'मैं अन्न त्याग कर दूंगा', जगतगुरू परमहंस आचार्य ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, दिया 40 दिन का अल्टीमेटम
Paramhans Acharya Statement: जगतगुरू परमहंस आचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गोमांस के निर्यात पर रोक लगाने ओर उसकी जगह गाय का दूध, घी और दही के निर्यात करने की मांग की.

अयोध्या में तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर गोमांस के स्थान पर दूध, दही और घी के निर्यात की मांग की है. साथ ही उन्होंने गोवंश को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने और देशभर में ग्राम स्तर पर गायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है.
जगतगुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि भारत की संस्कृति गौ और गंगा से जुड़ी है. गंगा को राष्ट्रीय नदी का दर्जा मिलने से वह बच गई. लेकिन, गौवंश आज भी कट रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने महात्मा गांधी सहित कई महापुरुषों के गौहत्या विरोधी आंदोलनों का हवाला देते हुए कहा कि अब तक पूर्ण रूप से गौहत्या बंद नहीं हो सकी है.
केंद्र सरकार को 40 दिन का अल्टीमेटम
पीठाधीश्वर ने केंद्र सरकार को 40 दिन का समय दिया है और चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि में कोई सकारात्मक आश्वासन नहीं मिला तो वह अन्न त्याग करेंगे और तब तक भोजन ग्रहण नहीं करेंगे, जब तक गोवंश को राष्ट्रीय धरोहर घोषित कर ग्राम स्तर पर उनकी सेवा-सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की मांग का विरोध
परमहंस आचार्य ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की गाय को राष्ट्र माता घोषित किए जाने की मांग पर भी विरोध जताया है उन्होंने कहा कि वो चाहते हैं कि गाय को राष्ट्रमाता घोषित कर दिया जाए इसके बावजूद भी बछड़ा, बैल और नंदी की रक्षा सुनिश्चित नहीं हो पाएगी. उनके कहने से और उनकी मांग से गोहत्या बंद नहीं हो सकती है क्योंकि उनकी मांग ही ऐसी है कि गाय तो बच जाएं मगर बछड़ा कटता रहे.
गाय केवल धार्मिक नहीं बल्कि आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है. गोबर से ईंधन बनाया जा सकता है और दुग्ध उत्पादों के निर्यात से देश को लाभ हो सकता है. उन्होंने मांग की कि किसी भी कीमत पर गोवंश को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए और गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगे.
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Source: IOCL




























