प्रयागराज: कोरोना के खौफ में संगम नगरी, सूने हुये तट...श्रद्धालुओं की संख्या में बड़ी गिरावट
भारत में कोरोना का भय लोगों में किस कदर तेजी से घर कर रहा है...अब ये सामने आने लगा है। प्रयागराज में तीर्थ यात्रियों का आना कम हो गया है

प्रयागराज, मोहम्मद मोइन। दुनिया को दहलाने वाले कोरोना वायरस का असर अब लोगों की आस्था पर भी पड़ने लगा है। कोरोना के डर के चलते लोगों ने तीर्थयात्रा और धार्मिक स्थलों के दर्शन कम कर दिए हैं। कुंभ नगरी प्रयागराज इसका जीता जागता उदाहरण है।
प्रयागराज का संगम जहां कुछ दिन पहले तक श्रद्धालुओं की भीड़ से गुलजार रहता था। संगम के घाटों पर आस्थावान लोगों की भीड़ से रौनक बनी रहती थी, तो वहीं अब गंगा यमुना और अदृश्य सरस्वती की त्रिवेणी पर पहले जैसी चहल -पहल नज़र नहीं आ रही है। पिछले दो हफ्ते में संगम पर आस्था की डुबकी लगाकर पूजा अर्चना करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या एक तिहाई तक कम हो गई है। सबसे ज़्यादा असर दक्षिण समेत दूसरे राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं पर पड़ा है। इतना ही नहीं संगम के आस-पास समेत प्रयागराज के दूसरे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर दर्शन -पूजन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ भी कम हुई है।
श्रद्धालुओं की संख्या घटने से संगम पर नाव चलाने वाले नाविकों यानी मल्लाहों को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, तो साथ ही तीर्थ पुरोहितों के तख़्त भी सूने नज़र आते हैं। पुरोहितों और नाविकों के मुताबिक़ संगम पर सन्नाटा 'कोरोना वायरस' की वजह से पसरा रहता है। जो श्रद्धालु यहां आते हैं, वह साफ़ बताते हैं कि उनके साथ आने वाले तमाम लोगों ने कोरोना की वजह से यहां की अपनी यात्रा को टाल दिया है। श्रद्धालुओं की संख्या में गिरावट का असर संगम और आस पास के इलाकों में रोजगार करने वालों पर भी पड़ रहा है।
वैसे संगम नगरी प्रयागराज में अभी तक न तो किसी में कोरोना की तस्दीक हुई है और न ही कोई संदिग्ध सामने आया है, लेकिन इसकी दहशत इतनी फ़ैल गई है कि लोग अब घर से बाहर निकलने और सार्वजनिक जगहों पर जाने से परहेज करने लगे हैं।
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Source: IOCL


























