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चीन के लोग भी करते हैं महात्मा गांधी का सम्मान, चीनी भाषा में लिखी जा चुकी हैं सैकड़ों किताबें

चीन तेजी से बदल रहा है लेकिन आज भी कई विद्वान मानते हैं कि गांधी जी का मानवतावादी दृष्टिकोण सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए एक समान रहा, जिसका प्रभाव चीन पर भी पड़ा।

नई दिल्ली, एबीपी गंगा। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का सम्मान भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में किया जाता है। गांधी पूरे विश्व के थे और पूरा विश्व उनका है। क्या आपको पता है कि गांधी जी का चीन से खास रिश्ता है। भले ही महात्मा गांधी कभी चीन गए, लेकिन ऐसा नहीं हे कि वो चीन जाना नहीं चाहते थे। उस वक्त हालात ऐसे थे कि महात्मा दुनिया के तमाम मुल्कों में गए लेकिन चाहते हुए भी कभी चीन नहीं जा सके। भले ही महात्मा गांधी कभी चीन नहीं गए लेकिन चीन में लोग महात्मा के प्रति अगाध सम्मान रखते हैं।

गांधी पर लिखी गईं सौकड़ों किताबें चीनी युवा चीनी भाषा में उपलब्ध गांधी साहित्य में विशेष दिलचस्पी रखते है। चीनी लोग महात्मा गांधी जी के बारे में पढ़ते हैं और उनके प्रति आदर व सम्मान का भाव रखते हैं। चीन में महात्मा गांधी पर सैकड़ों किताबें लिखी गईं हैं और इन किताबों को पढ़ने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। चीनी गांधी के सत्य और अहिसा के सिद्धांत से प्रभावित भी हैं और उनके सादे जीवन से प्रेरणा भी लेते हैं।

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इतिहास की किताबों में महात्मा महात्मा गांधी चीन की सभी इतिहास की किताबों में पढ़ाए जाते हैं। चीन की आर्थिक राजधानी शंघाई के फुतान विश्वविद्यालय ने भारत सरकार को लिखा था कि वो उनके साथ मिलकर विश्वविद्यालय में एक गांधी अध्ययन केंद्र खोलना चाहते हैं ताकि उनके छात्रों को महात्मा गांधी और भारत के बारे में और अधिक जानकारी मिल सके। साल 2015 में जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन का पहला दौरा किया तब उन्होंने फुतान विश्वविद्यालय में गांधी अध्ययन केंद्र का उद्घाटन भी किया था। हालांकि, यह पहला मौका था जब चीन में गांधी अध्ययन के प्रति एक समर्पित केंद्र स्थापित किया गया था।

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चीन में महात्मा की मूर्ति चीन में गांधी जी की एकमात्र मूर्ति राजधानी पेइचिंग के छाओयांग पार्क में लगी है। साल 1920 के समय जब महात्मा गांधी का प्रभाव भारत के कोने-कोने में फैल रहा था तब चीन के कई लोग गांधी को प्रेरणा के रूप में देख रहे थे। उस वक्त चीन के लोगों के मन में सवाल था कि क्या सत्याग्रह और अहिंसा से किसी का भला हो सकता है। ये वो वक्त था जब भारत में अंग्रेजों का शसन था और चीन में ब्रिटेन के साथ-साथ अमेरिका और फ्रांस जैसे बड़े देशों की ताकत का जोर था। इसी दौर में चीन में अलग-अलग गुटों में लड़ाई के कारण गृह युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई थी।

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महात्मा से प्रेरित चीन चीन अब बदल चुका है लेकिन आज भी चीन का एक बड़ा बुद्धिजीवी वर्ग गांधी से प्रेरित है। चीन की एक बड़ी पत्रिका में गांधी जी और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन से संबंधित लेख, जैसे भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के नेता-गांधी, गांधीवाद क्या है, गांधी की संक्षिप्त आत्मकथा, भारत की अंहिसक क्रांति, भारतीय स्वराज्य आन्दोलन आदि विषयों पर लगभग 70 लेख प्रकाशित हो चुके हैं। पत्रिका ने 'गांधी जी और नया भारत' शीर्षक से एक विशेषांक भी प्रकाशित किया था। कुछ विश्वविद्यालयों में गांधी जी के बारे में विशेष अध्ययन भी करवाया जाने लगा है। इससे जाहिर होता है कि गांधी और गांधीवाद ने चीनी चिंतन नें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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चीन पर पड़ा गांधीवादी सोच का प्रभाव गांधीवादी सोच ने विश्व को एक दिशा दी है जिसका प्रभाव चीन पर भी पड़ा है। गांधी खुद में चीनी विद्वानों के लिए यह एक नया दर्शन थे। कई तो यहां तक मानते हैं कि गांधी जी का मानवतावादी दृष्टिकोण सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए एक समान रहा है। कहना गलत नहीं होगा कि गांधी जी कार्यों का प्रभाव सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि एशिया के कई अन्य देशों पर भी पड़ा। बात चीन की करें तो वहां के लोग यह बखूबी जानते हैं कि चीन के सबसे कठिन दौर में गांधी जी ने सैद्धांतिक और भौतिक तौर पर उनका समर्थन किया था। चीनी लोग इसके लिए आज भी गांधी जी का आभार मानते हैं।

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