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'आदिवासियों से जुड़े मुद्दों पर गूंगी-बहरी हो जाती है झारखंड सरकार', चंपाई सोरेन का बड़ा हमला

Jharkhand News: BJP नेता चंपाई सोरेन ने राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा के मुद्दों पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने घुसपैठियों के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार का आभार जताया.

Jharkhand News: झारखंड के पूर्व सीएम चंपाई सोरेन ने आज (19 मई) रांची में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा के मुद्दे पर राज्य सरकार को पूरी तरह विफल बताया और कई गंभीर आरोप लगाए.

उन्होंने आदिवासी अस्मिता और अस्तित्व की लड़ाई में बांग्लादेशी घुसपैठियों व रोहिंग्याओं की पहचान कर उन्हें होल्डिंग सेंटर भेजने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स के गठन का निर्देश राज्य सरकार को देने हेतु प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया.

स्पेशल टास्क फोर्स से घुसपैठियों डिपोर्ट करना होगा आसान- चंपाई सोरेन
चंपाई सोरेन ने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत हर जिले में अवैध घुसपैठियों की पहचान हेतु स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा. इससे घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें डिपोर्ट करना आसान होगा. राज्य सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि पिछली बार जब हाई कोर्ट ने इन घुसपैठियों की पहचान हेतु कमिटी बनाने का आदेश दिया था, तब झारखंड सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई थी. इस बार उनके पास कोई विकल्प नहीं है, इसलिए उम्मीद है कि लाखों घुसपैठियों को बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू होगी, जो इस राज्य के आदिवासियों और मूलवासियों के अधिकारों का अतिक्रमण कर रहे हैं.

रेपिस्ट को इनाम देने से अपराधियों का मनोबल बढ़ेगा, महिलाओं पर खतरा बढ़ेगा- चंपाई सोरेन
महिला सुरक्षा के मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरते हुए उन्होंने सवाल किया—क्या वोट बैंक के लिए सरकार बलात्कारियों को इनाम देगी? बोकारो की एक चर्चित घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आत्मरक्षा का अधिकार हर नागरिक को है, और ऐसे अपराधियों से किसी भी प्रकार की सहानुभूति नहीं होनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड के एक मंत्री ने जिस तरह उस बलात्कारी को विक्टिम साबित करने का प्रयास किया और उसे कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से ₹1 लाख, मुख्यमंत्री की ओर से ₹1 लाख, साथ ही सरकार की सहायता राशि और स्वास्थ्य विभाग में नौकरी देने की घोषणा की—वह बेहद शर्मनाक है.

उन्होंने पूछा—क्या इससे बलात्कारियों को प्रोत्साहन नहीं मिलेगा? क्या हमारी बेटियाँ अब और अधिक असुरक्षित नहीं हो जाएंगी? क्या अलग झारखंड राज्य इसी दिन के लिए बनाया गया था?

'धर्मांतरण के बाद आदिवासी/दलित अधिकार समाप्त'
पिछले दिनों आंध्र प्रदेश HC के एक ऐतिहासिक निर्णय का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति धर्म बदलकर ईसाई बन जाता है, तो वह अब अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति नहीं रह जाता. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ईसाई धर्म में जाति व्यवस्था को मान्यता नहीं है, अतः धर्म परिवर्तन के साथ ही SC/ST को मिलने वाले संवैधानिक अधिकार समाप्त हो जाते हैं. नवंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी प्रकार का निर्णय दिया था.

उन्होंने सवाल उठाया—फिर धर्मांतरण के बाद ये लोग किस आधार पर आदिवासी आरक्षण का लाभ उठा रहे हैं? उन्होंने कहा, "आदिवासियों की पहचान उनकी विशिष्ट संस्कृति, परंपरा, भाषा और जीवनशैली में निहित है. हम पेड़ के नीचे पूजा करते हैं. हमारे सभी संस्कार पाहन, पड़हा राजा, मानकी-मुंडा और मांझी-परगना द्वारा पूरे किए जाते हैं. जबकि धर्मांतरण के बाद लोग इन सबको छोड़ चर्च में जाते हैं. जो भी धर्मांतरण कर चुका है या आदिवासी जीवनशैली का परित्याग कर चुका है, उससे हमें कोई आपत्ति नहीं है. वह जहां है, वहां शांति से रहे. लेकिन उसे संविधान द्वारा आदिवासियों को दिए गए आरक्षण में अतिक्रमण करने का कोई अधिकार नहीं है."

कांग्रेस को आदिवासियों से माफी मांगनी चाहिए: चंपाई सोरेन
अगले सप्ताह कांग्रेस द्वारा सरना धर्म कोड के समर्थन में प्रस्तावित प्रदर्शन पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस को आदिवासियों के मुद्दों पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि अंग्रेजों के समय से चले आ रहे आदिवासी धर्म कोड को 1961 की जनगणना से हटाने का कार्य कांग्रेस ने ही किया था. उन्होंने कहा, "कांग्रेस न केवल आदिवासियों की पहचान छीनने की दोषी है, बल्कि उसने आदिवासियों पर गोलियां चलवाईं. राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को देशभर के आदिवासी समाज से माफी मांगनी चाहिए."

अंत में उन्होंने कहा, "अगर बीजेपी के नेतृत्व वाली अटल बिहारी वाजपेयी सरकार सत्ता में नहीं आती, तो झारखंड राज्य का निर्माण ही नहीं होता. संविधान की आठवीं अनुसूची में संथाली भाषा को भी बीजेपी सरकार ने ही शामिल किया था."

About the author चंद्रमणि

चंद्रमणि नक्सल और क्राइम के मामलों में एक्सपर्ट हैं. 10 सालों से झारखंड के सरायकेला खरसावां और चाईबासा जिले से पत्रकारिता कर रहे हैं. वो साल 2019 से एबीपी न्यूज नेटवर्क से जुड़े हैं.

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