किसानों-मजदूरों का मन टटोलने के यूपी के 4000 गावों में BJP करेगी 'अलाव सभाएं'

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है, राजनीतिक दलों की ओर से तरह-तरह के कार्यक्रमों की घोषणा की जा रही है. नोटबंदी के बाद उपजे हालात और इसको लेकर किसानों और मजदूरों का मन टटोलने के उद्देश्य से भारतीय जनता पार्टी पूरे प्रदेश में अलाव सभाओं का आयोजन करने जा रही है. इसकी शुरुआत चार जनवरी से होगी.

नोटबंदी का दर्द सहने के बाद लोगों का रुझान किस ओर ?
बीजेपी और इसके मार्गदर्शक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सूत्र बताते हैं कि मुख्यतौर पर नोटबंदी के बाद फैले भ्रम को लेकर अलाव सभाओं का आयोजन होगा. पार्टी के नेता समझ नहीं कर पा रहे हैं कि नोटबंदी का दर्द सहने के बाद लोगों का रुझान किस ओर है. वह केंद्र सरकार के फैसले के साथ हैं या खिलाफ. यानी प्रधानमंत्री का यह कहना कि देश की सवा सौ करोड़ जनता उनके साथ है, यह पार्टी के नेताओं और संघ को भी 'जुमला' की तरह लगता है.
इस महाअभियान की शुरुआत खासतौर से ग्रामीण इलाकों की रीढ़ माने जाने वाले किसान व मजदूरों को लक्ष्य बनाकर की जा रही है. पार्टी के नेताओं का हालांकि दावा है कि इन सभाओं के माध्यम से वह सरकार की कमियों को उजागर करने का काम करेगी. इन अलाव सभाओं के बाद जिला स्तर पर माटी, तिलक व प्रतिज्ञा बैठकों का आयोजन किया जाएगा.
यूपी की 343 विधानसभा क्षेत्रों में अलाव सभाओं का आयोजन
पार्टी के मीडिया प्रभारी हरीश श्रीवास्तव ने बताया कि यह महाअभियान किसानों व मजदूरों के लिए चलाया जा रहा है. किसान महाअभियान का फैसला प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य और प्रदेश प्रभारी ओम माथुर की सहमति से लिया गया. यूपी की 343 विधानसभा क्षेत्रों में अलाव सभाओं का आयोजन किया जाएगा.
उन्होंने बताया कि सभी अलाव सभाओं का आयोजन सभी 75 जिलों में किया जाएगा. यह 13 जनवरी तक चलेगा. अलाव सभाओं के पूरा होने के बाद सभी जिलों में माटी, तिलक, प्रतिज्ञा सभाओं का आयोजन किया जाएगा.
यूपी में विधानसभा चुनाव के दौरान किस करवट बैठेगा नोटबंदी का ऊंट
संघ के सूत्रों के मुताबिक, दरअसल नोटबंदी के बाद जिस तरह का माहौल यूपी में बना है, उससे बीजेपी के शीर्ष नेताओं के साथ ही संघ भी चिंतित है. संघ को भी यह समझ में नहीं आ रहा है कि नोटबंदी का ऊंट यूपी में विधानसभा चुनाव के दौरान किस करवट बैठेगा. यदि मामला उलटा पड़ा तो बीजेपी की सत्ता में वापसी का ख्वाब बिखर जाएगा.
संघ के एक पदाधिकारी ने बताया कि संघ भी यह चाहता है कि समय रहते ग्रामीण इलाकों में इसके 'फीडबैक' को भांप लिया जाए, ताकि समय रहते नोटबंदी के फायदे के बारे में लोगों को समझाया जा सके.
संघ का मानना है कि शहरी इलाकों में हमेशा से उसकी पकड़ रही है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में पकड़ बनाए बिना मिशन 2017 की जंग जीतना असंभव है, इसीलिए बीजेपी को साफतौर पर किसानों और मजदूरों के बीच जाने का निर्देश दिया गया है.
Source: IOCL
























