Chhattisgarh: बस्तर में धर्मांतरण किये ग्रामीणों के मौलिक अधिकारों के हनन, हुक्का-पानी भी किया बंद, जानें मामला
Bastar News:छत्तीसगढ़ के बस्तर में धर्मांतरण को लेकर विवाद जारी है. ऐसे में पिछले 2 साल से धर्मांतरण को लेकर मसीह समाज के लोगों को काफी परेशान कर गांव में लोगों का हुक्का पानी भी बंद कर दिया गया है.

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के बस्तर में धर्मांतरण के मुद्दे को लेकर लगातार दो समुदाय के बीच विवाद जारी है. एक तरफ जहां मूल धर्म के आदिवासी क्रिश्चन समुदाय पर ग्रामीणों को प्रलोभन देकर धर्मांतरण करने का आरोप लगा रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ मसीह समाज के पदाधिकारियों ने धर्मांतरण किए ग्रामीणों को स्थानीय ग्रामीणों द्वारा जबरन परेशान करने का आरोप लगाया है. शनिवार (6 मई) को मसीह समाज के पदाधिकारियों ने प्रेस वार्ता लेते हुए बताया कि जिले के कई गांवों में मसीह समाज के लोगों को धार्मिक स्थल चर्च और पारिवारिक प्रार्थना में अवरोध उत्पन्न किया जा रहा है.
बस्तर जिले के 10 से अधिक गांवों में मसीह समाज के लोगों को सार्वजनिक स्थल पर पेयजल के उपयोग पर रोक लगा दिया गया है. इसके अलावा समाज के लोगों के दाह संस्कार के समय भी बाधा उत्पन्न कर उनके परिजनों को परेशान किया जा रहा है. जिसे देखते हुए मसीह समाज ने आगामी 8 मई को जगदलपुर शहर में अपने मौलिक अधिकारों के हनन को लेकर धरना प्रदर्शन कर अपना विरोध जताने की बात कही है. साथ ही लगभग 25 गांव के मसीह समाज के ग्रामीणों के द्वारा विशाल रैली निकालकर मुख्यमंत्री के नाम बस्तर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने की जानकारी दी है.
रोजगार से वंचित किया जा रहा है
बस्तर मसीह समाज के अध्यक्ष पास्टर सी.आर बघेल ने जानकारी देते हुए बताया कि बस्तर में पिछले 2 सालों से धर्मांतरण को लेकर मसीह समाज के लोगों को काफी परेशान किया जा रहा है. उनके साथ मारपीट की घटना को अंजाम दिया जा रहा है. यही नहीं कई गांव में इन लोगों का हुक्का पानी भी बंद कर दिया गया है. इसके अलावा पंचायतों में उन्हें रोजगार से वंचित करने के साथ ही उनके घर में मृत्यु होने पर दाह संस्कार के समय भी बाधा उत्पन्न किया जा रहा है. इसके अलावा सामाजिक कार्यक्रम जैसे शादी और अन्य कार्यक्रमों पर भी रोक लगाया गया है.
मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा
वही सबसे जरूरी सार्वजनिक स्थल पर पेयजल के उपयोग पर भी रोक लगा दी गई है. जिससे मसीह समाज के लोग मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं . बस्तर मसीह समाज के अध्यक्ष ने बताया कि जिले के ऐसे कई गांव है जहां इस तरह के हालात देखने को मिल रहे हैं. प्रशासन से शिकायत के बाद भी किसी तरह की कोई कार्यवाही नहीं हो रही है. मसीह समाज के लोगों को अपने खेत में खेती करने ना देना और उनके जीवन यापन के लिए मजदूरी करने पर भी रोक लगाया जा रहा है. जिससे पूरी तरह से प्रताड़ित होकर आगामी 8 मई को इस प्रताड़ना से आहत होकर और अपने संवैधानिक, मौलिक अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए मेथोडिस्ट चर्च में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन करने की बात कही है .
साथ ही रैली निकालकर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने की जानकारी अध्यक्ष ने दी है. अध्यक्ष का कहना है कि उनके लोगों पर लागातार मारपीट और इस तरह के हिंसा की घटनाएं बढ़ रही है. जिससे वे अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. जिसको लेकर पहली बार मसीह समाज पूरे जिले भर से लोगो को इक्कठा कर धरना प्रदर्शन करने जा रहा है.
प्रशासन से की कार्रवाई की मांग
मसीह समाज के अध्यक्ष ने बताया कि तोकापाल ब्लॉक के भेजरीपदर गांव से लेकर ऐसे कई गांव है. जहां आय दिन शव दफन को लेकर दो समुदाय के बीच मारपीट हो रही है. मसीह समाज के लोगों पर प्रलोभन देकर धर्मांतरण करने का आरोप लगाया जा रहा है. जो कि सरासर गलत है . स्वेच्छा से बस्तर के ग्रामीण क्रिश्चन धर्म को अपना रहे है. ऐसे में उन्हें किसी तरह से अपनी संस्कृति, परंपरा और रीति-रिवाज को छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जा रहा है. विभिन्न हिन्दू संगठन के लोग जबरन उनके लोगों को परेशान कर रहे हैं. साथ ही मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं. इसको लेकर मसीह समाज ने प्रशासन से कार्रवाई की भी मांग की है.
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