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Explained: क्या आने वाले दिनों में कैश लेनदेन का होगा द एंड? 57% की पसंद UPI, कोई भी ट्रांजेक्शन छिप नहीं पाएगा

UPI VS Cash income tax tracking: किसी दौर में करारे नोटों की आवाज कानों में गूंजती थी, लेकिन अब UPI की वजह से बटुआ भर ही नहीं पाता. तो क्या आने वाले दिनों में नोट खत्म हो जाएंगे?

भारत में UPI अब रोजमर्रा के पेमेंट का राजा बन गया है. NPCI, DFS और RBI के ऑफिशियल डेटा के मुताबिक, UPI ने कैश को ट्रांजेक्शन की संख्या और वैल्यू दोनों में पीछे छोड़ दिया है. हालांकि, गजब की बात है कि फिर भी कैश की कुल रकम बढ़ रही है. ऐसे में सवाल है कि क्या कैश सिस्टम पूरी तरह खत्म हो जाएगा? क्या हर ग्राहक फोन निकालकर 3-4 सेकेंड में पेमेंट करने का आदि हो जाएगा? आइए एक्सप्लेनर में समझते हैं...

सवाल 1: UPI ने कैश को कैसे पीछे छोड़ दिया? DFS सर्वे क्या कहता है?

जवाब: जुलाई-अगस्त 2025 में वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज (DFS) ने NPCI के साथ मिलकर एक बड़ा सर्वे कराया. इसमें 15 राज्यों के 10,378 लोगों से बात की गई, जिनमें 6,167 आम यूजर्स, 2,199 दुकानदार और 2,012 सर्विस प्रोवाइडर थे. ये सर्वे शहरी और सेमी-अर्बन इलाकों में फेस-टू-फेस इंटरव्यू से हुआ.

नतीजे चौंकाने वाले थे. रोज के पेमेंट में UPI का हिस्सा 57 प्रतिशत पहुंच गया, जबकि कैश सिर्फ 38 प्रतिशत रह गया. 18-25 साल के युवाओं में UPI का इस्तेमाल और भी ज्यादा हुआ, जो 66 प्रतिशत था. छोटे दुकानदारों में 94 प्रतिशत अब UPI QR कोड से पेमेंट लेते हैं. 90 प्रतिशत यूजर्स को UPI और RuPay कार्ड कैश से ज्यादा सुरक्षित लगते हैं. ATM निकासी और कैश इस्तेमाल दोनों घट गए हैं.

सर्वे बताता है कि 2021-22 से 2024-25 तक सरकार ने UPI को बढ़ावा देने के लिए 8,276 करोड़ रुपये के इंसेंटिव दिए. कैशबैक, कम फीस और आसान ऑनबोर्डिंग की वजह से डिजिटल ट्रांजेक्शन 11 गुना बढ़ गए. UPI अब कुल डिजिटल पेमेंट का 80 प्रतिशत हिस्सा संभाल रहा है. छोटे व्यापारियों को बिक्री बढ़ने का फायदा भी मिला. 57 प्रतिशत लोगों ने कहा कि डिजिटल पेमेंट से उनकी सेल्स बढ़ी.

सवाल 2: महीने-दर-महीने UPI के आंकड़े क्या बता रहे हैं?

जवाब: NPCI हर महीने डेटा जारी करता है और 2025-26 का पूरा साल रिकॉर्ड्स से भरा पड़ा है. आइए एक-एक करके देखें:  

 

Explained: क्या आने वाले दिनों में कैश लेनदेन का होगा द एंड? 57% की पसंद UPI, कोई भी ट्रांजेक्शन छिप नहीं पाएगा
NPCI Official Report

Tier-2 और Tier-3 शहरों और ग्रामीण इलाकों से अब 45 प्रतिशत ट्रैफिक आ रहा है. UPI QR कोड की संख्या 70 करोड़ से ऊपर पहुंच गई है. छोटी किराना दुकान, फार्मेसी, ट्रांसपोर्ट हर जगह UPI डिफॉल्ट हो गया है.

