नगरपालिका में गबन मामले में जेल से छूटे कर्मचारी ने किया सुसाइड, BJP नेता और चेयरमैन पर गंभीर आरोप
Pilibhit Suicide: पीलीभीत में नगर पालिका के सस्पेंड कर्मचारी उपेद्र शंखधार के फांसी लगाकर आत्महत्य मामले ने तूल पकड़ लिया है. परिजनों ने बीजेपी नेता पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

यूपी के पीलीभीत में बीसलपुर नगर पालिका के निलंबित कर्मचारी उपेंद्र शंखधार ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली है. मृतक के पास से 5 पन्नों का एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसमें राज्यमंत्री के करीबी और भाजपा नेता अमन जायसवाल समेत ईओ शमशेर सिंह पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं. घटना के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है.
मामला बीसलपुर थाना क्षेत्र का है. दरअसल, बीते अक्टूबर महीने में नगर पालिका में टैक्स वसूली में धांधली और गबन के आरोप में उपेंद्र शंखधार को जेल भेजा गया था. कुछ दिनों पहले ही वे कोर्ट से जमानत पर बाहर आए थे. परिजनों का आरोप है कि जेल भेजने से पहले ही भाजपा नेता और पालिक अध्यक्ष प्रतिनिधि अमन जायसवाल (निक्की) द्वारा मृतक पर रिकवरी का भारी दबाव बनाया जा रहा था.
बीजेपी नेता पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप
आरोपियों ने पीड़ित को डरा-धमका कर करोड़ों की जमीन को औने-पौने दामों में बिकवाया गया और 23 लाख रुपये वसूल लिए. इसके बाद नौकरी पर बहाली के नाम पर ईओ शमशेर सिंह द्वारा 8 लाख रुपये की और मांग की जा रही थी. भाजपा नेता अमन जायसवाल और ईओ की इसी मानसिक प्रताड़ना तथा समाज में धूमिल हुई छवि से परेशान होकर आखिरकार कर्मचारी ने मौत को गले लगा लिया.
मृतक के भाई अनुराग शर्मा ने कहा कि जेल भेजने से पहले भाजपा नेता अमन जायसवाल उर्फ निक्की द्वारा रिकवरी के पैसे मांगे जा रहे थे. भाई की करोड़ों की जमीन डरा-धमका कर लाखों में बिकवा दी गई और 23 लाख की वसूली की गई. इसके बाद ईओ शमशेर सिंह नौकरी बहाली के लिए 8 लाख और मांग रहे थे. इसी प्रताड़ना से तंग आकर भाई ने सुसाइड किया है. मैं मुख्यमंत्री जी से न्याय की गुहार लगाता हूं.
मामले की जांच में जुटी पुलिस
उपेंद्र शंखधार आत्महत्या मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है. राज्यमंत्री के बेहद करीबी माने जाने वाले भाजपा नेता अमन जायसवाल पर लगे इन गंभीर आरोपों के बाद पुलिस परिजनों की तहरीर के आधार पर मामले की गहराई से तफ्तीश में जुट गई है.
वहीं अमन जायसवाल का कहना है कि नगरपालिका में टैक्स वसूली करने वाले कर्मचारियों द्वारा जनता से टैक्स का पैसा लेकर रसीद तो दी गई लेकिन, वह पैसा नगरपालिका कोष में जमा नहीं किया गया और न ही रसीद बुकें वापस की गईं. आरोपी कर्मचारियों ने अपने स्तर पर लाखों रुपये के गबन की बात कबूली है.
अधिशासी अधिकारी (EO) द्वारा मामले की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली थाने में गबन का आरोप लगाते हुए कानूनी कार्रवाई के लिए प्रार्थना पत्र दे दिया गया है. कुल कितने लाख का गबन है, यह पूरी जाँच और मिलान के बाद साफ़ होगा. जिन उपभोक्ताओं ने इन कर्मचारियों को टैक्स दिया है, वे अपनी रसीदों का मिलान नगरपालिका में आकर करा लें ताकि उनके टैक्स रिकॉर्ड को सुधारा जा सके और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो सके.























