केंद्र के आर्थिक पैकेज पर सीएम नीतीश ने की चर्चा, बिहार में चरमराई अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए दिए कई सुझाव
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार में शहद उत्पादन की असीम संभावनाए हैं. जीविका की तरफ से की जा रही कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को बढ़ावा देने और उसके विस्तार करने की भी बात कही.

पटना: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भारत सरकार द्वारा घोषित आर्थिक पैकेज पर सोमवार को विचार-विमर्श किया. पैकेज का लाभ श्रमिकों-कृषकों को हो उसको लेकर निर्देश दिए और मनरेगा के तहत श्रम दिवस 100 से बढ़ाकर 200 करने का केंद्र से आग्रह किया. साथ ही मखाना, शाही लीची, शहद को लेकर बिहार में असीम संभावनाएं बताते हुई इनकी ब्रांडिंग करने पर जोर दिया.
वहीं उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने ट्वीट कर जानकारी दी कि बिहार में कोरोना संकट की वजह से राजस्व संग्रह में भारी गिरावट हुई है. राज्य में राजस्व संग्रह में 82.29 फीसदी की कमी आई है. अप्रैल तक सभी स्त्रोंतों से 9861 करोड़ की राजस्व प्राप्ति हुई है जबकि बिहार सरकार ने इस दौरान 12,202 करोड़ रकम खर्च किया है.
हालांकि मुख्यमंत्री ने बिहार की चरमराई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के कई सुझाव दिए. उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य है कि हर हिन्दुस्तानी की थाल में बिहार का एक व्यंजन हो जिसे मखाना पूरा कर सकता है, इससे कृषि रोडमैप में निर्धारित लक्ष्य भी पूरा हो सकेगा. मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मखाना और मखाना उत्पादों को बढ़ावा देने पर बल दिया जाए. मखाना का उत्पादन क्षेत्र बढ़ायें, उसकी प्रोसेसिंग और मखाना उत्पादों के लिए बाजार को बढ़ावा दें. इसकी ब्रांडिंग भी करें. मखाना का व्यापार बिहार से ही हो, इसकी योजना बनाएं. इससे बिहार की अर्थव्यवस्था भी बढ़ेगी.
मखाना के साथ-साथ शाही लीची, चिनिया केला, आम, फल उत्पादन, मेंथा तेल, खस तेल, कतरनी चावल और दूसरे कृषि उत्पादों के क्लस्टर को भी बढ़ावा देने की बात कही. कृषि उत्पादों के लिए बाजार की उपलब्धता के साथ-साथ पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट पर भी ध्यान देने पर बल दिया. उन्होंने स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों के बीमा से संबंधित तिथि विस्तार करने के लिए केन्द्र से अनुरोध करने की भी बात की. गंगा नदी के तट पर बनाये गए जैविक खेती कोरिडोर में मेडिसिनल प्लांट के उत्पादन को बढ़ावा देने, लेमन ग्रास, खस और मेंथा के उत्पादन एवं उत्पादन क्षेत्र को बढाने के साथ-साथ राजगीर पहाड़ियों पर जो काफी संख्या में मेडिसिनल प्लांट हैं, उनका अध्ययन करवाने और इनके उपयोग के लिये संस्थागत व्यवस्था करने की बात कही.
नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार में शहद उत्पादन की असीम संभावनाए हैं. इसके लिए शहद की प्रोसेसिंग यूनिट और मार्केटिंग एवं ब्रांड वैल्यू पर विशेष बल देने की बात कही. शहद उत्पादन को सहकारी संस्थानों से लिंक करने का सुझाव दिया. शहद से संबंधित वैल्यू एडेड उत्पादों यथा रॉयल जेली, बी वैक्स, पौलेन, वेनम आदि, जिनके संबंध में कृषि रोडमैप में भी बल दिया गया है, को बढ़ावा देने पर जोर दिया. उन्होंने इस बात की जानकारी दी कि केन्द्र सरकार एग्रीकल्चर मार्केटिंग रिफॉर्म लागू करने जा रही है जबकि बिहार में 2008 से ही एपीएमसी खत्म कर दी गयी है.
