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उत्तर प्रदेश में जैविक क्रांति! गंगा किनारे 3370 ऑर्गेनिक क्लस्टर से बदल रही खेती की तस्वीर
Ganga Organic Farming UP: यूपी में नमामि गंगे के तहत 26 जिलों में 3,370 जैविक क्लस्टर विकसित कर 90 हजार किसान परिवारों को आत्मनिर्भर बनाया गया है, जिससे रसायन-मुक्त खेती और आय में वृद्धि हो रही है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
Source : abp live
Uttar Pradesh Agriculture Model: मां गंगा के किनारे उत्तर प्रदेश में अब आस्था के साथ समृद्धि की नई धारा भी बह रही है. योगी सरकार ने गंगा के तटवर्ती 26 जिलों में जैविक खेती का ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो न सिर्फ किसानों की आय बढ़ा रहा है बल्कि प्रदेश की कृषि व्यवस्था को भी नई दिशा दे रहा है. नमामि गंगे योजना के तहत गंगा के दोनों किनारों पर 5-5 किलोमीटर क्षेत्र में 3,370 जैविक क्लस्टर विकसित किए गए हैं, जिनसे करीब 90 हजार किसान परिवार आत्मनिर्भर बने हैं. योगी सरकार इन क्षेत्रों में ऑर्गेनिक विलेज विकसित कर रसायन-मुक्त खेती को मिशन मोड में आगे बढ़ा रही है.
जैविक और प्राकृतिक खेती अपनाने से किसानों की उत्पादन लागत घटी है. रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता कम होने से जहां लागत घटी है, लाख ही बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पादों से बाजार में अधिक कीमत मिल रही है. यह पहल केवल खेती सुधार तक सीमित नहीं है. इससे गंगा की स्वच्छता, मिट्टी की गुणवत्ता, भूजल संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था सभी को लाभ मिल रहा है.
गांव-गांव प्रशिक्षण, तकनीक और प्रोत्साहन
केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और प्रोत्साहन उपलब्ध कराया जा रहा है. प्राकृतिक उर्वरक और पारंपरिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देकर टिकाऊ खेती का मॉडल तैयार किया जा रहा है. वहीं, वर्ष 2024-25 में नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत राज्य स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा अब तक 35 जनपदों में जिला स्तर पर प्राकृतिक खेती की कार्यशालाएं आयोजित की जा चुकी हैं. आगामी वित्तीय वर्ष में बाकी जनपदों में भी कार्यशालाएं प्रस्तावित हैं.
ऑर्गेनिक विलेज में मिल रहे ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थ
प्रदेश के 26 गंगा तटवर्ती जिलों में चल रहे इस अभियान के तहत अब तक 3,370 जैविक क्लस्टर स्थापित किए जा चुके हैं, जिनसे किसान परिवार सीधे जुड़ चुके हैं और आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रहे हैं. गंगा के दोनों किनारों पर ऑर्गेनिक बेल्ट को इस मॉडल के लिए विकसित किया गया है, जहां गांव स्तर पर ऑर्गेनिक विलेज तैयार किए जा रहे हैं. जिससे लोगों को ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है.
रसायन-मुक्त उत्पादन से उपभोक्ताओं के बीच बढ़ी डिमांड
इस योजना की खास बात ये है कि एक ओर जहां किसानों की आय बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर लोग कीटनाशकों से प्रभावित वस्तुओं से होने वाली बीमारियों से भी बच रहे हैं. किसानों का रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों पर खर्च घटा है, वहीं दूसरी ओर मिट्टी की उर्वरता बेहतर हुई है. इसके चलते जैविक उत्पादों को बाजार में प्रीमियम रेट मिल रहा है और रसायन-मुक्त उत्पादन से उपभोक्ताओं के बीच मांग भी बढ़ी है.
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Source: IOCL


























