PM मोदी के वीडियो संदेश पर बोले MNS नेता, 'सुसाइड करने...'
Amit Thackeray News: एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे ने केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि नीट पेपर लीक के बाद सुसाइड करने वाले पीड़ित परिवारों का जिक्र किया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले स्टूडेंट्स को माफ करने के वीडियो संदेश पर अब सियासत तेज हो गई है. MNS नेता अमित ठाकरे ने प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार को घेरा. उन्होंने नीट पेपर लीक के बाद खुदकुशी करने वाले छात्रों और पीड़ित परिवारों का जिक्र किया. साथ ही सरकार को नसीहत देते हुए पीड़ित परिवारों से माफी मांगने के लिए कहा.
MNS प्रमुख राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे ने मीडिया से बातचीत में कहा, "किसके लिए माफ कर रहे हैं आप. NEET पेपर लीक के बाद सुसाइड करने वाले 20 युवक-युवतियों के परिवारों से माफी कौन मांगेगा?"
#WATCH | Mumbai | MNS leader Amit Thackeray says, "...Who will apologize to the families of the twenty young men and women who died by suicide following the NEET paper leak?..." pic.twitter.com/rrQp1FH9fw
— ANI (@ANI) August 1, 2026
दरअसल, पीएम ने शुक्रवार (31 जुलाई) को अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो संदेश शेयर करते हुए जंतर-मंतर पर हुई घटना पर फिर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा, ''जंतर-मंतर पर जो कुछ भी हुआ, उसे पूरे देश और दुनिया ने देखा. कुछ 'शरारती बच्चों' ने बेहद अभद्र और असभ्य भाषा का इस्तेमाल किया, जो किसी भी सभ्य समाज को शोभा नहीं देता.''
'मैं उन्हें माफ करना चाहता हूं- PM मोदी
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, ''मैं उन्हें माफ करना चाहता हूं. समाज भी मेरी इस भावना को स्वीकार करे, क्योंकि मेरे मन में एक ही भाव है. कभी-कभी दांतों तले हमारी जीभ आ जाती है, खून भी निकल आता है, लेकिन हम दांत नहीं तोड़ते, क्योंकि दांत भी हमारे हैं, जीभ भी हमारी है और बच्चे भी हमारे हैं.''
गुमराह बच्चों को सही दिशा दिखाना समाज की जिम्मेदार- PM
उन्होंने ये भी कहा कि बचपन में गलतियां होना स्वाभाविक है और बचपन की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि उसमें गलतियों को सुधारने का अवसर भी होता है. PM ने आगे कहा, ''समाज के भीतर इस घटना को लेकर जो आक्रोश है, उसे वह भली-भांति समझ सकते हैं. यह समय इन बच्चों को गले लगाकर उन्हें सही रास्ता दिखाने का है. ये गुमराह बच्चे हैं और उन्हें सही दिशा देना पूरे समाज की जिम्मेदारी है. इन बच्चों को सजा देना, अदालतों के चक्कर कटवाना या समाज में प्रताड़ित करना परिस्थितियों को नहीं बदल सकता.''
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