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Bastar News: छत्तीसगढ़ के बस्तर से खरबों रुपये कमाई के बाद भी रेल सुविधाओं का अभाव, नाराज लोग उठाने जा रहे हैं ये कदम
रायपुर से जगदलपुर को रेल मार्ग से जोड़ने के लिए सालों से मांग कर रहे बस्तरवासियों के सब्र का बांध अब टूट चुका है. सरकारों को जगाने के लिए बस्तरवाली 3 अप्रैल से 141 किलोमीटर की पदयात्रा करेंगे

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बस्तर: छत्तीसगढ़ के बस्तर (Bastar) में रेल सुविधाओं की मांग को लेकर अब बस्तरवासी रेल प्रशासन के खिलाफ बड़ा कदम उठाने के लिए तैयार हो गए हैं. दरअसल रावघाट (Raoghat) से बस्तर के जगदलपुर (Jagdalpur) तक रेलवे ट्रैक के दोहरीकरण के काम में लापरवाही और ढीले रवैया को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ बस्तरवासी कांकेर जिले के अंतागढ़ से लेकर जगदलपुर तक 141 किलोमीटर की पदयात्रा करेंगे. ये पैदलयात्रा 3 अप्रैल से शुरु की जाएगी और 12 अप्रैल को जगदलपुर पहुंचेगी,
वहीं बस्तरवासियों ने इस पदयात्रा को बस्तर रेल जागरण अभियान का नाम दिया है. इस अभियान से जुड़े सभी पदाधिकारियों ने इस पदयात्रा की सारी तैयारियां पूरी कर ली है. उनका कहना है कि पदयात्रा में 200 से अधिक बस्तरवासी शामिल होंगे, और राजधानी रायपुर से जगदलपुर को रेल मार्ग से जोड़ने के लिए अधूरे पड़े रावघाट रेल परियोजना को पूरा करने की मांग को लेकर रेल मंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम जगदलपुर पहुंचकर बस्तर कमिश्नर को ज्ञापन सौंपेंगे.

रायपुर से जगदलपुर को रेल मार्ग से जोड़ने के लिए सालों से बस्तरवासी कर रहे है मांग
दरअसल बीते कई दशकों से राजधानी रायपुर से जगदलपुर को रेल मार्ग से जोड़ने के लिए बस्तर वासी मांग कर रहे हैं.कुछ साल पहले रावघाट रेल परियोजना की शुरुआत की गई और इससे बस्तरवासियों को उम्मीद जगी कि जल्द ही वे रेल सुविधा का लाभ ले सकेंगे और इससे व्यापार को बढ़ावा मिलने के साथ स्वास्थ्य सुविधाएं भी मुहैया हो सकेगी. हालांकि 3 साल पहले शुरू की गई रावघाट रेल परियोजना के तहत राजधानी रायपुर से अंतागढ़ तक रेल मार्ग बन चुका है.
वही अंतागढ़ से करीब 140 किलोमीटर जगदलपुर तक का रेल मार्ग अब तक नहीं बन पाया है और काम भी अधूरा पड़ा है. ऐसे में इस 140 किलोमीटर रेल मार्ग को बनाने के लिए बस्तरवासी लगातार रेल प्रशासन से मांग कर रहे हैं और आंदोलन भी कर रहे हैं, लेकिन इस दिशा में कोई काम नहीं होता दिख रहा है. वहीं अभियान के पदाधिकारियों ने कहा कि अंतागढ़ से जगदलपुर तक 140 किलोमीटर तक पदयात्रा कर सरकार को जगाने का प्रयास किया जाएगा.
केंद्र सरकार को होती है खरबो रुपये की कमाई
बस्तर के जानकारों का कहना है कि आजादी के 75 साल के बाद भी आज भी बस्तर उत्तर भारत से कटा हुआ है, और केवल केंद्र सरकार बस्तर का दोहन करने में लगी हुई है. बस्तर से निकलने वाले लोह अयस्क (आयरन ) से हर साल केंद्र सरकार खरबों रुपए कमाती है, लेकिन जो सुविधाएं बस्तर को मिलनी चाहिए वह नहीं मिल पा रही हैं. ऐसे में मूल बस्तरिया अब जाग गए है और केंद्र और राज्य सरकार को नींद से जगाने के लिए इस पदयात्रा को निकाला जा रहा है. उन्होंने कहा कि जब तक बस्तरवासी की मांग पूरी नहीं हो जाती है तब तक रेल प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन जारी रहेगा.
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