Uttarakhand News: वनाग्नि की घटना में कमी लाने के लिए धामी सरकार ने बनाई खास रणनीति, जानें क्या है वन विभाग की तैयारी
Dehradun News: उत्तराखंड में वनाग्नि की घटना में कमी लाने के लिए व्यापक रणनीति तैयार की गई है. इसके लिए 13 फरवरी से प्रदेश के सात जिलों में मॉकड्रिल आयोजित की जाएगी.

Uttarakhand Foreste Fire: उत्तराखंड में जंगलों में आग लगने की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग ने कमर कस ली है. फायर सीजन 15 फरवरी से शुरू माना जाता है, और इससे पहले ही तैयारियों को परखने के लिए सात जिलों में 13 फरवरी को मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी. मॉक ड्रिल से पहले 11 फरवरी को एक अहम बैठक होगी, जिसमें इसकी तैयारियों की समीक्षा की जाएगी. इस पूरी प्रक्रिया में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) सहयोग कर रहा है.
इसके साथ ही, वन विभाग ने फायर सीजन से पहले जिलों में वनाग्नि नियंत्रण और प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति कर दी है. इस बार 10 प्रमुख वन संरक्षक, अपर प्रमुख वन संरक्षक और मुख्य संरक्षक स्तर के अधिकारियों को अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी दी गई है. वन विभाग ने वनाग्नि नियंत्रण और प्रबंधन के लिए नोडल अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंप दी है, जो फायर सीजन से पहले जिलेवार तैयारियों की समीक्षा करेंगे. इन अधिकारियों का मुख्य कार्य वनाग्नि घटनाओं की रोकथाम, नियंत्रण और प्रबंधन के लिए जरूरी कदम उठाना होगा. साथ ही, वे जिलास्तरीय वन विभाग की टीमें तैयार करने और उन्हें आग से निपटने के लिए प्रशिक्षित करने का कार्य भी करेंगे
उत्तराखंड के सात जिलों में होगी मॉकड्रिल
वन विभाग के अनुसार, इस बार मॉक ड्रिल प्रदेश के सात जिलों में आयोजित की जाएगी. इस दौरान विभिन्न विभागों के कर्मचारी और अधिकारी भी इसमें भाग लेंगे. यह मॉक ड्रिल जंगलों में आग से निपटने की तैयारियों की जांच करने के लिए की जाएगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति में सभी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय हो सके. वन विभाग के अधिकारी बताते हैं कि इस ड्रिल के जरिए यह देखा जाएगा कि वन कर्मी और आपदा प्रबंधन की टीमें कितनी तेजी से आग बुझाने की प्रक्रिया शुरू कर पाती हैं और क्या सभी सुरक्षा उपकरणों और संसाधनों का सही तरीके से इस्तेमाल हो रहा है या नहीं.
वन विभाग इस साल फायर सीजन में एक नई रणनीति भी अपना रहा है. अल्मोड़ा वन प्रभाग के अंतर्गत शीतलाखेत में पहले से ही एक सफल वनाग्नि प्रबंधन मॉडल लागू किया जा चुका है, जिसे अब प्रदेश के अन्य वन प्रभागों में भी लागू किया जाएगा. शीतलाखेत मॉडल के तहत स्थानीय वन कर्मियों और वनाग्नि प्रबंधन समितियों के सदस्यों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है. उन्हें आग लगने की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने, आग फैलने से रोकने और इसे नियंत्रित करने के लिए जरूरी उपाय अपनाने की जानकारी दी जाती है. इस मॉडल को प्रभावी बनाने के लिए वन कर्मियों और समिति के सदस्यों को भ्रमण भी कराया जा रहा है, ताकि वे इस तकनीक को अपने क्षेत्रों में लागू कर सकें.
वनाग्नि की घटना रोकने के लिए बनाई व्यापक रणनीति
वन विभाग और राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने इस बार जंगल की आग को रोकने और उसे नियंत्रित करने के लिए व्यापक योजना बनाई है. इसके तहत वन क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जाएगी और आग लगने की घटनाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए विशेष टीमें तैनात की जाएंगी. स्थानीय समुदायों को जागरूक किया जाएगा, ताकि वे जंगलों में आग लगने से रोकने में सहयोग कर सकें. आधुनिक उपकरणों और तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे आग बुझाने की प्रक्रिया तेज और प्रभावी हो सके.वनाग्नि नियंत्रण समितियों को और मजबूत किया जाएगा, ताकि वे स्थानीय स्तर पर तुरंत कार्रवाई कर सकें.
फायर सीजन को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने जंगलों में कड़ी निगरानी शुरू कर दी है. राज्य सरकार की योजना है कि जंगलों में आग की घटनाओं को न्यूनतम किया जाए और इसके लिए सभी विभागों को सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए हैं. वन अधिकारियों का कहना है कि इस बार मॉक ड्रिल के जरिए आग से निपटने की तैयारियों को परखा जाएगा और यदि किसी भी स्तर पर कोई कमी पाई जाती है, तो उसे समय रहते दूर किया जाएगा. सरकार इस दिशा में हरसंभव प्रयास कर रही है.
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने क्या कहा?
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने एबीपी लाइव को बताया कि, उत्तराखंड में इस वर्ष अग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा, ताकि उत्तराखंड की वन संपदा बर्बाद न हो इसके.लिए अभी से हमारे अधिकारी कर्मचारियों को ट्रेनिंग दे रहे है साथ ही जन सहभागिता के.लिए भी कार्य किया जा रहा है.
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Source: IOCL

























