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महाकुंभ में जिनकी वजह से चमक रही व्यवस्था, वह खुद गंदगी में रहने को मजबूर, सामने आईं ये तस्वीरें

सफाईकर्मियों की टेंट सिटी किसी नरक से कम नहीं है. चारों ओर गंदा पानी भरा हुआ है, शौचालयों की गंदगी इनके टेंटों के पास ही बह रही है

Maha Kumbh 2025: प्रयागराज में महाकुंभ का दिव्य और भव्य आयोजन अपने अंतिम चरण में है. करोड़ों श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं, सरकारें साफ-सफाई की व्यवस्था पर अपनी पीठ थपथपा रही हैं, लेकिन इस पूरी चमक-दमक के पीछे एक कड़वी सच्चाई छिपी हुई है. जो सफाईकर्मी पूरे मेले को साफ-सुथरा बनाए हुए हैं, उन्हीं सफाईकर्मियों को बदतर हालात में रहने के लिए मजबूर किया गया है.

एबीपी न्यूज़ की ग्राउंड रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि सफाईकर्मियों की टेंट सिटी किसी नरक से कम नहीं है. चारों ओर गंदा पानी भरा हुआ है, शौचालयों की गंदगी इनके टेंटों के पास ही बह रही है, और प्रशासन की ओर से कोई सुध तक नहीं ली जा रही.

राकेश कुमार, लखन लाल, स्वामीदीन, सुनील, बृजलाल और सैकड़ों सफाईकर्मी महाकुंभ में बने हजारों शौचालयों को बीते डेढ़ महीने से साफ कर रहे हैं. लेकिन जब उनकी खुद की रहने की व्यवस्था की बात आती है, तो हालात अमानवीय हैं. सफाईकर्मी स्वामीदीन बताते हैं कि उन्हें एक छोटी सी कुटिया दी गई है, जिसके चारों ओर नाले का पानी भरा हुआ है. बदबू इतनी तेज़ है कि कोई एक मिनट भी वहां खड़ा नहीं रह सकता, लेकिन सफाईकर्मियों और उनके परिवार के लिए यही ठिकाना बना दिया गया है. स्वामीदीन का कहना है कि पिछले दो हफ्तों से यहां कोई सफाई करने तक नहीं आया. स्वामीदीन के मुताबिक ना अच्छी जगह मिली है, ना कोई सुविधा है, 12-12 घंटे काम करवा रहे हैं, पहले मशीन आती थी, अब नहीं आती. अफसरों का सब बढ़िया है, बस हम लोगों को फांसी मिली है. गंदगी में रहो और अपना काम करो, मजबूरी में पड़े हैं.”

बांदा से आए सफाईकर्मी सुनील का भी यही कहना है कि प्रशासन शौचालयों की सफाई करवाने के लिए तो काम करवा रहा है, लेकिन जहां सफाईकर्मी खुद रह रहे हैं, वहां कोई सफाई नहीं की जा रही. एबीपी न्यूज़ से बातचीत में सुनील ने कहा कि “कोई नहीं आ रहा सफाई करने, दुकान वाले और लोग गंदगी फैला रहे हैं, लेकिन प्रशासन का कोई आदमी देखने तक नहीं आया. जब यही काम करवाना है तो फिर हमारे रहने की जगह क्यों इतनी गंदी है?” 

महाकुंभ प्रशासन कुंभ क्षेत्र में साफ-सफाई को लेकर दावे कर रहा है, लेकिन ज़मीन पर जो हकीकत है, वो बेहद डरावनी है. सफाईकर्मियों को रहने के लिए जो टेंट सिटी दी गई है, वो किसी भी तरह से इंसानों के रहने लायक नहीं है. यहां सिर्फ सफाईकर्मी ही नहीं, बल्कि उनके परिवार भी रह रहे हैं. छोटे-छोटे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग इस गंदगी में रहने को मजबूर हैं.


