लाल किला ब्लास्ट: दूसरे आत्मघाती हमलावर की तलाश में था मास्टरमाइंड, NIA जांच में बड़ा खुलासा
Delhi Red Fort Blast: राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने नबी द्वारा संचालित एक समानांतर आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है. जांच में सामने आया कि मास्टरमाइंड दूसरे हमलावर की तलाश में था.

लाल किले के पास हाल में हुए कार बम धमाके के बाद पकड़े गए 'सफेदपोश' आतंकी मॉड्यूल की जांच में सामने आया है कि इस साजिश का मास्टरमाइंड डॉ. उमर-उन-नबी एक दूसरे आत्मघाती हमलावर की भर्ती करने की कोशिश कर रहा था.
हालांकि वह इसमें सफल नहीं हो सका, क्योंकि संबंधित व्यक्ति ने सेब की पैदावार के मौसम में अपने परिवार की मदद करने की जरूरत का हवाला देते हुए इस आतंकी साजिश से पीछे हटने का फैसला कर लिया. अधिकारियों ने रविवार (18 जनवरी) को यह जानकारी दी.
एनआईए ने किया आतंकी मॉड्यूल
श्रीनगर पुलिस और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने नबी द्वारा संचालित एक समानांतर आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है. नबी वही व्यक्ति था जो 10 नवंबर को ऐतिहासिक लाल किले के पास विस्फोटकों से लदी गाड़ी चला रहा था. इस विस्फोट में 12 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी. गिरफ्तार किए गए संदिग्धों से पूछताछ के दौरान डॉक्टर से आतंकी बने व्यक्ति द्वारा अपनाई गई भर्ती की रणनीतियों का खुलासा हुआ है.
इन्हीं जानकारियों के आधार पर एनआईए ने शोपियां निवासी यासिर अहमद डार को गिरफ्तार किया. अधिकारियों ने बताया कि नबी ने डार को एक संभावित आत्मघाती हमलावर के रूप में सफलतापूर्वक कट्टरपंथी बना दिया था, लेकिन पिछले साल अगस्त में हुई एक मुलाकात के दौरान उसने आखिरी समय में इस साजिश से पीछे हटने का फैसला किया. उसने इसके लिए “सेब की पैदावार का मौसम” और घर में मरम्मत का काम होने को कारण बताया.
2023 से नबी के संपर्क में था डार
अधिकारियों के अनुसार, डार 2023 से नबी के संपर्क में था. उसने यह भी स्वीकार किया कि नबी का एक पेशेवर डॉक्टर होना उसके प्रभाव में आने का एक बड़ा कारण बना. डॉक्टर होने के कारण उसकी कट्टरपंथी बातें भर्ती किए गए लोगों को अधिक प्रभावशाली और “विश्वसनीय” लगती थीं.
अधिकारियों ने बताया कि जांच से संकेत मिला है कि नबी केवल आतंकी ही नहीं था, बल्कि रणनीतिक रूप से भर्ती भी करता था. वह ‘प्राइमरी सेल’ के पकड़े जाने पर भी आतंकी अभियान की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए सेकेंडरी, स्वतंत्र सेल बना रहा था.
पुलिस ने आरोपी के फोन से बरामद किया 'वॉइस नोट'
जांच के दौरान, पुलिस ने एक आरोपी के फोन से एक ‘वॉइस नोट’ भी बरामद किया, जिसमें वह जिहाद के लिए 'बायत' (निष्ठा की कसम) ले रहा है. बीच में ही स्कूल की पढ़ाई छोड़ चुका डार का नाम पहले भी जांच में सामने आया था, जब उसका एक दोस्त आतंकी संगठनों से जुड़ा था.
अधिकारियों ने बताया कि पूछताछ के दौरान पता चला कि वह सोशल मीडिया ‘टेलीग्राम’ के ज़रिए नबी के संपर्क में था और उसे हमेशा बेहतरीन शारीरिक प्रशिक्षण सुनिश्चित करने के लिए कहा जाता था. अधिकारियों के अनुसार, डार दूसरा संभावित आत्मघाती हमलावर था, जिसे नबी इस आतंकी मॉड्यूल में शामिल करने की कोशिश कर रहा था. उन्होंने बताया कि नबी कट्टरपंथी था और उसका मानना था कि आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए आत्मघाती हमलावर का होना बेहद जरूरी है.
