UP BJP अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार केशव प्रसाद मौर्य से मिले पंकज चौधरी, इस तस्वीर से सियासी हलचल तेज
UP BJP President: यूपी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पंकज चौधरी ने बुधवार को पहली बार डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात की. इस दौरान दोनों ने आगामी चुनाव, संगठन व सरकार को लेकर चर्चा की.

लखनऊ में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से शिष्टाचार भेंट की. यूपी प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद ये पहली बार है जब दोनों नेताओं ने इस तरह औपचारिक भेंट की है. इस दौरान उन्होंने विभिन्न राजनीतिक मुद्दों और पार्टी की रणनीति पर सार्थक चर्चा की. हालांकि इसे शिष्टाचार मुलाकात बताया जा रहा है लेकिन सियासी हलकों में कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं.
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य उनके लखनऊ स्थित सरकारी आवास, सात कालिदास मार्ग पर पंकज चौधरी से मुलाक़ात की, इस दौरान उनके साथ पूर्व सांसद रविंद्र कुशवाहा भी मौजूद थे. दोनों ने इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की. पंकज चौधरी ने लिखा- 'आज लखनऊ में उत्तर प्रदेश सरकार में माननीय उपमुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्या जी से शिष्टाचार भेंट'
केशव मौर्य ने बताया शिष्टाचार भेंट
वहीं डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने इसकी तस्वीरें शेयर करते हुए एक्स पर लिखा- 'लखनऊ स्थित सरकारी आवास, सात कालिदास मार्ग पर मा. केंद्रीय राज्य मंत्री व भाजपा उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष श्री पंकज चौधरी जी एवं पूर्व सांसद श्री रविंद्र कुशवाहा जी से शिष्टाचार भेंट की.'
लखनऊ स्थित सरकारी आवास, सात कालिदास मार्ग पर मा. केंद्रीय राज्य मंत्री व भाजपा उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष श्री पंकज चौधरी जी एवं पूर्व सांसद श्री रविंद्र कुशवाहा जी से शिष्टाचार भेंट की। pic.twitter.com/jr8rEhTNg1
— Keshav Prasad Maurya (@kpmaurya1) January 14, 2026
ओबीसी वोट बैंक को लेकर चर्चाएं तेज
पंकज चौधरी के यूपी प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार केशव प्रसाद मौर्य के साथ इस मुलाक़ात को लेकर सियासी हलकों में क़यास तेज हो गए हैं. इसे संगठन और सरकार के बीच समन्वय बढ़ाने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. पंकज चौधरी को ओबीसी चेहरे के रूप में यूपी बीजेपी की कमान सौंपी गई है. ताकि कुर्मी, मौर्य और कुशवाहा जैसे समाज पर पार्टी की पकड़ मज़बूत हो सके.
कुछ राजनीतिक विश्लेषक इस मुलाक़ात को यूपी में होने वाले मंत्रिमंडल के विस्तार और 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति से भी जोड़कर देख रहे हैं. उनका मानना है भारतीय जनता पार्टी सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल रखना चाहती है, ताकि दोनों के बीच कोई गैप न रहे और पार्टी एकजुट होकर चुनाव के मैदान में दिखाई दे.
दरअसल बीते लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को ओबीसी वोटों में काफी नुक़सान हुआ था. समाजवादी पार्टी की पीडीए के नारे के चलते बड़ी संख्या में उन्होंने बीजेपी के ओबीसी वोटरों में सेंध लगाई. भाजपा अब इस वोट बैंक को वापस पार्टी के साथ जोड़ना चाहती है.
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