मथुरा: BJP-गठबंधन के बीच लड़ाई, दिखेगा ड्रीम गर्ल का जादू!
2009 में ही रालोद अध्यक्ष अजित सिंह के बेटे जयंत चौधरी मथुरा से एक बार जीत का स्वाद चख चुके हैं। इस सीट के इतिहास पर नजर डाले तो रालोद के लिए इस सीट पर कब्जा जमाना कभी आसान नहीं रहा है।

मथुरा, एबीपी गंगा। पश्चिम यूपी को जाटों का गढ़ माना जाता है। इसी हिस्से की मथुरा लोकसभा सीट पर जाट वोटर्स की अच्छी खासी संख्या भी है। हालांकि, यहां अब तक के जितने भी चुनाव हुए उनमें राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) मथुरा में कोई खासा प्रभाव नहीं छोड़ पाई है। सिर्फ 2009 के लोकसभा चुनाव को छोड़कर रालोद नेताओं को यहां हार ही नसीब हुई है। इसमें चौधरी चरण सिंह की पत्नी से लेकर उनकी बेटी तक शामिल हैं।
2009 में ही रालोद अध्यक्ष अजित सिंह के बेटे जयंत चौधरी मथुरा से एक बार जीत का स्वाद चख चुके हैं। इस सीट के इतिहास पर नजर डाले तो रालोद के लिए इस सीट पर कब्जा जमाना कभी आसान नहीं रहा है।
बीते लोकसभा चुनाव में जयंत चौधरी को भाजपा की टिकट पर उतरी हेमा मालिनी से बड़ी बार मिली थी। जयंत और हेमा के बीच मतो का आंकड़ा करीब 20 फीसदी की था। 2009 के चुनाव में रालोद की किस्मत ऐसी ना थी। इस चुनाव में जयंत चौधरी ने यहां से अपनी किस्मत आजमाई थी और चुनाव जीतकर इस सीट को रालोद की झोली में डाला था। जंयत ने बसपा के श्याम सुंदर शर्मा को डेढ़ लाख से ज्यादा वोट के अंतर से हराया था।
हालांकि अब यूपी के महागठबंधन में रालोद भी शामिल है। इस गठबंधन के तहत उसके हिस्से में मथुरा, बागपत और मुजफ्फरनगर की तीन सीटें आई हैं। ऐसे में रालोद की सीधी टक्कर अब भाजपा और कांग्रेस से है। रालोद को भरोसा है कि सपा-बसपा का समर्थित वोट उसके खाते में जाएगा और उसे जीत दिलाएगा।
मथुरा लोकसभा सीट पर अब तक का इतिहास
- 1962 और 71 में यह सीट कांग्रेस के कब्जे में रही, जबकि 1967 में यहां निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की।
- 1977 में कांग्रेस के खिलाफ चली आंधी से पार्टी को नुकसान हुआ और भारतीय लोक दल के प्रत्याशी ने जीत दर्ज की।
- 1980 में यह सीट जनता दल के कब्जे में चली गयी।
- 1984 में कांग्रेस ने इस सीट पर जोरदार वापसी की। कांग्रेस के मानवेंद्र सिंह ने लोकदल की गायत्री देवी को एक लाख से भी ज्यादा मतों से मात दी।
- 1989 में मानवेंद्र सिंह ने जनता दल की टिकट पर फिर जीत दर्ज की।
- इसके बाद लगातार चार बार यहां से भाजपा ने जीत दर्ज की। 1991, 1996, 1998 और 1999 लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को यहां जीत मिली। भाजपा के चौधरी तेजवीर सिंह लगातार तीन बार सांसद चुने गए
- 2004 में कांग्रेस ने भाजपा के कब्जे से यह सीट छीन ली। मानवेंद्र सिंह ने बसपा के चौधरी लक्ष्मीनारायण को मात दी। भाजपा के तेजवीर सिंह चौथे नंबर पर रहे।
- 2009 में भाजपा के साथ गठबंधन कर लड़ी रालोद को यहां जीत मिली। रालोद प्रमुख चौधरी अजित सिंह के बेटे जयंत ने बंपर जीत दर्ज की।
- 2014 में मोदी लहर में अभिनेत्री हेमा मालिनी ने शानदार जीत दर्ज की, उन्होंने जयंत को तीन लाख से अधिक वोटों से हराया।
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Source: IOCL

























