मोदी मैजिक से गोंडा लोकसभा सीट पर परचम लहराएगी बीजेपी, जातीय समीकरण से पार पाना नहीं होगा आसान
गोंडा लोकसभा क्षेत्र में जातीय समीकरणों के आधार पर त्रिकाणीय संघर्ष की स्थिति से इन्कार नहीं किया जा सकता। मुख्य मुकाबला मौजूदा सांसद और बीजेपी प्रत्याशी कीर्तिवर्धन सिंह, बसपा व रालोद समर्थित सपा प्रत्याशी विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह तथा कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ रहीं अपना दल की अध्यक्ष कृष्णा पटेल के बीच है।

गोंडा, एबीपी गंगा। भगवान राम की नगरी अयोध्या से सटी है गोंडा लोकसभा सीट। पांचवें चरण में 6 मई को यहां मतदान होना है। इस सीट से कुल 15 प्रत्याशी मैदान में हैं। मतदाताओं को सीधा लाभ पहुंचाने वाली केंद्र सरकार की योजनाएं क्या गुल खिलाएंगी, यह चुनाव के नतीजे आने के बाद ही पता चलेगा। फिलहाल यहां बीजेपी प्रत्याशी पीएम मोदी की लोकप्रियता के आधार पर चुनावी समीकरण साध रहे हैं।
ये हैं मैदान में...
गोंडा सीट से बीजेपी प्रत्याशी के रूप में कीर्तिवर्धन सिंह राजा भैया, सपा-बसपा गठबंधन से विनोद कुमार उर्फ पंडित सिंह, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से कृष्णा पटेल, राष्ट्रीय जनसंभावना पार्टी से धनीराम, पीस पार्टी से हाफिज अली, विश्व मानव समाज कल्याण पार्टी से मो. जावेद अंसारी, प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया कुतुबुद्दीन खां), किसान मजदूर संघर्ष पार्टी से पीर अली, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक से मुबारक अली, भारत प्रभात पार्टी से आसमान दत्त, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से राधेश्याम चुनाव लड़ रहे हैं। निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में विनोद कुमार सिंह, नरेंद्र सिंह, महेश सिंह, मो. अरबी ताल ठोक रहे।
त्रिकोणीय संघर्ष के आसार
गोंडा लोकसभा क्षेत्र में जातीय समीकरणों के आधार पर त्रिकाणीय संघर्ष की स्थिति से इन्कार नहीं किया जा सकता। मुख्य मुकाबला मौजूदा सांसद और बीजेपी प्रत्याशी कीर्तिवर्धन सिंह, बसपा व रालोद समर्थित सपा प्रत्याशी विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह तथा कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ रहीं अपना दल की अध्यक्ष कृष्णा पटेल के बीच है। तीनों ही प्रत्याशी चुनाव में अपनी ताकत झोंके हुए हैं। हालांकि ज्यादातर लोगों का मानना है कि बीजेपी व सपा प्रत्याशी के बीच सीधा मुकाबला है। मौजूदा सांसद के परिवार का इस सीट पर खास दबदबा रहा है। उनके पिता पूर्व मंत्री आनंद सिंह भी इस सीट से कई बार सांसद रहे हैं। पिछला चुनाव जीतने से पहले कीर्ति वर्धन सिंह 2009 में कांग्रेस प्रत्याशी बेनी प्रसाद वर्मा से चुनाव हार गए थे, लेकिन इससे पहले दो बार वह सपा के टिकट पर सांसद चुने गए थे।
विधानसभा सीट
गोंडा जिले में 1,817 गांव हैं, यहां की कुल आबादी के 93.45% लोग शहरों में जबकि 6.55 % लोग गांवों में रहते हैं। यह जिला शिक्षा की दृष्टि से काफी पिछड़ा हुआ है यहां की औसत साक्षरता दर 48.92% है। इस लोकसभा सीट में उत्तर प्रदेश विधानसभा की पांच सीटें आती हैं, जिनके नाम हैं उतरौला, मनकापुर, मेहनौन, गौरा और गोंडा, जिनमें मनकापुर की विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है।
सियासी समीकरण
1957 में यहां पहला आम चुनाव हुआ था, जिसमें कांग्रेस के दिनेश प्रताप सिंह जीते थे, वो यहां के पहले सांसद बने थे। 1980, 1984 और 1989 तीनों ही बार यहां कांग्रेस जीती। 1991 में पहली बार यहां भारतीय जनता पार्टी ने जीत के साथ कदम रखा। 1996 में भी ये सीट बीजेपी के ही पास रही लेकिन साल 1998 के चुनावों में यहां सपा को सफलता मिली लेकिन इसके एक ही साल बाद हुए चुनाव में बीजेपी ने अपनी हार का बदला ले लिया लेकिन साल 2004 के चुनाव में एक बार फिर से यहां साइकिल दौड़ी। 2009 में कांग्रेस के बेनी प्रसाद वर्मा गोंडा की सीट जीतकर लोकसभा पहुंचे लेकिन साल 2014 में ये सीट बीजेपी की झोली में आ गई और कीर्ति वर्धन सिंह यहां से सांसद चुने गए।
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Source: IOCL

























