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Atiq Ahmed Case: माफिया अतीक को 44 साल के आपराधिक इतिहास में पहली बार मिली है सजा, अब इन 15 मुकदमों पर है फोकस

UP News: अतीक अहमद से जुड़े 15 मुकदमों में सुनवाई अब फाइनल स्टेज पर है. इन सभी मामलों में साल भर के अंदर अदालत का फैसला आना लगभग तय है. ज्यादातर मुकदमे हत्या-अपहरण से जुड़े हुए हैं.

Prayagraj News: माफिया अतीक अहमद (Atiq Ahmed) को 44 साल के आपराधिक जीवन में पहली बार सजा मिली है. हालांकि अतीक अहमद को सजा दिलाने में सरकारी अमले ने पहली बार जिस तरह की सक्रियता और इच्छाशक्ति दिखाई थी, उसके आधार पर कहा जा सकता है कि आने वाले दिनों में अब उसे तमाम दूसरे मुकदमों में भी सजा मिल सकेगी. अतीक अहमद से जुड़े हुए 15 गंभीर अपराधों वाले मुकदमों में सुनवाई अब फाइनल स्टेज पर है.

इन सभी मामलों में साल भर के अंदर अदालत का फैसला आना लगभग तय है. इनमें से ज्यादातर मुकदमे हत्या-अपहरण और गैंगस्टर से जुड़े हुए हैं. माना यह जा रहा है कि सरकारी अमले ने अगर उमेश पाल अपहरण केस की तरह ही इन मुकदमों में भी ठीक से पैरवी की तो साल भर के अंदर माफिया अतीक अहमद को कम से कम आधा दर्जन दूसरे मामलों में भी सजा मिल जाएगी और उसके जेल से बाहर आने के सभी रास्ते लगभग पूरी तरह बंद हो जाएंगे.

इन मुकदमों पर फैसला आने की उम्मीद
जिन मुकदमों में साल भर में फैसला आने की उम्मीद है उनमें बीएसपी विधायक राजू पाल मर्डर केस से लेकर बीजेपी नेता अशरफ हत्याकांड, देवरिया जेल से कराया गया चर्चित अपहरण कांड, पार्षद नस्सन मर्डर केस और गैंगस्टर से जुड़े हुए दो मुकदमे शामिल हैं. कहा जा सकता है कि अतीक अहमद के गुनाहों की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है और उसे सजा दिलाए जाने का सिलसिला अब लगातार जारी रहने की उम्मीद है. हालांकि यह काम कतई आसान नहीं है. अगर वक्त रहते इन 15 मुकदमों में ठीक से पैरवी नहीं की गई तो अतीक ना सिर्फ  इन मामलों में पहले की तरह बाइज्जत होता रहेगा, बल्कि कानून का माखौल उड़ाने से भी कतई नहीं चूकेगा.

अतीक अहमद के खिलाफ वैसे तो कुल 101 मुकदमे दर्ज हैं. इनमें से उसे अभी सिर्फ उमेश पाल अपहरण केस में ही सजा मिली है.उमेश पाल अपहरण केस में अतीक अहमद और उसके वकील खान सौलत हनीफ के साथ ही सपा के पूर्व पार्षद दिनेश पासी को उम्र कैद की सजा मिलने से सरकारी अमला बेहद उत्साहित है. उसे अब बाकी मुकदमों में भी उम्मीद की किरण नजर आने लगी हैं.अतीक के खिलाफ वैसे तो अभी तकरीबन 100 मुकदमे पेंडिंग है लेकिन सरकारी अमले ने इनमें से सिर्फ 15 मुकदमों को ही मेरिट के आधार पर चुना है.

हत्या अपहरण और गैंगस्टर के इन मुकदमों को दो वजहों से चुना गया है. पहला यह कि इनका ट्रायल अलग-अलग अदालतों में चल रहा है. सुनवाई अब फाइनल स्टेज पर है और जल्द ही इनमें अदालत का फैसला आ सकता है. दूसरी वजह यह है कि गंभीर अपराध वाले इन मुकदमों में अतीक अहमद अगर दोषी ठहराया जाता है तो उसे बड़ी सजा ही होगी. यही वजह है कि सरकारी अमले का पूरा फोकस अब इन्हीं 15 मुकदमों पर है.

