NRC क्लब में होली खेल रहे प्रियांशु हुए भावुक, बोले- 'AMU में पहले की तरह हो त्योहार'
Holi 2025 in Holi: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में इस बार होली काफी चर्चा में रही है. कई नेताओं ने AMU की होली को लेकर विवादित बयान दिया था, अब एक छात्र ने अपने बयान से सबको अपनी तरफ आकर्षित किया है.

Aligarh News Today: देश भर में होली का त्योहार बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है. त्योहार को लेकर लोगों में काफी उत्साह है. लोग एक दूसरे को रंग लगाने के लिए कोसों दूर का सफर तय करके एक दूसरे से मिलने पहुंच रहे हैं. देश की सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शुमार अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में होली का अलग रंग देखने को मिला.
इस बार अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में होली मनाने को लेकर सियासी पारा हाई हो गया. सियासी दलों के साथ कई नेताओं ने इसको लेकर खूब बयानबाजी की. कुछ लोगों ने दावा किया कि इस होली के रंग में प्रेम, सद्भभाव की जगह जहर घुलता नजर आ रहा है.
AMU प्रशासन ने क्या कहा?
हालांकि एएमयू प्रशासन ने दावा किया कि होली का पर्व शुरू से हिंदू मुस्लिम छात्रों के जरिये मिलजुलकर मनाया जाता था, लेकिन इस बार अलीगढ़ में होली को लेकर चल रही बयान बाजी से इसका रंग फीका पड़ गया है. अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के हिंदू छात्र के जरिये इस बात की पुष्टि भी की गई.
छात्र प्रियांशु ने मांग की कि एएमयू में पहले की तरह होली मनाई जानी चाहिए. एनआरएससी क्लब में होली मनाने के दौरान प्रियांशु भावुक हो उठे. उन्होंने कहा, "कुछ लोग बाहर खड़े हैं, कुछ मुस्लिमों को नमाज से रोका जा रहा है और हम अंदर होली मना रहे हैं. हमें बिल्कुल भी ठीक नहीं लग रह लग रहा."
प्रियांशु ने अपने इस बयान से सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया. एबीपी लाइव से बातचीत में प्रियांशु ने कहा कि जिस तरह पहले त्योहार होते थे, उस जैसे त्योहार अब बिल्कुल भी नहीं लग रहे हैं. एक तरफ एनआरएससी क्लब में हिंदू छात्र जमकर होली मना रहे हैं, तो दूसरी तरफ कुछ छात्र बिल्कुल भी खुश नजर नहीं आए.
उन्होंने इस तरह से मनाई जा रही होली पर उदासीनता जाहिर की. छात्र की एक उदासीनता ने हजारों सवाल खड़े कर दिए हैं. अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में जिस तरह से पहले होली मनाई जाती थी, उसे कई रंगों को मिलाकर मनाया जाता है यानी हिंदू मुस्लिम एक साथ मिलकर मनाते थे. प्रियांशु ने कहा कि हालांकि अब महज चंद हिंदू छात्र ही होली मना रहे हैं.
सियासी जानकारों ने किया ये दावा
सियासी जानकारों के मुताबिक, पहले चुनाव के समय इस तरह की बयानबाजी वोट बैंक को आकर्षित करने के लिए दी जाती थी, लेकिन अब यह बयानबाजी समुदाय को अलग करने के लिए दी जा रही है. यह देश के लिए खतरनाक है. उनका कहना है कि देश में अलग-अलग संस्कृति, भाषा और खानपान के लोग एक साथ मिलजुल कर रहते हैं.
उनका कहना है कि हिंदुस्तानी संस्कृति की तस्वीर विदेशों में एक आदर्श हुआ करती है, लेकिन इस तस्वीर को धूमिल करने का काम मौजूदा नेताओं के जरिये किया जा रहा है. यही वजह है कि इस तरह की बयान बाजियों से छात्र भी दुख जाहिर कर रहे हैं, जबकि चंद नेता और छात्र नेता अपनी सियासी रोटियां सेंक रहे हैं.
ये भी पढ़ें: संभल में धूमधाम से मनी होली, फिर पढ़ी गई जुमे की नमाज, CO बोले- 'कोई शिकायत नहीं आई'
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL





















