राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन, नेताओं की लड़ाई से रणजी टीम पर संकट, पढ़ें पूरा मामला
Rajasthan News: राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन की एडहॉक कमेटी दो गुटों में बंट गई है. नेताओं के बेटों की एंट्री से विवाद के कारण रणजी टीम पर संकट मंडराने लगा है. इस मामले पर बीसीसीआई ने चिंता जताई है.

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) में इन दिनों गहरा विवाद छिड़ गया है. नेताओं के परिवारजनों की एंट्री के बाद हालात इतने बिगड़ गए हैं कि अब एडहॉक कमेटी खुद दो गुटों में बंट चुकी है. संयोजक समेत पांच सदस्य एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं, जिससे राज्य का क्रिकेट प्रशासन पूरी तरह से ठप पड़ने की कगार पर पहुंच गया है.
मामला तब और गंभीर हो गया जब एडहॉक कमेटी के दोनों गुटों ने रणजी ट्रॉफी और अंडर-23 टूर्नामेंट के लिए अलग-अलग टीमें घोषित कर दीं. इससे राजस्थान की क्रिकेट टीम के भविष्य पर संकट मंडराने लगा है. हैरानी की बात यह है कि एडहॉक कमेटी के सभी पांचों सदस्य बीजेपी से जुड़े हुए हैं, फिर भी आपसी टकराव खत्म नहीं हो पा रहा है.
बीजेपी से जुड़े हुए एडहॉक कमेटी के सभी सदस्य
जानकारी के अनुसार, एडहॉक कमेटी के संयोजक डीडी कुमावत पूर्व में बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं. जो एक गुट का नेतृत्व कर रहे हैं, जबकि बाकी चार सदस्य आशीष तिवारी (बीजेपी सांसद घनश्याम तिवारी के बेटे), मोहित यादव (विधायक जसवंत सिंह यादव के बेटे), धनंजय सिंह (मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बेटे) और पिंकेश कुमार जैन (बीजेपी मीडिया सेल से जुड़े) उनके खिलाफ खड़े हैं.
BCCI रद्द कर सकता है राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन की मान्यता
राजनीतिक पृष्ठभूमि से आने वाले इन सदस्यों के बीच अब वर्चस्व की जंग छिड़ गई है. दोनों गुटों के बीच मतभेद इतने बढ़ गए हैं कि क्रिकेट से ज्यादा चर्चा अब राजनीति की हो रही है. क्रिकेट विशेषज्ञों का कहना है कि यह विवाद राजस्थान के क्रिकेट खिलाड़ियों के भविष्य को नुकसान पहुंचा सकता है. बीसीसीआई की नजर भी अब इस मामले पर है. अगर विवाद जल्द नहीं सुलझा तो बीसीसीआई राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन की मान्यता रद्द कर सकता है. इससे राज्य की रणजी टीम बिना खेले ही टूर्नामेंट से बाहर हो सकती है.
राजस्थान स्पोर्ट्स काउंसिल ने दिए जांच के आदेश
इस बीच, राजस्थान स्पोर्ट्स काउंसिल ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं. काउंसिल का कहना है कि यदि एडहॉक कमेटी आपसी विवाद खत्म नहीं करती, तो उन्हें हस्तक्षेप करना पड़ेगा. उधर, इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब खेल संस्थाओं में नेताओं और उनके परिवारवालों की एंट्री होगी, तो यही अंजाम सामने आएगा. राजनीति ने खेल को नुकसान पहुंचाया है.
अब देखना यह होगा कि क्या राज्य सरकार और बीसीसीआई इस विवाद को सुलझाने के लिए कोई ठोस कदम उठाते हैं या राजस्थान की क्रिकेट टीम प्रशासनिक लड़ाई की भेंट चढ़ जाएगी.
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Source: IOCL






















