नवादा में UGC एक्ट पर भड़का सवर्ण समाज, डस्टबिन में फेंके BJP के झंडे
नवादा में यूजीसी एक्ट के विरोध में स्वर्ण समाज ने भाजपा के झंडे उतारकर विरोध जताया. मंगलवार को बड़ी संख्या में लोग जंतर-मंतर आंदोलन में शामिल होने दिल्ली रवाना होंगे.

यूजीसी एक्ट के विरोध को लेकर बिहार के नवादा में सवर्ण समाज के लोगों का भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ आक्रोश बढ़ता नजर आ रहा है. सोमवार को कई स्थानों पर लोगों ने अपने घरों से बीजेपी के झंडे उतारकर उन्हें डस्टबिन में डाल दिया और सड़क किनारे फेंककर विरोध जताया. यह अभियान सवर्ण समाज के संयोजक राजेश कुमार के नेतृत्व में चलाया गया.
सवर्ण समाज के लोगों ने कहा कि यूजीसी एक्ट को लेकर उनकी आपत्तियों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए. विरोध के दौरान लोगों ने बीजेपी के झंडे घरों से उतारकर अपना आक्रोश जाहिर किया. झंडे उतारे जाने की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई है.
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जंतर-मंतर आंदोलन में शामिल होने की तैयारी
सवर्ण समाज के संयोजक राजेश कुमार श्री ने कहा कि समाज के लोग शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकारों की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन करना चाहते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलनकारियों के साथ कथित तौर पर बर्बरता की जा रही है और उन्हें प्रदर्शन करने से रोका जा रहा है. उन्होंने कहा कि मंगलवार को नवादा से बड़ी संख्या में लोग दिल्ली के लिए रवाना होंगे. ये लोग जंतर-मंतर पर प्रस्तावित आंदोलन में शामिल होकर अपनी मांगें उठाएंगे.
यूजीसी एक्ट वापस लेने की मांग
राजेश कुमार ने कहा कि जब तक समाज के मौलिक और समानता के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा. उन्होंने यूजीसी एक्ट वापस लेने और सवर्ण आयोग के गठन की घोषणा की मांग की. उन्होंने कहा कि मांगें पूरी नहीं होने तक बीजेपी के बहिष्कार का अभियान जारी रहेगा. हालांकि, ये दावे और आरोप आंदोलन से जुड़े लोगों की ओर से लगाए गए हैं.
आंदोलन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज
वहीं बीजेपी के झंडे उतारे जाने के बाद नवादा में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. स्वर्ण समाज के नेताओं ने आगे बड़े आंदोलन की तैयारी की बात कही है. मंगलवार को दिल्ली जाने वाले लोगों की संख्या को लेकर भी स्थानीय स्तर पर चर्चा है. आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि वे अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से केंद्र सरकार के सामने रखना चाहते हैं. वहीं, बीजेपी के खिलाफ झंडे उतारने के अभियान ने स्थानीय राजनीति में एक नया मुद्दा खड़ा कर दिया है.
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