BRICS पर कांग्रेस का वार, कहा- 'सिर्फ प्रचार से नहीं रुकेगा आतंकवाद'
BRICS घोषणापत्र में पहलगाम हमले की निंदा पर कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय ने BJP पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि आतंकवाद रोकने के लिए सिर्फ बयान नहीं, ठोस कार्रवाई जरूरी है.

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के नेता विकास उपाध्याय ने BRICS शिखर सम्मेलन 2026 के नई दिल्ली घोषणापत्र में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा किए जाने को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी इस फैसले का श्रेय लेकर इसे कूटनीतिक सफलता बता रही है, लेकिन देश को आतंकवाद से मुक्ति के लिए ठोस कदमों की जरूरत है.
विकास उपाध्याय ने सवाल उठाया कि अगर BRICS में आतंकवाद की निंदा हुई है तो सरकार को यह बताना चाहिए कि आतंकवाद खत्म करने के लिए समिट में कौन से ठोस कदम तय किए गए. उन्होंने पूछा कि पहलगाम हमले के दोषियों को कब सजा मिलेगी?
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BJP पर प्रचार का आरोप
कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा BRICS घोषणापत्र में आतंकवाद की निंदा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति की उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है. उनके मुताबिक, देश के लिए वास्तविक कूटनीति तभी मानी जाएगी, जब आतंकवादी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए ठोस रणनीति तैयार हो.
#WATCH | Raipur, Chhattisgarh: On the condemnation of the Pahalgam terror attack in the New Delhi Declaration of the BRICS Summit 2026, Congress leader Vikas Upadhyay says, “The Bharatiya Janata Party is taking credit for the resolution condemning terrorism adopted at the BRICS… pic.twitter.com/D1wRYC942F
— ANI (@ANI) September 13, 2026
घोषणापत्र में पहलगाम हमले की निंदा
बता दें कि 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने नई दिल्ली घोषणापत्र को सर्वसम्मति से मंजूरी दी. इसमें 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई. घोषणापत्र में आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ और आतंकवादियों व उनके समर्थकों को जवाबदेह ठहराने की बात कही गई है.
BRICS क्या है और क्यों अहम?
BRICS मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के समूह के रूप में शुरू हुआ था. विस्तार के बाद इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया और यूएई समेत कई देश शामिल हैं. 2026 में भारत BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को 18वां शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया. इस बार सम्मेलन में आतंकवाद के साथ वैश्विक शासन सुधार, व्यापार, टैरिफ और पश्चिम एशिया के तनाव जैसे मुद्दे भी प्रमुख रहे.
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