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Sonbhadra News: सोनभद्र की कनहर बांध परियोजना, मुआवजे के लिए विस्थापित और प्रशासन आमने-सामने, जानिए पूरी कहानी

Kanhar Dam: इन सबके बीच बांध का कार्य दिन-रात चल रहा है. धीरे-धीरे बांध में पानी भी भरा जा रहा है. एसडीएम ने 15 दिनों के अंदर डूब क्षेत्र को खाली करने का फरमान जारी कर दिया है.

Displacement For Kanhar Dam: दशकों से विस्थापन की मार झेल रहे उत्तर प्रदेश के सोनभद्र (Sonbhadra) जिले में अब एक और विस्थापन होने जा रहा है. कनहर सिंचाई परियोजना (Kanhar Errigation Project) के कारण उत्तर प्रदेश (UP) के 11, झारखंड (Jharkhand) के 4 और छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के 6 गांवों में से कुछ आंशिक तो कुछ पूर्ण रूप से डूब क्षेत्र में आ जाएंगे. यहां के लोगों का विस्थापन होना है. 

परिजयोजना के लिए डूब जाएंगे 21 गांव
इसी साल जून तक सोनभद्र के अमवार गांव में कनहर नदी पर 43 वर्षों से बन रहा कनहर डैम बनकर तैयार हो जाएगा. इसके बाद तीनों राज्यों के सिन्दूरी, भिसूर गांव सहित 21 गांव डूब जाएंगे. उत्तर प्रदेश सरकार जून 2023 तक कनहर बांध के लिए अंतिम डेट लाइन जार कर चुकी है. इसको लेकर कनहर बांध से विस्थापित होने वाले लोगों में काफी आक्रोश है. उनका आरोप है कि प्रशासन एनजीटी के आदेशों उल्लंघन करते हुए उन्हें जबरन विस्थापित करने के लिए चेतावनी दे रहा है.

एनडी तिवारी ने शुरू की थी परियोजना
तत्कालीन कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने कनहर बांध परियोजना की शुरुआत की थी. इसके लिए 1976 से लेकर 1982 तक जब सरकार ने यहां की जमीने लीं. लोगों को उसका मुआवजा भी दिया था. इसके बाद भी लोग अपने घरों से नहीं निकले, क्योंकि 1984 में बांध का काम बंद हो गया. 

27 करोड़ की परियोजना की लागत पहुंची 33 सौ करोड़ के पार
बसपा की मायावती सरकार में 27 करोड़ की परियोजना की लागत बढ़कर 950 करोड़ कर दी गयी और काम शुरू कर दिया गया. इस बार भी बजट के अभाव में काम बंद हो गया. 2012-13 में समाजवादी पार्टी के शासन में तत्कालीन सिचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने परियोजना की लागत 23 सौ करोड़ कर दी और खुद कनहर आकर परियोजना की शुरुआत करा दी. अब बीजेपी के शासनकाल में इसकी लागत 33 सौ करोड़ के पार जा रही है.

विस्थापितों का हल नहीं निकास सकीं सरकारें
इस दौरान कई सरकारें आईं और चली गईं, लेकिन विस्थापितों के समस्याओं का हल किसी भी सरकार ने नहीं निकाला. सिंचाई बांध परियोजना 40 वर्षों के बाद कनहर बांध का काम पुनः शुरू हुआ है. अब यहां के लोग नए भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के तहत मुआवजे की मांग कर रहे हैं. 

मुआवजे को लेकर चल रहा रार
सरकार कहती है कि मुआवजे को लेकर कोई भी संशोधन नहीं किया जाएगा.लेकिन प्रत्येक परिवार को सात लाख रुपये और आवासीय भूमि दी जाएगी. परेशानी इस बात की भी है कि 1976 में 14 सौ परिवारों को मुआवजा दिया गया था. लेकिन, आज परिवारों की संख्या छह हजार के पार जा चुकी है. सभी मुआवजे की मांग कर रहे हैं. अब इसे सरकार मानने के लिए तैयार नहीं है. इसी को लेकर लोगों में आक्रोश है. 

एसडीएम का फरमान, 15 दिनों में खाली करें डूब क्षेत्र
इन सबके बीच बांध का कार्य दिन-रात चल रहा है. धीरे-धीरे बांध में पानी भी भरा जा रहा है. एसडीएम 15 दिनों के अंदर डूब क्षेत्र को खाली करने का फरमान भी जारी कर दिया है. इधर, विस्थापित लोगों का कहना है कि जो सरकार मुआवजा दे रही है, वह पर्याप्त नहीं है. इसके अलावा बहुत सारे विस्थापित लोगों के नाम भी सूची में नहीं हैं. जब तक उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक मकान खाली नहीं करेंगे.

विस्थापित का दर्द, गरीब हैं, कहां जाएं 
इधर, विस्थापन का दर्द झेल रहे एक ग्रामीण बताया कि हमारे पूरे परिवार को मुआवजा मिलना था, लेकिन सिर्फ पिताजी को और बड़े भाई को मिला. मुझे तो मुआवजा मिला भी नहीं. हमसे गांव खाली करने के लिए कहा जा रहा है. हम गरीब हैं, न हमारे पास पैसा है और न ही घर जमीन बचा, अब हम जाएं तो जाएं कहां.

बोले एडीएम, शासन की मंशा के अनुरूप ही मुआवजा 
इधर, इस मामले में एडीएम का कहना है कि सिंचाई के पानी के लिए परियोजना पूरी हो रही है. इस ग्रुप में जो भी गांव हैं, उन्हें खाली करना पड़ेगा. बांध का काम पूरा हो रहा है, जो लोग मुआवजे के पात्र हैं, उन्हें शासन की मंशा के अनुरूप ही मुआवजा दिया जाएगा. जो इसके पात्र नहीं हैं, उनके लिए जो शासन के निर्देश होंगे उसी के तहत व्यवस्था की जाएगी.

सिंचाई मंत्री का वादा, वंचितों के लिए हल निकालेगी सरकार
सिंचाई मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि कनहर बांध परियोजना का काम 30 जून तक पूरा हो जाएगा. इसके लिए हमारे अधिकारी और कर्मचारी दिन रात मेहनत करके कार्य कर रहे हैं. इस परियोजना से दो लाख परिवारों को पानी मिलेगा. दुध्दी और रावटसगंज तहसीलों के 200 से अधिक गांवों की 27 हजार एकड़ भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी. इस क्षेत्र का भूगर्भ जल स्तर भी बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि यहां पर जो लोग विस्थापित हो रहे हैं, उन्हें पूरी तरह से मुआवजा दिया जाएगा. आवास भी बनाकर दिया जाएगा. इतना ही नहीं, जो मुआवजे से वंचित रह जा रहे हैं, उनके लिए भी सरकार ध्यान देगी. सरकार कोई न कोई हल निकालेगी.

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