Uttarakhand News: उत्तराखंड हाई कोर्ट ने वैक्सीन बनाने वाले डॉक्टर की सजा की माफ, कोर्ट ने कहा राष्ट्रहित में इनकी जरूरत
Uttarakhand News: उत्तराखंड हाइकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनते हुए एक डॉक्टर की सजा को माफ कर दिया है. कोर्ट ने सजा माफ करते हुए तर्क भी दिया है.

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला लेते हुए एक डॉक्टर की सजा को माफ कर दिया है कोर्ट का तर्क है कि राष्ट्रीय हित में इनकी जरूरत है वैक्सीन बनाने वाले डॉक्टर की सजा को माफ कर दिया गया है.
बता दें कि उत्तराखंड हाई कोर्ट ने वैज्ञानिक डॉक्टर आकाश यादव की सजा को और दोष सिद्ध रेड की है 2015 में पत्नी की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए यादव अब राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान से फिर से जुड़ सकेंगे और अपना योगदान दे सकेंगे.
कोर्ट ने दोषसिद्ध को किया निलंबित
बता दे कि उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक वैक्सीन वैज्ञानिक की सजा को दोष सिद्ध को निलंबित कर दिया है जिससे 2015 में अपनी पत्नी की खुदकुशी के मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने का दोष ही ठहराया गया था.
जस्टिस रविंद्र मैथानी ने डॉक्टर आकाश यादव को अपील लंबित रहने तक यह राहत दी है, ताकि वह राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में अपने महत्वपूर्ण भूमिका फिर से निभा सकें.
कोर्ट ने माना राष्ट्रहित में डॉक्टर की जरूरत
आईआईटी खड़कपुर से बायोटेक्नोलॉजी में पीएचडी करने वाले डॉक्टर आकाश यादव इंडियन इम्यूनोलॉजिकल लिमिटेड आईआईएल में सीनियर मैनेजर के रूप में काम कर रहे थे आईआईएल इंसान और पशुओं के लिए मैं वैक्सीन बनाते हैं और राष्ट्रीय टीकाकरण अभियानों में अहम भूमिका निभाते हैं.
कोर्ट ने माना कि उनकी विशेषज्ञ सार्वजनिक स्वास्थ्य और राष्ट्रीय हित के लिए जरूरी है. डॉ यादव की शादी 7 में 2015 को हुई थी उनकी पत्नी जो पंतनगर विश्वविद्यालय में कार्यरत थी 4 जुलाई 2015 को अपने भाई के साथ मायके चली गई थी जबकि यादव हैदराबाद में अपनी ड्यूटी पर थे.
14 दिसंबर 2015 को उनकी पत्नी ने आत्महत्या कर ली और अपने सुसाइड नोट में यादव को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया इसके बाद 11 में 2017 को यादव को गिरफ्तार किया गया और 3 महीने से अधिक जेल में रहने के बाद 28 अगस्त को उन्हें जमानत मिली,
दोष सिद्ध को निलंबित करने के लिए दायर किया था आवेदन
यादव ने अपने आपराधी के प्रक्रिया संहिता के धार 389 (1) के तहत एक अंतिम आवेदन दायर किया जिसमें उनकी दोष सिद्धि को निलंबित करने की मांग की गई उनके वकील ने तर्क दिया कि यह मामला राष्ट्रीय महत्व के कार्य पर सीधा प्रभाव डालता है और असाधारण परिस्थितियों को दर्शाता है.
जस्टिस मैथानी ने सुप्रीम कोर्ट के नवजोत सिंह सिद्धू बनाम पंजाब राज्य 2007 और राम नारंग बनाम रमेश नारंग 1995 के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यदि दोष सिद्ध को बनाए रखने से किसी व्यक्ति के पेशेवर स्थिति या सार्वजनिक हित की जिम्मेदारियां पर अनुचित प्रभाव पड़ता है तो अपीलीय अदालत दोष सिद्धि को निलंबित कर सकती है.
कोर्ट ने माना राष्ट्रहित से जुड़ा हुआ मामला
हाई कोर्ट ने माना कि यह मामला सार्वजनिक स्वास्थ्य और राष्ट्रीय हित से जुड़ा है कोर्ट ने कहा कि डॉक्टर यादव की भूमिका राष्ट्रीय टीकाकरण प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण है उनकी दोष सिद्धि को बनाए रखने के लिए अपूरणीय नुकसान हो सकता हैं.
इस आधार पर कोर्ट ने अपील को लंबित रहने तक उनकी सजा और दोश सिद्धि दोनों को निलंबित कर दिया है जिससे यादव अब दोबारा से अपने काम पर लौट सकते हैं अपनी वैज्ञानिक जिम्मेदारियां को फिर से शुरू कर सकते हैं.
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL






















