इंडोनेशिया सुनामी: मरने वालों की संख्या 430 के पार, करीब 22 हजार विस्थापित
विनाशकारी सुनामी में मरने वालों की संख्या बढ़कर 430 हो गई है जबकि करीब 22 हजार लोग विस्थापित हुए हैं. इंडोनेशियाई राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बोर्ड (बीएनपीबी) के प्रवक्ता सुतोपो पुरवो नुगरोहो ने बताया कि शनिवार रात को आई आपदा के कारण लापता लोगों की संख्या बढ़कर 159 हो गई है जबकि 1,495 लोग घायल हुए हैं.

जकार्ता: इंडोनेशियाई अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि सुंडा स्ट्रेट में ज्वालामुखी फटने के बाद आई विनाशकारी सुनामी में मरने वालों की संख्या बढ़कर 430 हो गई है जबकि करीब 22 हजार लोग विस्थापित हुए हैं. इंडोनेशियाई राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बोर्ड (बीएनपीबी) के प्रवक्ता सुतोपो पुरवो नुगरोहो ने बताया कि शनिवार रात को आई आपदा के कारण लापता लोगों की संख्या बढ़कर 159 हो गई है जबकि 1,495 लोग घायल हुए हैं.
सुतोपो ने कहा कि जावा द्वीप के पश्चिमी तट पर स्थित गंभीर रूप से प्रभावित पांडेगलांग में 290 लोगों की मौत हुई, 1,143 लोग घायल हुए हैं और 77 लोग लापता है. इसके अलावा आपदा से 17,477 लोग प्रभावित हुए हैं. सुंडा स्ट्रेट पर एनाक क्राकाटोओ ज्वालामुखी में विस्फोट के बाद आई सुनामी ने इंडोनेशिया के जावा और सुमात्रा द्वीप में शनिवार देर रात तबाही मचाई. इसकी पहले से कोई चेतावनी जारी नहीं हुई थी.
समाचार एजेंसी एफे की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिमी तट और सुमात्रा द्वीप के दक्षिणी हिस्सों में खराब मौसम स्थिति से मानवीय सहायता व बचाव दलों के लिए हालात मुश्किल होते जा रहे हैं. सुतोपो ने ट्वीट कर कहा कि भारी बारिश के कारण पांडेगलांग के कई इलाकों में बाढ़ आ गई है और बचाव अभियान बाधित हुआ है. इंडोनेशिया के मौसम विभाग ने एक अलर्ट जारी कर लोगों को तटों से दूर रहने का आग्रह किया है. विभाग ने तेज लहरें आने की चेतावनी दी है.
देश ने बुधवार को 26 दिसंबर 2004 बॉक्सिंग डे को सुमात्रा के उत्तरी तट पर 9.1 की तीव्रता वाले भूकंप के कारण आई सुनामी में मारे गए 167, 799 लोगों को भी याद किया. एक साल में आई दूसरी सुनामी से इंडोनेशिया के 430 लोगों को अपनी जानें गंवानी पड़ीं जबकि 20,000 से ज़्यादा लोग बेघर हो गए. वहीं, कई लोग अभी भी लापता हैं. ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि आख़िर इस एशियाई देश में बार-बार भूकंप क्यों आ जाता है. आइए आपको देते हैं इसका जवाब.
इंडोनेशिया में निरंतर भूकंप और सुनामी इस वजह से आते रहते हैं क्योंकि ये भूकंपीय दृष्टि से सक्रिय फायर ऑफ रिंग पर विराजमान है. ये प्रशांत महासागर के बेसिन में ज्वालामुखियों और फॉल्ट लाइनों का एक आर्क है. आपको बता दें कि प्रशांत महासागर में एक तरफ ये जहां जपाना से इंडोनेशिया तक फैला हुआ है तो वहीं दूसरा तरफ इसका विस्तार कैलिफोर्निया से नॉर्थ अमेरिका तक है.
इंडोनेशिया में आए बड़े भूकंप और सुनामी में हुईं मौतें
साल मृतकों की संख्या
जुलाई 2006- 700 सितंबर 2009- 1100 अक्टूबर 2010- 300 दिसंबर 2016- 100 अगस्त 2018- 500 सितंबर 2018- 2000
इस हिसाब से अकेले 2018 में ही अभी तक इंडोनेशिया में 2800 के करीब लोगों की जानें चली गईं. आपको बता दें कि ये सुनामी एक ज्वालामुखी के फटने से आई. इसकी वजह से उठी लहरों ने सैकड़ों बिल्डिंगों को तबाह कर दिया. अंतरराष्ट्रीय समय के अनुसार लहरों ने दक्षिणी सुमात्रा के किनारे को रात 9.30 मिनट पर हिलाकर रख दिया. सुनामी शनिवार को तब आई जब काराकोटा के "बच्चे" के तौर पर जाने जाने वाली ज्वालामुखी फट गई.
भूकंप और ज्वालामुखी के फटने से आने वाली सुनामी में ये फर्क होता है कि भूकंप से आने वाली सुनामी का अलर्ट सिस्टम मौजूद है. ऐसे में अधिकारी भूकंप आने से पहले मिली जानकारी के मुताबिक राहत और बचाव की तैयारियां कर सकते हैं. लेकिन ज्लावामुखी से आने वाली सुनामी के साथ ऐसा कुछ भी नहीं है. इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट सोसाइटीज ने कहा कि 'शक्तिशाली लहरें' 30-90 सेंटीमीटर (1-3 सेंटीमीटर) की ऊंचाई तक उठ रही थीं.
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