यूपी: अलीगढ़ में बच्चे से कुकर्म के बाद हत्या मामले कोर्ट का आया फैसला, आरोपी को ताउम्र कैद
UP News: 8 महीने तक चली सुनवाई और सभी सबूतों की गहराई से जांच के बाद एडीजे विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी उम्र कैद की सजा सुनाई. साथ ही उस पर 1 लाख 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है.

अलीगढ़ के कोतवाली इगलास क्षेत्र में 11 साल के मासूम बच्चे के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी बेरहमी से हत्या करने वाले आरोपी को अदालत ने कड़ी सजा सुनाई है. करीब 8 महीने तक चले सत्र परीक्षण और सभी सबूतों की गहराई से जांच के बाद एडीजे विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी मनोज उर्फ मोनी को ताउम्र कैद की सजा सुनाई. साथ ही उस पर 1 लाख 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है. यह मामला पिछले साल 17 जून का है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था.
खेलते-खेलते लापता हुआ था मासूम
घटना इगलास थाना क्षेत्र के एक गांव की है. 17 जून 2025 की दोपहर 11 वर्षीय बालक घर के बाहर खेल रहा था. कुछ देर बाद वह अचानक लापता हो गया. परिवार वालों ने पहले आसपास और रिश्तेदारों के यहां तलाश की, लेकिन कोई पता नहीं चला.
अगले दिन 18 जून को बालक के पिता ने अपहरण की आशंका जताते हुए थाना इगलास में रिपोर्ट दर्ज कराई. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी. गांव के लोगों से पूछताछ और हालात को देखते हुए शक गांव के ही रहने वाले मनोज उर्फ मोनी पर गया. वह पीड़ित बच्चे के बड़े भाई का दोस्त बताया गया.
पूछताछ में खुला राज
19 जून को पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की. शुरुआत में उसने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन सख्ती से पूछताछ के बाद उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया.
आरोपी ने बताया कि वह बच्चे को बहला-फुसलाकर बाइक से गांव के बाहर बाजरे के खेत में ले गया था. वहां उसने बच्चे को नशीला पदार्थ (भांग) खिलाया और खुद भी सेवन किया. नशे की हालत में उसने मासूम के साथ कुकर्म किया.
दुष्कर्म के बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गया. आरोपी को डर था कि अगर बच्चा जिंदा रहा तो वह सारी बात घरवालों को बता देगा. इसी डर में उसने गले में पट्टी बांधकर उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी.
सबूत मिटाने के लिए रची साजिश
हत्या के बाद आरोपी ने सबूत मिटाने की साजिश रची. वह गांव लौटा और एक फावड़ा, पेट्रोल की बोतल और नमक के दो पैकेट लेकर फिर खेत में पहुंचा. बताया गया कि उसने पड़ोसी गांव के प्रधान के खाली खेत में गड्ढा खोदा.
शव को उसमें डालकर पेट्रोल छिड़का और आग लगा दी. शव पूरी तरह न जले, इस डर से उसने उस पर नमक भी डाल दिया ताकि जल्दी गल जाए और पहचान न हो सके. इसके बाद वह मौके से फरार हो गया.
20 जून की शाम पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर खेत से अधजला शव बरामद किया. मौके से बच्चे की चप्पल, आरोपी का अंगोछा, पेट्रोल की खाली बोतल, माचिस और नमक के पैकेट भी बरामद हुए. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंटकर हत्या की पुष्टि हुई.
पुलिस ने जांच पूरी कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया. सत्र परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 10 गवाह पेश किए गए. एक बाल साक्षी ने अदालत में बयान दिया कि उसने घटना वाले दिन आरोपी को पेड़ की ओट से बच्चे को इशारा करते देखा था. बाद में आरोपी उसे बाइक पर बैठाकर ले गया. कुछ समय बाद आरोपी को फावड़ा ले जाते देखा गया, लेकिन बच्चा उसके साथ नहीं था.
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं एडीजीसी महेश सिंह और रघुवंश शर्मा ने अदालत में कहा कि यह अपराध बेहद जघन्य और अमानवीय है. उन्होंने आरोपी को मृत्युदंड देने की मांग की.
अदालत का सख्त फैसला
सभी गवाहों की गवाही, वैज्ञानिक साक्ष्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया. न्यायालय ने अपहरण के अपराध में 7 साल की सजा, हत्या के लिए आजीवन कारावास, सबूत मिटाने के लिए 7 साल की सजा और पॉक्सो एक्ट के तहत शेष प्राकृतिक जीवन तक कारावास की सजा सुनाई. साथ ही कुल 1 लाख 10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया.
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह अपराध सिर्फ एक मासूम की जान लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज की नैतिकता और मानवता पर भी गहरा आघात है. ऐसे मामलों में कठोर सजा जरूरी है ताकि समाज में कानून का डर बना रहे और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके.
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL























