भोजपुरी बोलने वाले भारत के दोस्त ने निकाली चालबाज चीन की हेकड़ी, आंख में आंख डालकर सैन्य अड्डों को लेकर दे दिया अल्टीमेटम
CHINA Fiji: भारत के दोस्त फिजी ने चीन के नए सैन्य अड्डों को खुलकर विरोध किया है. उसने कहा है कि चीन जहां नए ठिकाने बनाने की सोच रहा है, उसकी जरूरत ही नहीं है.

CHINA Fiji: चीन अपनी चालबाजियों से बाज नहीं रहा है. वह भारत के साथ-साथ दूसरे कई देशों पर भी तिरछी नजर गड़ाए बैठा है. भारत के एक दोस्त ने चीन की हरकतों का खुलकर विरोध किया है. चीन कई नई जगहों पर सैन्य ठिकाने बनाने की फिराक है. इसको लेकर फिजी की प्रतिक्रिया सामने आई है. एक रिपोर्ट के मुताबिक फिजी ने चीन के लिए कहा है कि शक्ति प्रदर्शन के लिए सैन्य अड्डों की जरूरत नहीं है. चीन प्रशांत महासागर के द्वीपीय देशों में सैन्य ठिकाने बनाना चाहता है. दिलचस्प बात यह भी है कि फिजी में हिंदी और भोजपुरी भी बोली जाती है.
रॉयटर्स की एक खबर के मुताबिक फिजी के प्रधानमंत्री सीटिवेनी राबुका ने कहा है कि चीन को नए सैन्य ठिकाने बनाने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा, ''ये द्वीप चीन जैसे शक्तिशाली देश से निपटने की कोशिश कर रहे हैं. वह अपना प्रभाव और ज्यादा बढ़ाना चाहता है.'' प्रशांत महासागर के द्वीपीय देश रणनीतिक रूप से काफी अहम माने जाते हैं. इसी वजह से चीन इन इलाकों में अपने सैन्य ठिकाने बनाना चाहता है.
कर्ज के जाल में कई देशों को फंसा चुका है चीन
चीन अभी तक कई देशों को कर्ज के जाल में फंसा चुका है और वह इसके जरिए अपनी बात भी मनवाने की कोशिश में रहता है. अलजजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने श्रीलंका को हंबनटोटा बंदरगाह के लिए करीब 1.4 बिलियन डॉलर का कर्ज लिया है, लेकिन जब वह कर्ज नहीं चुका पाया तो 2017 में चीन को बंदरगाह और इसके आसपास के इलाके को लीज पर दे दिया. चीन इस इलाके को सैन्य ठिकाने के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है, लेकिन श्रीलंका ने कहा है कि ऐसा कोई प्लान नहीं है.
चीन और पाकिस्तान के बीच काफी अच्छे रिश्ते है. उसने पाक को चाइन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर के तहत लगभग 33 बिलियन डॉलर का कर्ज दिया है. इसमें ग्वादर पोर्ट के विकास की प्लानिंग शामिल है. ग्वादर पोर्ट को चीन ही चलाता है.
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