महाकुंभ में जिनकी वजह से चमक रही व्यवस्था, वह खुद गंदगी में रहने को मजबूर, सामने आईं ये तस्वीरें

'लेकिन अब गंदगी के बीच ही रह रहे...'
राकेश कुमार, जो महाकुंभ में शौचालय साफ करने का काम कर रहे हैं, बताते हैं कि जब वह ड्यूटी पर जाते हैं तो हजारों श्रद्धालुओं के लिए साफ-सुथरे शौचालय तैयार रखते हैं, लेकिन जब वापस लौटते हैं, तो उन्हें खुद गंदगी में रहना पड़ता है.

लखन लाल, जो सफाईकर्मी के तौर पर यहां काम कर रहे हैं, कहते हैं कि जब महाकुंभ शुरू हुआ तब सफाई थी लेकिन अब गंदगी के बीच ही रह रहे हैं.

सिर्फ सफाईकर्मी ही नहीं, बल्कि महाकुंभ में रोज़ी-रोटी कमाने आए अन्य लोग भी इस बदहाली का शिकार हैं. दीनानाथ, जो महाकुंभ में नींबू वाली चाय बेचते हैं, अपने परिवार के साथ इसी गंदगी में रहने को मजबूर हैं. उनकी एक साल की बेटी इस गंदगी और बदबू के कारण बीमार हो चुकी है.

इसी तरह बृजलाल और राकेश, जो चाय बेचने का काम करते हैं, का भी यही हाल है. इनका कहना है कि प्रशासन ने सफाईकर्मियों और अन्य कामगारों के लिए जो टेंट लगाए थे, वहां शुरू में सफाई होती थी, लेकिन अब कोई देखने तक नहीं आ रहा. राकेश, जो नींबू वाली चाय बेचते हैं, कहते हैं कि बदबू तो झेलनी ही पड़ेगी, क्योंकि बच्चों को पालना है.

लखनऊ से आए त्रिलोकी, महाकुंभ में जिनके गुब्बारे कुंभ को सुंदर बन रहे है वो खुद दयनीय हालत में रह रहे है . त्रिलोकी के मुताबिक “बीस दिन हो गए, ना कोई आया, ना कोई गंदगी उठाने वाला है. अब गंदगी के बीच रहना ही पड़ेगा, कोई सफाई का नाम तक नहीं ले रहा. जब आए थे, तब सब अच्छा था, लेकिन अब कुछ नहीं हो रहा.” 


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महाकुंभ में चारों ओर सफाई के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन इन सफाईकर्मियों और कामगारों की हालत किसी से छिपी नहीं है. धर्माचार्य स्वामी रामशंकर ने इस बदहाली पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और इसे प्रशासन की घोर लापरवाही करार दिया साथ ही उन्होंने इसे प्रशासन द्वारा काम के आधार पर किया जा रहा भेदभाव करार दिया.

महाकुंभ प्रशासन जहां मेले को स्वच्छ और दिव्य बताने में लगा हुआ है, वहीं सफाईकर्मी और अन्य कामगार गंदगी और बदबू में रहने को मजबूर हैं. प्रशासन को इसका जवाब देना होगा—क्या इन सफाईकर्मियों को भी स्वच्छ रहने का अधिकार मिलेगा या फिर यह व्यवस्था हमेशा की तरह सिर्फ दिखावे तक ही सीमित रह जाएगी?

शिवांक मिश्रा साल 2020 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और इस वक्त एबीपी न्यूज़ में बतौर प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट कार्यरत हैं. उनकी विशेषज्ञता साइबर सुरक्षा, इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग और जनहित से जुड़े मामलों की गहन पड़ताल में है. कनाडा में खालिस्तानी आतंकियों के शरण मॉड्यूल से लेकर भारत में दवा कंपनियों की अवैध वसूली जैसे विषयों पर कई महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं. क्रिकेट और फुटबॉल देखना और खेलना पसंद है.
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