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उत्तराखंड: चारधाम यात्रा से जुड़ी अच्छी खबर, अब प्रदेश के अन्य हिस्सों से भी आ सकेंगे श्रद्धालु

कोरोना महामारी के संकट के चलते चारधाम यात्रा के लिये सिर्फ स्थानी लोगों को दर्शन की अनुमति है. लेकिन देवस्थानम बोर्ड ने साफ कर दिया है कि जल्द ही प्रदेश भर को लोगों को इस यात्रा के लिये मंजूरी दी जाएगी

देहरादून. उत्तराखंड चारधाम यात्रा को लेकर पिछले लंबे समय से बनी हुई संशय की स्थिति जल्द ही स्पष्ट हो सकती है. हालांकि चारधाम यात्रा को लेकर राज्य सरकार ने फिलहाल स्थानीय लोगों के लिए मंजूरी दी थी. लेकिन अब आगामी 30 जून से प्रदेश के श्रद्धालुओं के लिए चारधाम यात्रा शुरू की जा सकती है. इस संबंध में चारधाम देवस्थानम बोर्ड रणनीति बनाने में जुट गया है, और जल्द ही बैठक होने के बाद चारधाम यात्रा पर स्थिति साफ हो जाएगी. भक्त अपने भगवान के दर्शन कर सकते हैं, हालांकि चारधाम यात्रा को लेकर अभी तक क्या हालात रहे हैं और क्या कुछ निर्णय ले सकती है राज्य सरकार? इस पर हमारी स्पेशल रिपोर्ट पढ़िये.

उत्तराखंड चारधाम यात्रा कई मायने में बेहद खास है, क्योंकि ना सिर्फ चारधाम के दर्शन करने के लिए हर सीजन में देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, बल्कि चारधाम यात्रा पर करीब 5 लाख से अधिक लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है, लेकिन इस सीजन में वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के चलते तय समय पर चारधाम के कपाट तो खुले लेकिन चारधाम की यात्रा नहीं चलाई जा सकी. यही नहीं 8 जून से सिर्फ स्थानीय लोगों के लिए चारधाम यात्रा चलाई गई थी, ऐसे में अब राज्य सरकार प्रदेश स्तर पर चारधाम यात्रा की मंजूरी को जल्द ही निर्णय ले सकती है.

कब खुले चारधाम के कपाट

उत्तराखंड चारधाम के कपाट खुले करीब दो महीने का समय होने जा रहा है. 26 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुले थे. इसे साथ ही 29 अप्रैल को बाबा केदारनाथ धाम के कपाट भी खुल गए थे. इसके साथ ही विश्व प्रसिद्ध चारधामों में से सर्वश्रेष्ठ धाम, बदरीनाथ धाम के कपाट भी 15 मई को ब्रह्ममुहूर्त में खोले गए थे, लेकिन वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के चलते चारधाम यात्रा नहीं चलायी गयी.

विरोध के चलते नहीं चलाई गयी चारधाम यात्रा

उत्तराखंड चारधाम के तीर्थ पुरोहित और हक- हकूकधारियों ने चारधाम यात्रा का विरोध किया था, क्योंकि प्रदेश में जिस तरह से वैश्विक महामारी कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है, इसके चलते उन्हें 30 जून तक यात्रा ना चलाने की बात कही थी. जिसे देखते हुए उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड ने चारधाम से संबंधित सभी जिलाधिकारियों को तीर्थ पुरोहितों और हक- हकूकधारियों से बात करने को कहा था. जिसके बाद निर्णय लिया गया था कि चारधाम यात्रा फिलहाल स्थानीय स्तर पर ही चलाई जाएगी. लिहाजा आगामी 30 जून के बाद प्रदेश स्तर पर चारधाम यात्रा चलाए जाने पर निर्णय लिया जा सकता है.

उत्तराखंड चारधाम की व्यवस्थाएं लगभग पूरी

8 जून के बाद उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड ने स्थानीय स्तर पर चारधाम यात्रा चलाने की अनुमति दे दी थी, इसके साथ ही 30 जून से प्रदेश स्तर पर चारधाम यात्रा चलाए जाने की तैयारियों को लेकर भी चारधाम देवस्थानम बोर्ड ने बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री धाम में जिन लोगों की निजी परिसंपत्तियां हैं, उन्हें भी रखरखाव व मरम्मत कार्य कर सकेंगे. यही नहीं जीएमवीएन के गेस्ट हाउस, मंदिर समिति और निजी परिसंपत्तियों में होटल, लॉज के मरम्मत व रखरखाव कार्य के किये जाने की अनुमति भी दी गयी थी. जिसके बाद से ही तैयारियां जोर शोर से शुरू हो गई थीं. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि 30 जून से अगर चारधाम यात्रा शुरू होती है तो चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को दिक्कत नहीं होगी.