मुख्यमंत्री ने जीविका द्वारा की जा रही कान्ट्रैक्ट फार्मिंग को बढ़ावा देने और उसके विस्तार करने की बात की. बड़े और छोटे पशुओं जैसे गाय, भैंस, बकरी, मेंड, सुअर का शत प्रतिशत एफएमडी टीकाकरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. बिहार के बाहर से आ रहे श्रमिकों के लिए उनकी स्किल मैपिंग के अनुसार रोजगार सृजन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिये राज्य में संचालित इकाईयों में श्रमिकों को उनके स्किल के अनुरूप रोजगार उपलब्ध कराने, साथ ही नई निर्माण इकाईयों की स्थापना के लिई समुचित कार्रवाई करने की बात कहते हुए उन्होंने ये आश्वासन दिया कि नये उद्योगों को लगाने में सरकार पूरी मदद करेगी.
सीएम नीतीश ने स्किल सर्वे के अंतर्गत श्रमिकों के स्किल की विवरणी के अनुरूप क्या-क्या नये उद्योग लगाये जा सकते हैं, क्या मदद दी जा सकती है इस पर विचार करने की बात कही. आवश्यकता होने पर नीतियों में सुधार किया जा सकता है. इसके लिए वित्त विभाग, उद्योग विभाग, श्रम विभाग और दूसरे संबंधित विभागों के सचिवों की एक राज्यस्तरीय टास्क फोर्स बनायी जाएगी जो इस संबंध में सुझाव देगी.
वहीं राज्य की मौजूदा आर्थिक स्थिति की जानकारी देते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि कोरोना संकट के कारण राज्य के राजस्व संग्रह में पिछले वर्ष के अप्रैल माह की तुलना में इस साल अप्रैल में 82.29 प्रतिशत की कमी आई है. अप्रैल, 2020 में जहां वेतन, पेंशन, आपदा प्रबंधन, सामाजिक सुरक्षा, लोकऋण के मूलघन व ब्याज की वापसी और पंचायतों के अनुदान पर 12202 करोड़ खर्च हुआ वहीं सभी तरह के संसाधनों से मात्र 9861 करोड़ ही प्राप्त हो पाया. इसकी वजह से 2341 करोड़ के घाटे को पहले की बचत की राशि से पूरा किया गया.
डिप्टी सीएम ने बताया कि साल 2019 के अप्रैल में राज्य का अपना राजस्व संग्रह 2542.23 करोड़ की तुलना में 24 मार्च से लौकडाउन लागू हो जाने के कारण अप्रैल 2020 में मात्र 450.21 करोड़ ही हो पाया. वाणिज्य कर का अप्रैल, 2019 के 1,622.23 करोड़ की तुलना में अप्रैल, 2020 में मात्र 256.21 करोड़, निबंधन से 299.21 करोड़ की जगह 4.0 करोड़, परिवहन से 189.68 करोड़ की जगह 31 करोड़, खनन से 71.16 करोड़ की जगह 60 करोड़ और दूसरे स्रोतों से 359.95 करोड़ की तुलना में केवल 99 करोड़ का ही संग्रह हो पाया.
सुशील मोदी ने कहा कि इस प्रकार राज्य को अपने अन्य स्रोतों से कुल 450.21 करोड़ के राजस्व संग्रह के साथ केन्द्रीय करों में हिस्से के रूप में 4,632 करोड़ और भारत सरकार से अनुदान के तौर पर 2,450 करोड़ सहित सभी दूसरे संसाधनों से केवल 9861 करोड़ प्राप्त हुआ जिसकी वजह से खर्च और आय में 2341 करोड़ का घाटा रहा.
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