थराली विधानसभा सीट: BJP की पकड़ मजबूत, UKD बन रही विकल्प
चमोली जिले की थराली विधानसभा सीट पर राज्य गठन के बाद 3 चुनाव और एक उपचुनाव हुआ है, जिसमें चार में से तीन बार कमल खिला है. हालांकि, साल 2017 के चुनाव में यह कांग्रेस के पाले में चली गई.

उत्तराखंड के पिंडर घाटी में बड़ी थराली विधानसभा सीट की चमोली जिले की तीन विधानसभा सीटों में से एक है. पुराने जमाने में इसे पिंडर विधानसभा सीट के नाम से जाना जाता था. 2008 के परिसीमन के बाद इसका नाम बदलकर थराली कर दिया गया. पहाड़ी क्षेत्र की इस सीट पर हमेशा ही मौसम, भूस्खलन, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ व्यवस्था, रोजगार और पलायन चुनौती रहे हैं. यह मुद्दे हर बार चुनाव में भी उठते हैं. हालांकि, अब तक कोई भी सरकार इन मुद्दों पर कोई ठोस समाधान नहीं कर सका है.
थराली अनुसूचित जाति यानी SC वर्ग के लिए आरक्षित सीट है और इस सीट पर ज्यादातर ठाकुर और ब्राह्मण समुदाय के वोटर्स हैं. 2008 में परिसीमन के बाद से अब तक हुए चुनावों के आंकड़े देखें तो साफ पता चलता है कि थराली पर बीजेपी की पकड़ मजबूत रही है. इस सीट पर राज्य गठन के बाद 3 चुनाव और एक उपचुनाव हुआ है, जिसमें चार में से तीन बार कमल खिला है.
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2012 विधानसभा चुनाव
2008 में हुए परिसीमन के बाद 2012 में इस सीट पर पहली बार चुनाव हुए आयोजित जिसमें यह सीट कांग्रेस के खेमे में गई. कांग्रेस प्रत्याशी जीत राम को जानता ने 17404 वोटों का समर्थन देकर अपना विधायक चुना. वहीं दूसरे स्थान पर बीजेपी के मगन लाल रहे, जिन्हें 16731 वोट मिलें.
2017 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली हार
2017 के विधानसभा चुनाव में जानता का रुझान बीजेपी की ओर झुक गया. इस चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी मगन लाल शाह को 43.40 % वोटों का समर्थन प्राप्त हुआ और शाह 25931 वोट पाकर इस क्षेत्र के विधायक बने. वहीं दूसरे स्थान पर 21073 वोटों के साथ कांग्रेस से डॉ जीत राम रहे.
उपचुनाव बीजेपी के पक्ष में जनता ने सुनाया फैसला
इस सीट के विधायक मगन लाल शाह का फरवरी 2018 में आकस्मिक निधन हो गया, जिस कारण यह सीट खाली हो गई. इस सीट पर इसी साल उपचुनाव आयोजित हुए, जिसमें बीजेपी ने दिवंगत मगन लाल शाह की धर्म पत्नी मुन्नी देवी शाह को इस क्षेत्र की कमान सौंपी. मुन्नी देवी को 25737 वोटों का समर्थन देकर जानता ने उन्हें अपना प्रतिनिधि चुना. कांग्रेस के जीत राम को 23756 वोटों का समर्थन मिला.
2022 विधानसभा चुनाव में सिटिंग विधायक का काटा टिकट
हालांकि, 2022 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने मौजूदा विधायक मुन्नी देवी शाह का टिकट काट कर भूपाल राम टम्टा को अपना प्रत्याशी बनाया. टिकट कटने से नाराज होकर मुन्नी देवी ने बीजेपी पर टिकट बेचने का आरोप लगाते हुए निर्दलीय चुनाव की घोषणा तक कर डाली. हालांकि, अंत में वह निर्दलीय ना लड़ते हुए बीजेपी के समर्थन में ही नजर आई. इस चुनाव में बीजेपी के भूपाल राम टम्टा को जनता अपना विधायक चुना.
2027 के चुनाव में कौन मारेगा बाज़ी
हालांकि, 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अब तक किसी भी दल ने औपचारिक तौर पर उम्मीदवार तय नहीं किए हैं. रणनीतिकारों का मानना है कि बीजेपी की ओर से मौजूदा विधायक भूपाल राम टम्टा को दोबारा टिकट मिलने की संभावना जताई जा रही है. वहीं कांग्रेस खेमे में डॉ. जीत राम का नाम सबसे आगे है.
बीजेपी की मुश्किल बढ़ाएगी यूकेडी
इसके अतिरिक्त इस क्षेत्र में उत्तराखंड क्रांति दल भी तीसरे विकल्प के तौर पर उभर रही है. कांग्रेस से जीत राम पिछले 3 चुनाव भले ही ना जीत पायें हों लेकिन आंकड़े बताते हैं कि जीत और हार का अंतर ज्यादा नहीं है. ऐसे में UKD की ओर यदि कुछ लोगों का समर्थन जाता है, तो बीजेपी के लिए अगला चुनाव जीतना मुश्किल साबित हो सकता है.






















