कैसे होगी US-भारत के बीच ट्रेड डील? पीयूष गोयल ने बताई ये शर्त
भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से प्रस्तावित द्विपक्षीय ट्रेड डील को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. इसमें बताया कि यह पहला चरण तभी शुरु होगा, जब भारत की टैरिफ प्रतिस्पर्धात्मकता को बहाल कर देगा.

भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से प्रस्तावित द्विपक्षीय ट्रेड डील को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. इसमें बताया गया है कि यह पहला चरण तभी शुरू होगा, जब वॉशिंगटन, प्रतिस्पर्धी निर्यातक देशों के मुकाबले भारत की टैरिफ प्रतिस्पर्धात्मकता (Competitiveness) को बहाल कर देगा.
इस मामले में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा, 'दोनों देशों के बीच बनी सहमति इस बात पर आधारित थी कि भारत को पड़ोसी देशों और आसियान इलाके के देशों समेत प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में तुलनात्मक लाभ मिले. एक बार यह शर्त पूरी हुई तो समझौता लागू हो जाएगा.'
पत्रकारों से बात करते हुए गोयल ने कहा, 'मैंने स्पष्ट रूप से और कई बार यह भरोसा जताया है कि द्विपक्षीय बिजनेस डील के पहले चरण के तौर पर हमने अमेरिका के साथ जो अंतिम रूप दिया, जिसकी घोषणा हमारे नेताओं ने 3 फरवरी को की ती, वह तभी लागू होगा, जब अमेरिका यह सुनिश्चित कर सके कि हमने अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में लाभ मिले. इनमें हमारे पड़ोस के देशों, आसियान क्षेत्र के देशों और अन्य देश शामिल हैं, जिनके साथ हम प्रतिस्पर्धा करते हैं.'
उन्होंने कहा. 'भारत को अमेरिकी बाजार में अपना निर्यात बढ़ाने का भरोसा है. बशर्तें टैरिफ के मामले में उसके साथ व्यवहार अनुकूल हो या प्रतिस्पर्धी देशों के बराबर हो. उन्होंने कहा कि हमारे लिए जबतक हमें तुलनात्मक लाभ मिलता रहेगा, मुझे लगता है कि भारत अपना निर्यात बढ़ाता रहेगा. अमेरिका के बड़े अवसर का लाभ उठाता रहेगा.'
उन्होंने कहा कि भारत ने श्रम संबंधी चिंताओं से जुड़ी ऑफिस ऑफ द यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव की धारा 301 के तहत जांच में भाग लिया था. उस जांच के तहत अमेरिका ने भारत पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया है.
अमेरिकी प्रशासन के एक विधायी प्रस्ताव पर टिकी सभी की नजरें
मंत्री का ये बयान ऐसे वक्त आया है, जब अमेरिकी प्रशासन के एक विधायी प्रस्ताव पर सभी की नजरें टिकी हैं. इसके तहत रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाया जा सकता है. अमेरिकी सीनेट में पेश किए गए लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी कच्चे तेल और नेचुरल गैस के प्रमुख खरीददारों से होने वाले आयात पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा.
हालांकि, प्रस्तावित कानून से अपने आप टैरिफ लागू नहीं हो जाएगा. धारा 113 के तहत ट्रंप के पास यह तय करने का विवेकाधीन अधिकार होगा कि टैरिफ लगाया जाए या नहीं. किन देशों पर यह लागू होगा. टैरिफ की दर क्या होगी. यह प्रस्ताव ऐसे वक्त आया है, जब अमेरिका ईरान संघर्ष के कारण हॉर्मुज से कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हुई है.
























