Face ID और एंड्रॉयड के फेस अनलॉक में क्या होता है अंतर? जानें कौन ज्यादा बेहतर
Face ID और Android के Face Unlock में क्या अंतर है? आइए जानते हैं दोनों की टेक्नोलॉजी, सिक्योरिटी और काम करने के तरीके में फर्क जिससे आपको आसानी से समझ आए कि दोनों कैसे अलग हैं.

आजकल ज्यादातर स्मार्टफोन में चेहरे से फोन अनलॉक करने का फीचर मिल जाता है. Apple इसे Face ID कहता है जबकि Android फोन में इसे आमतौर पर Face Unlock के नाम से जाना जाता है. देखने में दोनों फीचर एक जैसे लगते हैं लेकिन इनके पीछे काम करने वाली टेक्नोलॉजी में बड़ा अंतर है. यही वजह है कि हर Face Unlock सिस्टम, Apple के Face ID जितना सुरक्षित नहीं होता है.
Apple Face ID कैसे करता है काम?
आपको बता दें कि Apple का Face ID सिर्फ फोन के फ्रंट कैमरे से चेहरा देखकर फोन अनलॉक नहीं करता. iPhone में इसके लिए TrueDepth कैमरा सिस्टम इस्तेमाल किया जाता है. यह यूजर के चेहरे पर हजारों छुपे हुए इंफ्रारेड डॉट्स प्रोजेक्ट करके चेहरे का एक 3D मैप तैयार करता है.
इस सिस्टम में इंफ्रारेड कैमरा और दूसरे सेंसर मिलकर चेहरे की गहराई और अलग-अलग हिस्सों की बनावट को पहचानते हैं. इसके बाद फोन इस जानकारी को सिक्योर तरीके से स्टोर किए गए फेस डेटा से मैच करता है.
इसका एक बड़ा फायदा यह है कि कम रोशनी या अंधेरे में भी Face ID काम कर सकता है. Apple का सिस्टम फोटो या सिर्फ स्क्रीन पर दिखाई देने वाली 2D तस्वीर से धोखा खाना काफी मुश्किल बनाता है.
Android Face Unlock कैसे अलग है?
Android फोन में Face Unlock की टेक्नोलॉजी हर डिवाइस पर एक जैसी नहीं होती है. कई स्मार्टफोन में यह सिर्फ 2D फ्रंट कैमरे की मदद से चेहरे की पहचान करता है. कैमरा चेहरे की फोटो लेता है और सॉफ्टवेयर उसमें मौजूद पैटर्न को सेव किए गए डेटा से मिलाता है.
ऐसे सिस्टम का फायदा यह है कि इसे फोन में लागू करना आसान और अपेक्षाकृत सस्ता होता है. लेकिन इसकी सुरक्षा 3D फेस स्कैनिंग वाले सिस्टम से अलग हो सकती है.
हालांकि, सभी Android फोन का Face Unlock कमजोर नहीं होता. कुछ प्रीमियम Android डिवाइस एक्सट्रा हार्डवेयर, इंफ्रारेड सेंसर या 3D फेस-मैपिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं. इसलिए किसी Android फोन की सुरक्षा को सिर्फ Face Unlock नाम देखकर तय नहीं किया जा सकता है.
यह भी पढ़ें: AI कॉल का बढ़ता खतरा! जानें कैसे होती है स्पैम की पहचान
सुरक्षा में क्यों है इतना बड़ा अंतर?
Face ID का सबसे बड़ा अंतर इसका 3D डेप्थ डेटा है. यह सिर्फ यह नहीं देखता कि सामने चेहरा कैसा दिख रहा है बल्कि चेहरे की गहराई और साइज को भी समझता है. वहीं नॉर्मल 2D Face Unlock कैमरे से मिलने वाली फोटो पर निर्भर करता है. इस वजह से कुछ फोन में फोटो या मिलते-जुलते चेहरे से सुरक्षा प्रभावित होने की संभावना ज्यादा हो सकती है.
यही कारण है कि बैंकिंग, पासवर्ड मैनेजर और दूसरी संवेदनशील एक्टिविटी के लिए फोन निर्माता अलग-अलग लेवल की बायोमेट्रिक सुरक्षा उपलब्ध कराते हैं.
क्या Face ID हमेशा ज्यादा बेहतर है?
सिर्फ फीचर के नाम से फैसला करना सही नहीं होगा. Android में भी ऐसे फोन मौजूद हैं जिनकी फेस ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी काफी एडवांस है. अगर सुरक्षा आपकी प्राथमिकता है तो फोन खरीदते समय यह देखना जरूरी है कि उसमें 2D कैमरा आधारित फेस अनलॉक है या 3D/डेप्थ सेंसर आधारित ऑथेंटिकेशन.
Face Unlock के साथ PIN क्यों जरूरी है?
चेहरे की पहचान सुविधाजनक जरूर है लेकिन यह अकेली सुरक्षा व्यवस्था नहीं है. फोन में मजबूत PIN या पासकोड रखना हमेशा जरूरी है. कई कंडिशन में स्मार्टफोन बायोमेट्रिक के बजाय पासकोड मांगता है. इसलिए Apple का Face ID हो या Android का Face Unlock, सबसे सुरक्षित तरीका मजबूत पासकोड और भरोसेमंद बायोमेट्रिक सिस्टम का इस्तेमाल करना है.
यह भी पढ़ें:
Noise Cancelling Headphones यूज करने से पहले जानें सच्चाई! नहीं तो पड़ेगा पछताना




















