राम मंदिर ट्रस्ट की पहल, संरक्षित किए जाएंगे पत्थरों को तराशने वाले औजार और मशीन
Ram Mandir: अयोध्या स्थित भव्य और दिव्य राम मंदिर के निर्माण में जिस पत्थर कटिंग मशीन ने अहम भूमिका निभाई, अब उसे संरक्षित और सुरक्षित किया जाएगा. यह अनोखी पहल राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से की जा रही है.

यूपी के अयोध्या स्थित भव्य और दिव्य राम मंदिर के निर्माण में जिस पत्थर कटिंग मशीन ने अहम भूमिका निभाई, अब उसे संरक्षित और सुरक्षित किया जाएगा. श्री राम जन्मभूमि क्षेत्र ट्रस्ट ने फैसला किया है कि इस ऐतिहासिक मशीन को आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेज कर रखा जाएगा, ताकि वे मंदिर निर्माण की पूरी प्रक्रिया और उससे जुड़े संघर्षों को समझ सकें.
राम मंदिर निर्माण के लिए जिन विशाल बंशी पहाड़पुर के पत्थरों से रामलला का भव्य मंदिर तैयार हुआ, उनकी तराशी और नक्काशी का काम रामसेवक पुरम में ही किया गया था. यहीं स्थापित की गई थी वह पत्थर कटर मशीन, जिसने बड़े-बड़े पत्थरों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
इसी कटर मशीन से हुई पत्थरों पर नक्काशी
साल 1998 में रामसेवक पुरम में एक कटर मशीन लगाई गई थी. बाद में राम जन्मभूमि न्यास के माध्यम से सितंबर माह में पत्थर तराशी की कार्यशाला स्थापित की गई, जहां मंदिर निर्माण में प्रयोग होने वाले पत्थरों पर नक्काशी का कार्य शुरू हुआ. इसी कार्यशाला में मंदिर की शिल्पकारी को अंतिम रूप दिया गया.
क्यों पत्थर कटर मशीन क्यों किया जा रहा संरक्षित?
राम मंदिर ट्रस्ट के सहयोगी विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा के अनुसार, इस मशीन को संरक्षित करने का उद्देश्य यह है कि आने वाली पीढ़ियां जान सकें कि किस प्रकार विशाल पत्थरों को काट-छांटकर और उन पर बारीक नक्काशी कर भव्य राम मंदिर का निर्माण किया गया.
श्री राम जन्मभूमि क्षेत्र ट्रस्ट का मानना है कि जब भविष्य की पीढ़ियां इन पत्थरों और इस कटर मशीन को देखेंगी, तो वे सिर्फ निर्माण प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि राम मंदिर आंदोलन और उसके लंबे संघर्ष को भी समझ सकेंगी. आपको बता दें कि हर रोज देशभर से श्रद्धालु श्रीरामलला के दर्शन के लिए अयोध्या आते हैं, और राम मंदिर के संघर्ष की कहानी श्रद्धालुओं को मालूम चले इसके लिए इन औजारों और मशीनों को संरक्षित करने की पहल की जा रही है.
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Source: IOCL

























