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51 साल पहले की गई हिन्दुस्तान की एक 'भूल'
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10 जनवरी 1966 को भारतीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान के बीच ताशकंद में समझौता हुआ. जंग खत्म हो गयी. समझौते के तहत हाजी पीर पाकिस्तान को वापस कर दिया गया, अगर ऐसा नहीं हुआ होता तो आज पाकिस्तानी घुसपैठियों को रोकना बेहद आसान होता.
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हाजी पीर पर कब्ज़ा करना इतना आसान नहीं था. रात का वक्त था. तेज बारिश हो रही थी. पीठ पर गोला बारूद का बोझ था और सामने करीब डेढ़ हजार फुट की चढाई थी. पर इतनी रुकावटें भी मेजर रंजीत दयाल और उनके जवानों का रास्ता ना रोक सकीं. सेना में ये माना जाता है कि जब मौसम बेहद खराब हो तभी हमला करना फायदेमंद होता है. लेकिन खराब मौसम में इतनी बड़ी चढ़ाई वो भी रात में करीब-करीब नामुमकिन थी. सुबह होने से पहले अगर हाजी पीर की चोटी पर नही पहुंचते तो पाकिस्तानी गोलियों से बचना नामुमकिन होता और मिशन फेल हो जाता. इसलिए रात में ही चढ़ाई का फैसला किया गया.
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