World Islamic QUAD: पाकिस्तान की नई चाल! इस्लामिक QUAD के नाम पर कर रहा बड़ा प्लान, जानें इसके पीछे का सीक्रेट
World Islamic QUAD: भारत का पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान सऊदी, मिस्र, तुर्किए के साथ मिलकर इस्लामिक क्वाड समूह बनाने की कोशिश कर रहा है. इसको लेकर कई उच्च स्तरीय बैठक भी हो चुकी है.

सऊदी अरब, मिस्र, तुर्किए और पाकिस्तान के बीच एक नए तरह के समूह को बनाने को लेकर चर्चा तेज हो गई है. खबरों के अनुसार ये चारों देश मिलकर एक ऐसा फ्रेमवर्क बनाने के काफी करीब पहुंच चुके हैं, जिसे अनौपचारिक तौर पर इस्लामिक क्वाड कहा जा रहा है. पाकिस्तान ने हालांकि इसे अभी आधिकारिक तौर पर गठबंधन नहीं माना है, लेकिन बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है और जल्द कोई ठोस फैसला सामने आ सकता है.
यह पूरी प्रक्रिया ऐसे समय में चल रही है, जब ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध ने मध्य पूर्व के हालात को और ज्यादा गंभीर बना दिया है. ऐसे में ये चारों देश पर्दे के पीछे लगातार बातचीत कर रहे हैं ताकि क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता को संभाला जा सके और अपने हितों की रक्षा की जा सके.
#إسلام_آباد | سمو الأمير الدكتور عبدالله بن خالد بن سعود الكبير مدير عام الإدارة العامة لتخطيط السياسات يشارك في الاجتماع الافتتاحي لكبار المسؤولين في الإطار التشاوري الرباعي بين المملكة العربية السعودية وجمهورية مصر العربية، وجمهورية باكستان الإسلامية، وجمهورية تركيا. pic.twitter.com/SSZ0jegPPD
— وزارة الخارجية 🇸🇦 (@KSAMOFA) April 14, 2026
पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई थी बैठक
हाल ही में इस दिशा में एक अहम बैठक इस्लामाबाद में हुई, जिसमें चारों देशों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए. पाकिस्तान की ओर से इस बैठक का नेतृत्व अतिरिक्त विदेश सचिव ताहिर अंद्राबी ने किया. तुर्किए की तरफ से उप विदेश मंत्री मूसा कुलाकलिकाया शामिल हुए, जबकि मिस्र और सऊदी अरब के भी बड़े अधिकारी इस बैठक में मौजूद थे. इस बैठक का मकसद पहले हुई बातचीत को आगे बढ़ाना था. अब अगली बैठक तुर्किए के अंताल्या शहर में होने की तैयारी है. दरअसल, इन देशों के विदेश मंत्री इससे पहले 19 मार्च को सऊदी अरब की राजधानी रियाद में मिले थे. उस समय भी ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अपने चरम पर था. इसके सिर्फ दस दिन बाद ही इस्लामाबाद में दूसरी बैठक हो गई. इतनी जल्दी-जल्दी बैठकों का होना इस बात का संकेत है कि ये देश जल्द से जल्द किसी समझौते पर पहुंचना चाहते हैं.
पाकिस्तान की भूमिका सबसे ज्यादा
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान इस पूरे मामले में काफी सक्रिय भूमिका निभा रहा है और बैकचैनल कूटनीति के जरिए तेजी से बातचीत आगे बढ़ा रहा है. अधिकारियों का मानना है कि मध्य पूर्व में तेजी से बदलते हालात से निपटने के लिए अब पारंपरिक तरीके काफी नहीं हैं, इसलिए नए तरह के सहयोग की जरूरत महसूस की जा रही है. इस संभावित सहयोग का मकसद सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है. चारों देश एक ऐसा ढांचा बनाना चाहते हैं, जिसमें आपसी सहयोग बढ़े, क्षेत्र में शांति बनी रहे, आर्थिक तालमेल बेहतर हो और बड़े मुद्दों पर एक जैसी सोच विकसित की जा सके. कुछ जानकार यह भी मान रहे हैं कि यह आगे चलकर एक तरह का सैन्य सहयोग भी बन सकता है, जैसा पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पहले से समझौते हैं.
आने वाले समय में मिडिल ईस्ट में दिखेगा बदलाव
फिलहाल यह पूरी प्रक्रिया बातचीत के स्तर पर है और अंतिम रूप अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन जिस तेजी से बैठकें हो रही हैं और बातचीत आगे बढ़ रही है, उससे साफ है कि आने वाले समय में यह समूह मध्य पूर्व और आसपास के क्षेत्रों की राजनीति और सुरक्षा पर बड़ा असर डाल सकता है.
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Source: IOCL


