सवाल 3: लेकिन कैश की कुल रकम भी तो बढ़ रही है? कैसे?

जवाब: हां, बढ़ रही है. जनवरी 2026 में करेंसी इन सर्कुलेशन (CiC) यानी कुल कैश 40 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. साल-दर-साल 11.1 प्रतिशत बढ़ोतरी हो रही है. जनवरी के UPI वैल्यू (28.33 लाख करोड़) CiC का करीब 70 प्रतिशत है. मतलब UPI एक महीने में उतना ट्रांजेक्शन हैंडल कर रहा है जितना कुल कैश स्टॉक का बड़ा हिस्सा.

SBI रिसर्च साफ बताती है कि अर्थव्यवस्था बढ़ रही है, लोग सावधानी के लिए कैश रख रहे हैं. खासकर अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर में GST और टैक्स नोटिस के बाद ATM निकासी बढ़ी है. अच्छी खबर ये है कि CiC-GDP रेश्यो घट रहा है. 2021 के 14.4 प्रतिशत से अब करीब 11.2 प्रतिशत पर आ गया. यानी कुल अर्थव्यवस्था में कैश का रिलेटिव हिस्सा कम हो रहा है. UPI ट्रांजेक्शन वैल्यू CiC से ज्यादा होने के बावजूद कैश 'स्टोर ऑफ वैल्यू' के तौर पर अभी इस्तेमाल हो रहा है.

सवाल 4: 1 अप्रैल 2026 का UPI आउटेज क्या सिखाता है?

जवाब: 1 अप्रैल 2026 को UPI में बड़ी दिक्कत आई. दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, जयपुर, पुणे, कोलकाता, गुवाहाटी और चेन्नई समेत कई शहरों में ट्रांजेक्शन फेल हो गए, ऐप लोड नहीं हो रहे थे. SBI को 500 से ज्यादा शिकायतें मिलीं, UCO बैंक को 40. वजह- SBI का शेड्यूल्ड मेंटेनेंस बढ़ गया और दोपहर 12:30 बजे तक चला. SBI ने खुद X पर पोस्ट करके माफी मांगी और UPI Lite, eRupee (CBDC) ऐप और ATM को अल्टरनेटिव बताया.

समस्या कुछ घंटों में सुलझ गई. NPCI या दूसरे बैंकों से कोई बड़ा बयान नहीं आया, लेकिन ये घटना याद दिलाती है कि UPI पर भरोसा भले बढ़ा हो, लेकिन सिस्टम अभी भी 100 प्रतिशत फेल-प्रूफ नहीं है. फिर भी लोग वापस कैश की तरफ नहीं भागे. मार्च 2026 के रिकॉर्ड आंकड़े साबित करते हैं कि भरोसा बना हुआ है.

 

57 प्रतिशत लोगों को अब कैश पेमेंट पसंद नहीं
57 प्रतिशत लोगों को अब कैश पेमेंट पसंद नहीं

सवाल 5: तो क्या कैश का दौर वाकई खत्म हो जाएगा?

जवाब: नहीं, पूरी तरह नहीं, लेकिन रोजमर्रा के छोटे-मोटे पेमेंट में कैश का दौर लगभग खत्म हो चुका है. UPI ने 5-10 साल में 80-90 प्रतिशत ट्रांजेक्शन डिजिटल कर देने का रास्ता बना दिया है. NPCI का टारगेट 2027 तक रोजाना 1 अरब ट्रांजेक्शन का है. सरकार डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को और मजबूत कर रही है.

फिर भी कैश रहेगा क्योंकि:

  • ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच अभी भी सीमित है.
  • बड़े अमाउंट, इमरजेंसी या अनऑर्गनाइज्ड व्यापार में लोग कैश पसंद करते हैं.
  • अर्थव्यवस्था बढ़ने के साथ कैश की कुल रकम भी बढ़ेगी, भले उसका प्रतिशत घटे.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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