राजस्थान विधानसभा सत्र: टीकाराम जूली ने अभिभाषण को बताया 'झूठ का पुलिंदा', भजनलाल सरकार को घेरा
Rajasthan Assembly Session: राजस्थान विधानसभा का सत्र हंगामेदार रहा. राज्यपाल के अभिभाषण में भजनलाल सरकार की उपलब्धियां गिनाई गईं, लेकिन नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इसे "झूठ का पुलिंदा" बताया.

राजस्थान विधानसभा के पांचवें सत्र का आगाज हंगामेदार रहा. राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े के अभिभाषण के बाद नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार को जमकर घेरा. जूली ने राज्यपाल के अभिभाषण को 'झूठ का पुलिंदा' करार देते हुए कहा कि सरकार ने महामहिम से वह सब पढ़वाया है, जो जमीन पर कहीं अस्तित्व में ही नहीं है.
अभिभाषण के दौरान राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने भजनलाल सरकार के कामकाज का लेखा-जोखा सदन के सामने रखा. उन्होंने कहा कि सरकार ने 'युवा नीति 2026' जारी की है और 1 लाख सरकारी नौकरियों का भर्ती कैलेंडर दिया है. राइट टू एजुकेशन (RTE) के तहत 2 लाख से अधिक बच्चों को मुफ्त शिक्षा और ₹482 करोड़ की लागत से स्कूल ड्रेस दी गई. सरकार ने किसानों को पर्याप्त बिजली और DAP खाद सुनिश्चित की है.
टीकाराम जूली का पलटवार: 'किरोड़ी लाल जी भी मुस्कुरा रहे थे'
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इन दावों पर तंज कसते हुए कहा कि जब राज्यपाल खाद और DAP देने की बात कर रहे थे, तो खुद सत्ता पक्ष के मंत्री किरोड़ी लाल मीणा मुस्कुरा रहे थे. जूली ने कहा, "खाद तो मिला नहीं, जो मिला वह ब्लैक में पहुँचा और नकली खाद खुद किरोड़ी लाल जी ने पकड़ा था. सरकार किस आधार पर इसे अपनी उपलब्धि बता रही है?"
पेंशन और विकास कार्यों पर घेरा
जूली ने सरकार पर वादाखिलाफी के कई गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में दिव्यांगों, बुजुर्गों और विधवा महिलाओं की पेंशन पिछले 5-6 महीनों से रुकी हुई है. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यमुना जल समझौते और ERCP (पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना) पर सरकार ने एक रुपया भी खर्च नहीं किया है. झुंझुनू, सीकर और चूरू की जनता आज भी पानी का इंतजार कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि 2 साल बीत जाने के बाद भी इस परियोजना पर एक कदम भी काम आगे नहीं बढ़ा है.
किसानों की अनदेखी का आरोप
जूली ने खरीफ फसलों की खरीद पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि सरकार का समर्थन मूल्य पर फसल खरीदने का दावा पूरी तरह झूठ है. पूरे प्रदेश में किसान धरने पर बैठे हैं और अपनी फसल बेचने के लिए परेशान हैं, लेकिन सरकार ने खरीद प्रक्रिया शुरू करने में कोई रुचि नहीं दिखाई.

























