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ईरान के इस कदम से भारत हुआ मजबूत, पाकिस्तान के लिए बढ़ा खतरा
इरान के इस कदम से भारत पाकिस्तन ना जा कर अब वह अब जहाजों (समुद्र के रास्ते) के जरिए पहले ईरान के चाबहार बंदरगाह पर जाएगा और फिर वहां से ट्रकों द्वारा अफगानिस्तान पहुंचेगा.

नई दिल्ली: ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने रविवार को अरब सागर में स्थित अपने मुख्य बंदरगाह के नए बने एक्सटेंशन का उद्घाटन किया. यह विस्तार चाबहार बंदरगाह की क्षमता को तीनगुनी कर देगा और पडोसी देश पाकिस्तान में बन रहे बंदरगाह के लिए खतरा भी है. ओमान की खाड़ी में स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह का यह एक हिस्सा है. ईरान के 34 करोड डालर की इस परियोजना को एक नामी गिरामी कंपनी खतम अल अंबिया ने पूरा किया है. इसमें कई उप ठेकेदार हैं और एक भारतीय सरकारी कंपनी भी है. इस विस्तार के निर्माण से इस बंदरगाह की क्षमता 25 लाख टन से बढ कर 85 लाख टन सलाना हो गयी है. भारत के लिए चाबहार बंदरगाह क्यों है खास? भारत के लिए कई मायने में चाबहार बंदरगाह महत्वुपूण है, पहला कि भारत भी इरान के साथ इस परियोजना का अहम सहयोगी है. साथ ही इस बंदरगाह के बनने से भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यपार के लिए पाकिस्तान पर निर्भरता खत्म हो जाएगी. इस बंदरगाह के चालू होने से भारत, अफगानिस्तान और ईरान के बीच नए रणनीतिक रूट की शुरुआत होगी. भारत हुआ मजबूत, पाकिस्तान के लिए बढ़ा खतरा आपको बता दें कि अब तक भारत को अफगानिस्तान तक निर्यात करने के लिए पाकिस्तान हो कर जाना पड़ता था. लेकिन इरान के इस कदम से भारत पाकिस्तन ना जा कर अब वह अब जहाजों (समुद्र के रास्ते) के जरिए पहले ईरान के चाबहार बंदरगाह पर जाएगा और फिर वहां से ट्रकों द्वारा अफगानिस्तान पहुंचेगा. इस से भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यपार तो बढ़ेंगे ही साथ ही कूटनीतिक स्थिति भी मजबूत होगी. चाबहार बंदरगाह की अहम बात यह भी है कि यह पाकिस्तान में चीन से चलने वाले ग्वादर पोर्ट से करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर ही है. ऐसे में भातर-पाकिस्तान बीच तनाव के माहौल में बैलेंस करने में चाबहार बंदरगाह एक अहम भूमिका निभाएगा.
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Source: IOCL