श्रीनगर पुलिस ने जांच के बीच दानिश को किया था गिरफ्तार
पिछले वर्ष जब श्रीनगर पुलिस द्वारा इस आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया जा रहा था, तब दक्षिण कश्मीर के काज़ीगुंड से यासिर उर्फ़ दानिश नामक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था. राजनीति शास्त्र में स्नातक यासिर ने स्वीकार किया कि उसका अक्टूबर 2024 में कुलगाम की एक मस्जिद में ‘डॉक्टर मॉड्यूल’ से संपर्क हुआ था. वहां से उसे फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी के किराए के आवास तक ले जाया गया था.
यासिर ने अपनी पूछताछ में बताया कि ‘‘सफेदपोश’’ आतंकी मॉड्यूल के अन्य सदस्य उसे प्रतिबंधित संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) का सदस्य बनने के लिए कहना चाहते थे, उसे नबी द्वारा कई महीनों तक मानसिक रूप से इतना प्रभावित किया गया कि वह आत्मघाती हमलावर बनने के लिए तैयार हो गया. हालांकि, यह साजिश पिछले साल अप्रैल में नाकाम गई, जब उसने पीछे हटने का फैसला किया.
उसने इसके लिए अपनी खराब आर्थिक स्थिति का हवाला देने के साथ यह भी कहा कि आत्महत्या इस्लाम में मना है. श्रीनगर पुलिस ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. जी वी संदीप चक्रवर्ती की अगुवाई में इस मॉड्यूल का पर्दाफाश किया, जिसमें आत्मघाती हमलावर की तलाश की जा रही थी.
आतंकी नेटवर्क की जांच में जुड़ा खतरनाक पहलू
इस घटना से जेईएम से जुड़े अंतर-राज्यीय आतंकी नेटवर्क की जांच में एक खतरनाक नया पहलू जुड़ गया है. पुलवामा का 28 वर्षीय डॉक्टर नबी कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में फैले इस नेटवर्क में सबसे कट्टर और महत्वपूर्ण ऑपरेशनल सदस्य के रूप में उभरा. अधिकारियों का मानना है कि वह छह दिसंबर को बाबरी मस्जिद विध्वंस वाले दिन वाहन से हमले की साजिश रच रहा था.
अधिकारियों ने बताया कि विस्फोटक वाले वाहन को किसी भीड़ वाली जगह पर, या तो देश की राजधानी में या किसी धार्मिक महत्व की जगह पर रखने और फिर गायब हो जाने का उसका इरादा था. सह-आरोपी से पूछताछ के अनुसार, नबी में बदलाव 2021 में सह-आरोपी डॉ. मुज़म्मिल अहमद गनई के साथ तुर्किये की यात्रा के बाद शुरू हुआ, जहां कथित तौर पर वे जेईएम के कार्यकर्ताओं से मिले थे.
आरोपियों ने जमा किया रासायनिक पदार्थ
इस यात्रा के बाद, नबी और गनई ने, जो फरीदाबाद की अल फलाह विश्वविद्यालय में पढ़ाते थे, खुले बाज़ार से बड़ी मात्रा में रासायनिक पदार्थ जमा करना शुरू कर दिया. इसमें 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर शामिल था, जिसका ज़्यादातर हिस्सा विश्वविद्यालय परिसर के पास भंडारित किया गया था.
दिसंबर की साज़िश तब असफल हो गई जब श्रीनगर पुलिस की बारीकी से की गई जांच से गनई को गिरफ्तार किया गया और विस्फोटक ज़ब्त कर लिए गए, जिससे नबी घबरा गया और आखिरकार लाल किले के बाहर समय से पहले धमाका कर दिया.
घटना के बाद हुआ आतंकी नेटवर्क का खुलासा
पिछले साल 19 अक्टूबर को श्रीनगर के बाहरी इलाके में बानपोरा, नौगाम में दीवारों पर जेईएम के पोस्टर दिखने की एक छोटी लेकिन अहम घटना के बाद इस जटिल अंतर-राज्यीय आतंकी नेटवर्क का खुलासा हुआ.
श्रीनगर पुलिस ने मामला दर्ज किया और सीसीटीवी फुटेज की जांच की, जिसके बाद तीन स्थानीय लोगों- आरिफ निसार डार उर्फ साहिल, यासिर-उल-अशरफ और मकसूद अहमद डार उर्फ शाहिद को गिरफ्तार किया गया. इन सभी पर पहले भी पथराव करने के मामले दर्ज थे.
उनके साथ पूछताछ से शोपियां के रहने वाले मौलवी इरफान अहमद को गिरफ्तार किया गया, जो पहले अर्द्ध चिकित्साकर्मी था और फिर इमाम बन गया था. उस पर आरोप है कि उसने पोस्टर भेजे और डॉक्टरों को कट्टरपंथी बनाने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया.
Source: IOCL























