्ण सदस्यता ली। ट्रंप ने बोर्ड के लिए 10 अरब डॉलर देने की घोषणा की, लेकिन फिलिस्तीनी प्रतिनिधि इसमें शामिल नहीं हैं, जिससे विवाद हो रहा है। यह बोर्ड सिर्फ गाजा तक सीमित नहीं, बल्कि अन्य वैश्विक संकटों पर भी काम कर सकता है। भारत को जनवरी में दावोस लॉन्च में न्योता मिला था, लेकिन वह तब नहीं गया। अब फरवरी 2026 में पहली बैठक में observer ke roop mein pahucha. भारतीय दूतावास की चार्ज डी अफेयर्स ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। Lekin observer rehne ka matlab kya hai? Observer का मतलब है 'देखने वाला'। भारत बैठक में गया, चर्चा सुनी गाजा के पुनर्निर्माण, स्थिरता और शांति पर, लेकिन सदस्य नहीं बना। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि अमेरिका का न्योता मिला है, लेकिन फैसला विचाराधीन है। इससे भारत बिना कमिटमेंट के जानकारी ले रहा है। सोचिए, जैसे कोई दोस्त पार्टी में बुलाए, आप जाते हैं देखते हैं माहौल कैसा है, लेकिन membership card नहीं लेते। भारत ऐसा ही कर रहा – जुड़ा हुआ दिखना चाहता है, लेकिन फैसले खुद लेगा। इससे अमेरिका को संदेश जाता है कि भारत गंभीर है, लेकिन जल्दबाजी नहीं करेगा। aisa isliye kiya gaya kyunki भारत की विदेश नीति हमेशा संतुलित रहती है। गाजा मुद्दे पर भारत इजरायल का समर्थन करता है, लेकिन फिलिस्तीन के हक की भी बात करता है। बोर्ड में पाकिस्तान और इजरायल दोनों हैं, जो भारत के लिए जटिल है। पाकिस्तान भारत का पड़ोसी दुश्मन है, जबकि इजरायल रक्षा सहयोगी। Observer बनकर भारत दोनों को देख रहा है। ट्रंप प्रशासन के साथ भारत के रिश्ते मजबूत हैं, खासकर क्वाड और व्यापार में। लेकिन बोर्ड में फिलिस्तीन की अनुपस्थिति से भारत UN जैसी संस्थाओं का सम्मान करता है। भारत BRICS और G20 जैसे मंचों पर सक्रिय है, इसलिए नया बोर्ड जॉइन करने से पहले सब तौल रहा। observer बनना भारत को चर्चा से अपडेट रखता है बिना जोखिम। बैठक में 50 देशों के प्रतिनिधि थे, 27 सदस्य और बाकी पर्यवेक्षक। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भारत की उपस्थिति को सकारात्मक बताया गया – यह ट्रंप को मैसेज है कि भारत शांति चाहता है। लेकिन कुछ आलोचना हुई कि बोर्ड फिलिस्तीन-केंद्रित नहीं लगता। भारत ने इससे पहले ट्रंप के गाजा शांति प्लान का स्वागत किया था। भारत का यह कदम मध्य पूर्व में उसकी बढ़ती भूमिका दिखाता है। भारत गाजा में मानवीय सहायता देता रहा है। पर्यवेक्षक बनकर वह पुनर्निर्माण योजनाओं पर नजर रख सकता है। आगे क्या होगा? भारत जल्द सदस्य बनेगा या नहीं, MEA की समीक्षा पर निर्भर। अगर जॉइन किया तो गाजा सहायता बढ़ेगी। पर्यवेक्षक रहकर भी भारत प्रभाव डाल सकता है। यह घटना दिखाती है कि भारत वैश्विक मंचों पर स्मार्ट तरीके से खेलता है – न ज्यादा आगे, न पीछे।


























