गोरखपुर में शराबी पतियों से तंग आकर दो महिलाओं ने रचाई शादी, सात फेरे लेकर मांग में भरा सिंदूर
Gorakhpur News: दोनों सहेलियों की मुलाकात पहली बार इंस्टाग्राम पर मिली थी, जिसके बाद उनकी जान-पहचान हुई. दोनों की एक जैसी परिस्थितियां थी, जिसकी वजह से वो एक दूसरे के काफी करीब आ गईं.

Gorakhpur News: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है जहां दो महिलाओं ने अपने शराबी पतियों को छोड़कर एक दूसरे से शादी रचा ली और एक दूसरे के साथ जीने-मरने की कसमें खाईं. ये शादी गुरुवार को 23 जनवरी को हुई जब दोनों ने एकसाथ जीने का फैसला लिया. इस शादी को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए. ये शादी अब आसपास के इलाकों में चर्चा का विषय बनी हुई है.
खबर के मुताबिक कविता और गुंजा उर्फ बबलू ने बृहस्पतिवार शाम देवरिया के छोटी काशी कहे जाने वाले शिव मंदिर में विवाह किया. इस शादी में गुंजा ने दूल्हे की भूमिका निभाई, कविता को सिंदूर लगाया. जिसके बाद दोनों ने सात फेरे लेकर एक दूसरे के साथ शादी के बंधन में बंध गए. गुंजा और कविता ने जीवन भर एक-दूसरे का साथ निभाने की कसम खाई.
सोशल मीडिया पर हुई थी दोस्ती
इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से बात करते कहा कि वो पहली बार इंस्टाग्राम पर मिली थी, जिसके बाद उनकी जान-पहचान हुई. दोनों की एक जैसी परिस्थितियां थी, जिसकी वजह से वो एक दूसरे के काफी क़रीब आ गईं. दोनों को ही शादी के बाद अपने शराबी जीवनसाथियों के हाथों घरेलू हिंसा सहनी पड़ी. जिसके बाद उन्होंने अपने पतियों से तंग आकर उनसे नाता तोड़ लिया.
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पतियों से अलग होने के बाद ये दोनों सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती थी. वो फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम बहुत ज्यादा देखती थी. इसी दौरान पांच साल पहले दोनों की एक दूसरे से जान पहचान हो गई. जिसके बाद उनकी बातचीत होने लगी. उन्होंने एक दूसरे के दर्द को साझा किया. इस बीच उनकी दोस्ती इतनी गहरी होती चली गई कि वो एक दूसरे के बिना नहीं रह पाती थी. जिसके बाद उन्होंने अपने शादी करने का फैसला कर लिया
अपनी शादी को लेकर दूल्हा बनी गुंजा ने कहा, "हम अपने पतियों के शराब पीने और उनके द्वारा दुर्व्यवहार किए जाने से परेशान थे. इसने हमें शांति और प्रेम का जीवन चुनने के लिए मजबूर किया. हमने गोरखपुर में एक जोड़े के रूप में रहने और जीवनयापन के लिए काम करने का फैसला किया है.” मंदिर के पुजारी उमा शंकर पांडे ने कहा कि महिलाओं ने माला और सिंदूर खरीदा, अनुष्ठान किया.
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Source: IOCL





