उत्तराखंड चारधाम यात्रा पर इस सीजन होगी दोहरी चुनौती

अमूमन दिनों में चारधाम के कपाट खुलने के साथ ही चार धाम की यात्रा शुरू हो जाती थी लेकिन इस सीजन वैश्विक महामारी कोरोनावायरस के चलते चारधाम की यात्रा शुरू नहीं हो पाई है. ऐसे में 8 जून के बाद सभी धार्मिक स्थलों को खोला जाना था, लिहाजा राज्य सरकार चारधाम यात्रा को चलाने पर विचार कर रही है. हालांकि अगर अभी चारधाम की यात्रा श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं तो ऐसे में जहां कोरोना वायरस के चलते हुए श्रद्धालु बेहद काम आएंगे तो वहीं दूसरी ओर मानसून सीजन के दौरान चारधाम यात्रा फिर से ठप हो जाएगी. क्योंकि हर साल की तरह मानसून सीजन में आने वाले यात्रियों की संख्या बेहद कम हो जाती है.

उत्तराखंड चारधाम यात्रा का बीत गया पीक सीजन

उत्तराखंड चारधाम के कपाट खुलने के बाद चारधाम की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, क्योंकि यह चारधाम यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं के लिहाज से पीक समय होता है और यह वही समय होता है जब चारधाम में आने वाले श्रद्धालुओं का ग्राफ तेजी से बढ़ता है. क्योंकि इसके बाद फिर मानसून सीजन के दौरान यात्रियों की संख्या बेहद कम हो जाती है, यही नहीं मानसून सीजन के बाद यानी सितंबर-अक्टूबर महीने में एक बार फिर चारधाम की यात्रा थोड़ी रफ्तार जरूर पकड़ती है लेकिन उसके बाद फिर चारधाम के कपाट बंद होने का समय आ जाता है.

यात्रा को लेकर जल्द होगी उत्तराखंड देवस्थानम बोर्ड की बैठक

वहीं चारधाम देवस्थानम बोर्ड के सदस्य शिवप्रसाद ममगाई ने बताया कि चारधाम यात्रा चलाने को लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मुलाकात हुई है. जिसमें चारधाम यात्रा चलाने को लेकर चर्चा की गयी है. यही नहीं चारधाम यात्रा को एक जुलाई से प्रदेश स्तर पर चलाने की सहमति भी बनी है. हालांकि इस संबंध में कुछ दिनों बाद उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड की बैठक भी होनी है जिसमें प्रदेश स्तर पर चारधाम चलाने के स्वरूप को तय किया जाएगा. यही नहीं इसके लिए बकायदा एक गाइडलाइन जारी की जाएगी, जिसके अनुरूप ही चारधाम यात्रा चलाई जाएगी.

अनलॉक 2 के लिये तैयार

वहीं शासकीय प्रवक्ता और केबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि अनलॉक-1 के दौरान  सरकार द्वारा जारी की गयी गाइडलाइन के तहत तमाम धार्मिक स्थलों समेत तमाम अन्य दुकानों को खोल दिया गया था, लेकिन अब पर्यटन व्यवसाय के साथ ही तमाम अन्य पर्यटन स्थलों को खोलने के लिए अनलॉक -2 का इंतजार है. हालांकि राज्य सरकार ने इस संबंध में अपनी सारी तैयारी पूरी कर ली हैं. ऐसे में अब उम्मीद की जा रही है 30 जून को अनलॉक वन के समाप्त होने के बाद 1 जुलाई से अनलॉक- 2 के शुरू होने के दौरान केंद्र सरकार जो गाइडलाइन जारी करेगी उसके तहत प्रदेश के तमाम पर्यटक स्थलों को खोल दिया जाएगा, इसके साथ ही चार धाम यात्रा पर भी निर्णय लिया जाएगा.

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