काकोरी में शहीदों की प्रतिमाओं को लेकर नया विवाद, नई हैं या टूटी मुर्तियों की हुई मरम्मत?
Kakori Martyrs Statue: काकोरी के शहीदों की प्रतिमाओं को तोड़ने और फिर से स्थापित करने पर विवाद है. नगर निगम ने पहले नई प्रतिमाएं लगाने की बात कही, फिर पुरानी प्रतिमाओं की मरम्मत का दावा किया.

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में काकोरी के शहीदों की प्रतिमाओं को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है. सवाल यह है कि तोड़फोड़ अभियान के बाद फिर से स्थापित की गई प्रतिमाएं नई हैं या मरम्मत की गई पुरानी. यह विवाद तब शुरू हुआ जब टाउन हॉल में नगर निगम कार्यालय के बाहर स्थापित अशफाकुल्ला खान, रोशन लाल और राम प्रसाद बिस्मिल सहित स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाओं को इस सप्ताह के शुरू में बुलडोजर का उपयोग करके कथित तौर पर ध्वस्त कर दिया गया था.
प्रतिमाओं को ढहाते और उनके मलबे को कूड़ेदान में फेंकते हुए दिखाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं.
पहले कहा नई लगेंगी, फिर बोले - मरम्मत हुई पुरानी
शुरुआत में नगर आयुक्त विपीन कुमार मिश्र ने कहा था कि नई प्रतिमाएं लगाई जाएंगी, लेकिन पुनर्स्थापना के बाद महापौर ने दावा किया कि पुरानी प्रतिमाओं की मरम्मत कर उन्हें फिर से स्थापित किया गया. रुख में बदलाव के बारे में पूछे जाने पर मिश्र ने कहा कि उनका पिछला बयान प्रतिमाओं के निरीक्षण से पहले दिया गया था. उन्होंने कहा कि निरीक्षण करने पर पता चला कि प्रतिमाएं बरकरार थीं और संगमरमर से बनी थीं, केवल उनकी नींव क्षतिग्रस्त हुई थी जिसकी अब मरम्मत कर दी गई है.
कांग्रेस बोली - खंडित प्रतिमाओं की पूजा नहीं होती
महापौर के दावे को लेकर राजनीतिक विवाद पैदा हो गया. कांग्रेस के जिला अध्यक्ष रजनीश गुप्ता ने आरोप लगाया कि टूटी हुई प्रतिमाओं को ही फिर से स्थापित किया गया है. उन्होंने कहा कि मान्यता के अनुसार क्षतिग्रस्त प्रतिमाओं की पूजा नहीं की जाती और आमतौर पर उन्हें गंगा में विसर्जित कर दिया जाता है. स्थानीय कांग्रेस इकाई और एक हिंदू संगठन ने इस मामले में विरोध प्रदर्शन भी किया.
निलंबित अभियंता का दावा - छुट्टी पर था
इस बीच निलंबित सहायक अभियंता मनोज कुमार ने दावा किया कि जब प्रतिमाएं ध्वस्त की गईं तो वह छुट्टी पर थे और जिले से बाहर थे, लेकिन फिर भी उन्हें निलंबित कर दिया गया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तोड़फोड़ नगर आयुक्त के आदेश पर की गई. मिश्र ने इस आरोप को बेबुनियाद बताया और कहा कि वह जांच के लिए तैयार हैं.
उत्तर प्रदेश सरकार ने घटना का संज्ञान लेते हुए निष्पादन एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी और एक कनिष्ठ अभियंता तथा सहायक अभियंता को निलंबित किया था. मंगलवार शाम को शाहजहांपुर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कंपनी के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कर ली.
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Source: IOCL



