इन 15 मुकदमों पर है फोकस
सरकारी अमले ने अतीक अहमद से जुड़े हुए जिन 15 मुकदमों को फोकस करते हुए माफिया को सजा दिलाए जाने के लिए कमर कसी है, उन मुकदमों का डिटेल्स इस तरह है :

  • बीएसपी विधायक राजू पाल मर्डर केस:- 25 जनवरी 2005 को प्रयागराज के धूमनगंज इलाके में दिन दहाड़े बीएसपी विधायक राजू पाल की हत्या की गई थी.आरोप तत्कालीन सपा सांसद अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ पर लगा था.दोनों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल है. लखनऊ की स्पेशल सीबीआई कोर्ट में सुनवाई चल रही है.मामले में गवाही हो रही हैं. तकरीबन छह से आठ महीने में अदालत का फैसला आ सकता है.
  • जैद अपहरण केस:- अतीक अहमद ने साल 2018 में देवरिया जेल में रहते हुए प्रयागराज के प्रॉपर्टी डीलर मोहम्मद जैद का अपहरण कराया था.अपहरण के बाद ज़ैद को देवरिया जेल ले जाया गया था.वहां उसकी जमकर पिटाई की गई थी. प्रयागराज की स्पेशल एमपी एमएलए कोर्ट में इस मामले में गवाही चल रही है.आठ से नौ महीने में फैसला आ सकता है.वादी ज़ैद ने कोर्ट में अतीक के खिलाफ बयान भी दिया है.   
  • साल 2007 का गैंगस्टर केस:- अतीक अहमद के खिलाफ प्रयागराज के धूमनगंज थाने में साल 2007 में गैंगस्टर का केस दर्ज किया गया था.साल 2006 में हुए उमेश पाल अपहरण केस के आधार पर दर्ज हुआ था गैंगस्टर का केस. उमेश पाल अपहरण केस में अतीक को उम्र कैद की सज़ा मिली है.इस गैंगस्टर केस का मुकदमा स्पेशल एमपी एमएलए कोर्ट चल रहा है.ट्रायल गवाही के लेवल पर है. तकरीबन छह महीने में फैसला आने की उम्मीद है.
  • जयश्री के बेटे को गोली मारे जाने का केस:- प्रयागराज के धूमनगंज थाना क्षेत्र की रहने वाली महिला जयश्री उर्फ़ सूरजकली के बेटे नरेंद्र को साल 2016 में हत्या की नीयत से गोली मारी गई थी. माफिया अतीक अहमद व अन्य के खिलाफ आईपीसी की धारा 307 और 120 बी के तहत चार्जशीट दाखिल की गई है. मुकदमा अपराध संख्या 135/16 है. मुक़दमे की पैरवी न करने के लिए कई बार हमले भी कराए गए. प्रयागराज की स्पेशल एमपी एमएलए कोर्ट में मुक़दमे का ट्रायल चल रहा है. तकरीबन छह महीने में फैसला आ सकता है.
  • सुरजीत- अलकमा डबल मर्डर केस:- अतीक अहमद गैंग के सक्रिय सदस्य आबिद प्रधान की चचेरी बहन 25 साल की अलकमा और उसके ड्राइवर सुरजीत की हत्या 25 सितम्बर 2015 को उनकी फॉर्च्यूनर कार के अंदर गोलियों से भूनकर की गई थीं. आबिद ही इस मुक़दमे का वादी था, लेकिन जांच में सामने आया कि अतीक अहमद व अशरफ की मिलीभगत से आबिद ने ही हत्या कराई है.यह मुकदमा भी प्रयागराज की स्पेशल एमपी एमएलए कोर्ट में चल रहा है. ट्रायल गवाही के स्टेज पर है. नौ से दस महीने में अदालत का फैसला आ सकता है.
  • सूरजकली पटेल के बेटे जितेंद्र की हत्या का केस:- धूमनगंज इलाके की रहने वाली सूरजकली पटेल के बेटे जितेंद्र की हत्या साल 2016 में की गई थी.अतीक और अशरफ आरोपी हैं. सूरजकली ने दबाव के चलते पहले इस मामले में उमेश पाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी. जांच में मामले का खुलासा हुआ तो मां सूरजकली खुद भी मुल्जिम बन गई. मुकदमा प्रयागराज की स्पेशल एमपी एमएलए कोर्ट में चल रहा है. फैसला आने में तकरीबन एक साल का वक़्त लग सकता है.
  • 1995 का चर्चित अशोक साहू मर्डर केस:- प्रयागराज के अशोक साहू की हत्या साल 1995 में सिविल लाइंस इलाके में दिन दहाड़े कर दी ग़ई थी.अशोक साहू का गाड़ी ओवरटेक करने को लेकर अतीक के भाई अशरफ से दो दिन पहले ही विवाद हुआ था. अतीक का भाई जानने के बाद अशोक साहू ने अतीक के घर जाकर उससे माफी भी मांगी थी, लेकिन दो दिन बाद ही उनकी हत्या कर दी गई. जिस वक़्त हत्या हुई, उससे दो घंटे पहले अशरफ की गिरफ्तारी चंदौली जिले में अवैध असलहे के साथ दिखाई गई थी.बाद में अतीक-अशरफ और उसके वकील खान सौलत हनीफ के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई. इस मुकदमे की फ़ाइल से तमाम रिकार्ड हैं. ट्रायल ठंडे बस्ते में पड़ा था. मुकदमा अब एमपी एमएलए कोर्ट में आया है. फैसला आने में तकरीबन साल भर का वक़्त लग सकता है.
