क्या पंजाब में बीजेपी- अकाली दल का फिर से होगा गठबंधन? इस बात से अटकलें तेज
Punjab Politics: सुखबीर बादल के चंडीगढ़ स्थित आवास पर शिरोमणि अकाली दल के सीनियर नेताओं की बैठक हो रही है. बीजेपी और अकाली दल के बीच गठबंधन को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं.

पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. सुखबीर सिंह बादल की शुक्रवार (07 अगस्त) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात के बाद आज (08 अगस्त) शिरोमणि अकाली दल के सीनियर नेताओं की बैठक हो रही है. ये बैठक सुखबीर बादल के चंडीगढ़ स्थित घर पर हो रही है. अकाली दल और बीजेपी में गठबंधन की चर्चाओं के बीच सुखबीर बादल पार्टी की सीनियर लीडरशिप से बात कर रहे हैं.
शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी. बताया गया कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर वो प्रधानमंत्री से मिले हैं. हालांकि चुनाव से कुछ महीने पहले हुई इस मुलाकात के बाद दोनों पार्टियों के बीच अलायंस को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं. ये दोनों पार्टियां कभी दो दशक तक गठबंधन की सहयोगी रही थीं.
पीएम ने की थी AAP, कांग्रेस और अकाली दल की आलोचना
17 जुलाई को पंजाब के अपने पिछले दौरे पर, जालंधर में एक रैली के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर जमकर हमला बोला था. उन्होंने कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल की भी आलोचना की. हालांकि, एक दिन बाद सुखबीर बादल ने दावा किया कि प्रधानमंत्री ने उनकी पार्टी के खिलाफ कुछ नहीं कहा बल्कि दूसरे अकाली गुट के खिलाफ बात की थी.
सुखबीर बादल की PM से मुलाकात पर क्या बोले केवल सिंह ढिल्लों?
दिल्ली में अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की खबरों पर पंजाब बीजेपी अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा, कोई भी वरिष्ठ नेता प्रधानमंत्री से मिल सकता है. सुखबीर सिंह बादल उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं. मुझे खुशी है कि उन्होंने पंजाब की भलाई के लिए बात की होगी. हम पंजाब की सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेंगे. जल्द ही एक बड़ा नेता पार्टी में शामिल होने वाला है.''
2020 में टूट गया था BJP और अकाली के बीच गठबंधन
बता दें कि अकाली दल बीजेपी के सबसे पुराने सहयोगियों में शामिल रह चुका है. बीजेपी और SAD साथ मिलकर तीन बार प्रदेश में सरकार बना चुके हैं. लेकिन कृषि कानूनों के मसले पर दोनों के बीच मतभेद बढ़ने के बाद यह गठबंधन सितंबर 2020 में टूट गया था. 2022 के विधानसभा चुनाव में दोनों अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरे थे लेकिन दोनों को बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा था.
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