  • बीजेपी नेता अशरफ की हत्या का केस:- बीजेपी नेता अशरफ की हत्या अतीक के घर के पास गोली मारकर की गई थी.हत्या का आरोप अतीक अहमद पर लगा था. मुकदमा अपराध संख्या 34/2003 है. मुक़दमे का ट्रायल प्रयागराज की स्पेशल एमपी एमएलए कोर्ट में चल रहा है. फैसला कुछ ही महीनों में आ सकता है, लेकिन वादी के परिवार द्वारा पैरवी नहीं किये जाने और अभियोजन की लापरवाही के चलते मुक़दमे में अब बहुत तथ्य नहीं बचे हैं. आरोप है कि अतीक को इस बात की चिढ थी कि अशरफ का नाम उसके भाई के नाम पर है तो वह बीजेपी में क्यों शामिल हो गया.
  • पार्षद नस्सन की हत्या का केस:- पार्षद नस्सन की हत्या 19 अक्टूबर 2002 को अतीक अहमद के चकिया दफ्तर के पास की गई थी.आरोप लगा था कि पार्षद नस्सन द्वारा गिरोह से दूरी बनाने से अतीक नाराज़ था और ह्त्या करा दी.अतीक के साथ ही इस मामले में उसके भाई अशरफ व पिता हाजी फ़िरोज़ के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ था.मुकदमा अब प्रयागराज की स्पेशल एमपी एमएलए कोर्ट में ट्रांसफर हुआ है. मजबूत गवाह नहीं होने से आरोपियों को सज़ा मिलने की उम्मीद कम है.
  • साल 2020 का गैंगस्टर केस:- अतीक अहमद समेत पांच लोगों के खिलाफ 6 मार्च 2020 को प्रयागराज के  धूमनगंज थाने में गैंगस्टर का केस दर्ज किया गया था. इंस्पेक्टर शमशेर बहादुर सिंह ने दर्ज कराया था गैंगस्टर का मुकदमा.अतीक अहमद और गैंग के दूसरे लोगों पर आर्थिक व भौतिक लाभ के लिए अपराध कर धन अर्जित करने के मामले में दर्ज हुआ था केस. मुकदमा प्रयागराज की स्पेशल एमपी एमएलए कोर्ट में हैं. फैसला साल भर के अंदर आ सकता है.
  • प्रापर्टी डीलर जीशान पर जानलेवा हमले का केस:- प्रयागराज के प्रापर्टी डीलर जीशान ने 01 अगस्त 2022 को पूरामुफ्ती इलाके में अपने ऊपर जानलेवा हमला कराने के मामले में अतीक अहमद और उसके बेटे अली  समेत कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया था. आरोप था कि अतीक और उसके बेटे ने जेल से साजिश रचकर हमला कराया था. पांच करोड़ की रंगदारी मांगने के मुक़दमे को वापस लेने के लिए हमला कराने का था आरोप लगाया गया था. साल भर में अदालत का फैसला आ सकता है.
  • गवाह महेंद्र पटेल अपहरण मामला:- बीएसपी विधायक राजू पाल मर्डर केस के गवाह महेंद्र पटेल ने साल 2007 में एफआईआर दर्ज कराई थी कि अतीक और अशरफ ने साल 2006 में अगवा करने के बाद डरा धमकाकर उससे झूठा हलफनामा दिलवा दिया है. एक मार्च 2006 को उमेश पाल के साथ दी थी गवाही. प्रयागराज की स्पेशल एमपी एमएलए कोर्ट में चल रहा है मुकदमा. छह से सात महीने में अदालत का फैसला आ सकता है.
  • गवाह महेंद्र पटेल का साल 2009 का अपहरण केस:- बीएसपी विधायक राजू पाल मर्डर केस के गवाह महेंद्र पटेल उर्फ़ बुद्धि पटेल ने साल 2009 में दोबारा अपने अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया.कहा गया कि पहले मुक़दमे को वापस लेने का दबाव बनाने के लिए दोबारा अपहरण कराया गया.यह मामला भी प्रयागराज की स्पेशल एमपी एमएलए कोर्ट में चल रहा है. फैसला कुछ महीनों में आ सकता है.
  • पांच करोड़ की रंगदारी मांगने का केस:-  प्रयागराज के प्रॉपर्टी डीलर जीशान अहमद ने दिसंबर 2021 में करेली थाने में एफआईआर कराई थी कि अतीक अहमद के कहने पर उसका बेटा अली कई गुर्गों के साथ साइट पर आया. मारपीट की और धमकी दी.साथ ही अतीक से फोन पर बात कराने की बात कहकर पांच करोड़ की रंगदारी मांगी. अली इसी मामले में जेल में है. यह मुकदमा भी स्पेशल एमपी एमएलए कोर्ट में हैं. सात से आठ महीने में फैसला आ सकता है. ज़्यादातर गवाही हो चुकी है.
  • खुद पर बम से हमला कराने का केस:- साल 2002 में कचहरी में पेशी के दौरान अतीक अहमद पर पुलिस कस्टडी में बमों से हमला किया गया था.पुलिस जांच में साफ़ हुआ था कि अतीक ने तत्कालीन मायावती सरकार को बदनाम करने के लिए खुद ही हमले का ड्रामा रचा था और अपने ही लोगों से बम फिंकवाए थे. कर्नलगंज कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ था. यह मामला भी स्पेशल एमपी एमएलए कोर्ट में ट्रांसफर हो चुका है. हालांकि ज़्यादातर गवाह होस्टाइल हो चुके हैं. फैसला साल भर में आने की उम्मीद है. 

जानकारों का भी यही मानना है कि 44 सालों के अपराधिक जीवन में एक भी मामले में सजा नहीं मिलना अब गुजरे जमाने की बात हो चुकी है. अगर उमेश पाल अपहरण केस की तरह है इन 15 मुकदमों में भी ठीक से पैरवी की जाए और गवाहों को सुरक्षा मुहैया कराई जाए तो तकरीबन आधे मामलों में अतीक को सजा दिलाई जा सकती हैं. अतीक अहमद को उम्र कैद की सजा दिलाने में सबसे अहम भूमिका निभाने वाले प्रयागराज के अपर जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील वैश्य का कहना है कि इन सभी मुकदमों में ठीक तरीके से पैरवी की जाएगी. जल्द से जल्द सुनवाई कराई जाएगी और अतीक समेत बाकी आरोपियों को अधिकतम सजा दिलाने की पूरी कोशिश की जाएगी.

वरिष्ठ पत्रकार अनुपम मिश्र के मुताबिक तमाम कानूनी दांवपेच खेलने, डर वा आतंक का माहौल पैदा करने, खजाने का मुंह खोलने जैसी तमाम कोशिशों के बावजूद अतीक को अगर उमेश पाल अपहरण केस में उम्र कैद की सजा हो सकती है तो बाकी मामलों में भी उसे सजा दिलाई जा सकती है. उनके मुताबिक लेकिन इसके लिए मजबूत इच्छाशक्ति दिखानी होगी, तभी यह संभव हो सकेगा.

यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री और इलाहाबाद पश्चिमी सीट से विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह का कहना है कि योगीराज में जिस तरह का माहौल बनाया गया उसी की वजह से अतीक को सजा हो पाई है.सूबे में अभी लंबे अरसे तक बीजेपी की ही सरकार रहनी है, ऐसे में अब किसी को डरने की जरूरत नहीं है. अतीक समेत किसी के खिलाफ भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है गवाही दी जा सकती है और मामलों में पैरवी भी की जा सकती हैं.सबको सुरक्षा मुहैया कराना सरकार की जिम्मेदारी है.

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मोहम्मद मोईन को पत्रकारिता का करीब तीन दशक का अनुभव है. वह प्रिंट - इलेक्ट्रानिक और डिजिटल तीनों ही माध्यमों में सालों तक काम कर चुके हैं. ABP नेटवर्क से वह पिछले करीब 18 सालों, स्टार न्यूज़ के समय से ही जुड़े हुए हैं. राजनीति - धर्म और लीगल टापिक के साथ सम सामयिक विषयों के एक्सपर्ट हैं. पत्रकार होने के साथ ही राजनीतिक विश्लेषक, एक्सपर्ट पैनलिस्ट, आलोचक और टिप्पणीकार भी हैं. इनकी चुनावी भविष्यवाणी ज्यादातर मौकों पर सटीक साबित हुई है. 8 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव कवर कर चुके हैं. 7 कुंभ और महाकुंभ की कवरेज कर अपनी अलग पहचान बनाई है. यह अपनी बेबाक- निष्पक्ष और तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. मोहम्मद मोईन ने चार विषयों पत्रकारिता एवं जनसंचार, राजनीति विज्ञान, हिंदी और मध्यकालीन व आधुनिक इतिहास विषयों में मास्टर डिग्री यानी स्नातकोत्तर किया हुआ है. लॉ ग्रेजुएट भी हैं. देश के कई राज्यों में काम करने का अनुभव रखते हैं. देश की तमाम नामचीन हस्तियों का इंटरव्यू ले चुके हैं और कई चर्चित घटनाओं को कवर चुके हैं. 

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